हरियाणा पुलिस के एएसआई संदीप कुमार ने मंगलवार को खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली। संदीप रोहतक साइबर सेल में तैनात थे और 1 साल से रोहतक के लाढ़ौत रोड पर अपने मामा बलवान देशवाल के घर में रह रहे थे। घटनास्थल से पुलिस को 4 पेज का सुसाइड नोट और एक वीडियो मिला है जिसमें उन्होंने दिवंगत आईपीएस वाई. पूरन कुमार और उनके गनमैन सुशील कुमार पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए। परिवार में संदीप की पत्नी, मां और 3 बच्चे हैं। संदीप ने 5 साल पहले परिवार सहित रोहतक शिफ्ट किया था। गत 15 अगस्त को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने संदीप को सम्मानित भी किया था।
एसपी सुरेंद्र भौरिया ने बताया कि संदीप बहुत ईमानदार पुलिसकर्मी था
मंगलवार दोपहर संदीप ने अपने मामा के खेत में बने कमरे (कोठड़े) में सर्विस रिवॉल्वर से खुद को गोली मार ली। खेत में काम करने वाले जेलदार ने बताया कि वह नहर की तरफ गया था। लौटते समय गोली चलने की आवाज आई। मौके पर पहुंचा तो देखा कि संदीप खून से लथपथ पड़े थे। इसके बाद परिवार को सूचना दी गई। एसपी सुरेंद्र भौरिया ने बताया कि संदीप बहुत ईमानदार पुलिसकर्मी था। साइबर सेल में उसकी पोस्टिंग थी। उसने खुद को गोली मारकर जान दी है। घटनास्थल से सुसाइड नोट और वीडियो मिले हैं जिनकी जांच की जा रही है। परिवार के बयान भी दर्ज होंगे।
दिवंगत आईपीएस वाई. पूरन कुमार और उनके गनमैन पर रिश्वत और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए
फिलहाल कुछ कहना मुश्किल है लेकिन जो हुआ, वह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। रोहतक पुलिस ने शाम को प्रेस नोट जारी कर संदीप कुमार के सुसाइड की पुष्टि की और कहा कि जांच के लिए विशेष टीम गठित की गई है। संदीप कुमार ने अपने अंतिम वीडियो और सुसाइड नोट में दिवंगत आईपीएस वाई. पूरन कुमार और उनके गनमैन सुशील कुमार पर रिश्वत और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं। संदीप ने कहा कि करप्शन केस में फंसने और बदनामी के डर से ही आईपीएस वाई. पूरन कुमार ने आत्महत्या की थी। उन्हें यह डर सता रहा था कि परिवार की राजनीति पर इसका असर पड़ेगा।
संदीप अपने दादा से प्रेरित होकर ही पुलिस में भर्ती हुए थे
उल्लेखनीय है कि गत 06 अक्टूबर को रोहतक पुलिस ने आईपीएस वाई. पूरन कुमार के गनमैन सुशील कुमार को शराब कारोबारी से रिश्वत मांगने के आरोप में गिरफ्तार किया था। इसके अगले दिन 07 अक्टूबर को चंडीगढ़ में आईपीएस वाई. पूरन कुमार ने अपनी कोठी पर खुद को गोली मारकर जान दे दी थी। संदीप कुमार मूल रूप से जुलाना (जींद) के रहने वाले थे। उन्होंने 2007 में पुलिस ज्वाइन की थी। उनके पिता दयानंद इंस्पेक्टर थे जिनका करीब 20 साल पहले रेल दुर्घटना में निधन हो गया था। दादा भरत सिंह फौज में थे। संदीप अपने दादा से प्रेरित होकर ही पुलिस में भर्ती हुए थे।