कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव व सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला ने आरोप लगाया कि अंधाधुंध खनन व धारा मोड़ 'नदियों की हत्या' से हरियाणा पंजाब में बाढ़ के हालात बने हैं। यमुनानगर में कांग्रेस नेता सतीश तेजली के निवास पर मीडिया से बातचीत करते हुए रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि अब ढोल की पोल खुल गई है। सरकारी निकम्मेपन और नाकारापन की असलियत लोगों के सामने है। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचारी हवस के चलते "अंधाधुंध माइनिंग", "नदियों की धारा मोड़ना" तथा रेत व पत्थर का माइनिंग माफिया द्वारा बेरोकटोक दोहन से षड्यंत्रकारी तौर से 'नदियों व नालों की हत्या' की गई।
न प्रशासन को मुस्तैद किया और न ही कोई इंतजाम किया
भ्रष्टाचारी हवस के चलते अंधाधुंध माईनिंग, नदियों की धारा मोड़ना तथा रेत व पत्थर का माईनिंग माफिया द्वारा बेरोकटोक दोहन से षडयंत्रकारी तौर से नदियों व नालों की हत्या की गई। अब ढोल की पोल खुल गई है। सरकारी निकम्मेपन और नाकारापन की असलियत लोगों के सामने है। बाढ़ से पहले न बाढ़ रोकथाम का इंतजाम हुआ, न बजट इस्तेमाल हुआ, न तटबंध पक्के किए गए, न ड्रेन, नालों और नदियों की डिसिल्टिंग, सफाई व गाद निकाली गई, न पंपिंग सेट का इंतजाम किया, न ड्रेनेज साफ किए, न इंजन लगाए गए, न मॉक ड्रिल की, न प्रशासन को मुस्तैद किया और न ही कोई इंतजाम किया।
कपास हो या गन्ना या धान या सब्जियां, बेतहाशा नुकसान हुआ
हरियाणा के 5,000 गांव जलमग्न हैं, 11 शहर व 72 कस्बों में पानी भर चुका है। 40 से अधिक लोग जान गंवा चुके। किसान परिसीमन की 15,00,000 एकड़ से ज्यादा फसल बाढ़ के पानी से डूबकर बर्बाद हो गई है। बाढ़ के हाहाकार, चौतरफा विनाश और भयंकर नुकसान के लिए प्राकृतिक आपदा से बढ़कर नायब सैनी सरकार जिम्मेवार है। भयावह नतीजे सबके सामने हैं। कपास हो या गन्ना या धान या सब्जियां, बेतहाशा नुकसान हुआ है। उद्योग धंधे पूरी तरह से चौपट हैं। अंबाला में पूरा साईंटिफिक इंस्ट्रूमेंट उद्योग व इंडस्ट्रियल एरिया कई-कई फुट पानी के नीचे है, तो बहादुरगढ़ में मारुति के कार यार्ड से लेकर सभी फैक्ट्रियां बाढ़ के पानी की चपेट में हैं।
यमुनानगर में हालात और बुरे
यही नहीं, एनएच 344 के साथ लगती चतंग नदी, राक्षी नदी सफाई न होने के कारण हजारों एकड़ में पानी भर गया। यमुना नगर में हालात और बुरे हैं। दादूपुर-नलवी नहर परियोजना को कागजों में बंद कर दिया, पर इस बाढ़ में कैल गांव में नहर की पटरी टूट गई और दर्जनों गांव, कैल, रुलाखेड़ी, सुडल, सुडैल, गूगलो, बम्भोल बाढ़ की चपेट में आ गए। सोम नदी के तो तटबंध तो बनाए ही नहीं गए, जिससे दर्जनों गांव में पानी घुस गया। यह नायब सैनी सरकार की अपराधिक लापरवाही नहीं, तो क्या है? यमुना, घग्गर, मारकंडा, टांगरी, रूण, वेगना, सोम-पथराला नदियां पूरे उफान पर हैं और अनेकों जगह तटबंध टूट गए हैं।
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