अमेरिका जाकर बेहतर भविष्य बनाने का सपना देखने वाले युवाओं के लिए एक और झटका सामने आया है। डोंकी रूट के जरिए अवैध रूप से अमेरिका पहुंचे 50 भारतीय नागरिकों को अमेरिकी सरकार ने डिपोर्ट कर दिया है, जिनमें करनाल जिले के 16 युवक शामिल हैं। यह वह लोग थे जो लाखों रुपए लगाकर अमेरिका में अपने सपने पूरे करने के लिए और पैसा कमाने के लिए गए थे लेकिन वहां की सरकार के द्वारा उनका डीपोर्ट कर दिया गया जिसके चलते अब वह अपने टूटे हुए सपने लेकर अपने वतन लौट आए हैं। इनमें से असंध के पोपड़ा गांव निवासी हुसन की कहानी सबसे दर्दनाक है।
हुसन को डिपोर्ट किए जाने की खबर के बाद से घर में मातम पसरा
परिवार का कहना है कि हुसन को डिपोर्ट किए जाने की खबर के बाद से घर में मातम पसरा है। मां और तीनों बहनें सदमे में हैं, किसी से बात तक नहीं कर रहीं। हुसन के चाचा सलिंदर सिंह ने बताया कि भतीजे की जिद के आगे उन्होंने सब कुछ बेच दिया, ताकि वह विदेश जाकर परिवार का नाम रोशन कर सके। हमने एक किला जमीन, डिजायर कार और मोटरसाइकिल तक बेच दी, लेकिन अब सब कुछ खत्म हो गया। सलिंदर सिंह ने बताया कि उनके भतीजे को अहर गांव के एक एजेंट ने 45 लाख रुपये में अमेरिका भेजने का ठेका लिया था। एजेंट ने पहले हुसन को तीन महीने दिल्ली में ही रोककर रखा, फिर मैक्सिको के रास्ते अमेरिका भेजा। लेकिन वहां पहुंचने के बाद अमेरिकी प्रशासन ने उसे हिरासत में ले लिया।
खाने के नाम पर दिनभर में सिर्फ एक बर्गर दिया जाता था
हुसन को 11 महीने अमेरिका की जेल में रखा गया। खाने के नाम पर दिनभर में सिर्फ एक बर्गर दिया जाता था। न जीने देते थे, न मरने। चाचा ने बताया कि हुसन को बाकी भारतीय युवकों के साथ डिपोर्ट कर भारत भेज दिया गया। अब परिवार पर लाखों रुपये का कर्ज चढ़ चुका है और हुसन मानसिक रूप से टूट चुका है। गांव के लोगों का कहना है कि एजेंटों के झांसे में आकर कई परिवार अपनी जमा-पूंजी गंवा बैठे हैं। करनाल के सगोही गांव के रहने वाले रजत भी उनमें से एक है।कल देर शाम रजत अपने गांव में पहुँचे थे।जिन्होंने अपनी पूरी दस्ता ब्या।रजत के परिवार ने दुकान बेची, प्लाट बेचा और लाखों रुपए खर्च करके रजत को अमेरिका भेजा था।
रजत अमेरिका के लिए अपने घर से निकला था, ताकि परिवार की स्थिति को ठीक कर सके
रजत ने बताया बीते साल 26 मई को अमेरिका के लिए अपने घर से निकला था अपने ताकि अपने और अपने परिवार की स्थिति को ठीक कर सके, रजत ने बताया पनामा के जंगलों से 12 -13 लड़कों का ग्रुप था जो गया था। 45 लाख के करीब उनके पैसे लग गए थे। युवक ने बताया उनके पिता हलवाई का काम करते हैं। अब वापस लौटकर मैं अपने पिता के साथ काम करूंगा। रजत ने बताया ने बताया जंगलों के रास्ते चलना पड़ता था जहां-जा हां कोई मिलता था वहां वहां रुक जाते थे गाड़ियों में भी लोगों का ग्रुप होता था। साथ वह भी चला करता था।
ऐसे एजेंटों पर सख्त कार्रवाई की जाए
2 दिसंबर को रजत बॉर्डर क्रॉस कर चुका था। पहले 12 से 13 दिन हमें वहां रखा गया इसके बाद कहीं और ले जाया गया, 20 अक्टूबर को पता लग चुका था कि अब उन्हें भारत वापस भेजा जाएगा, उन्होंने कहा मेरे साथ किसी भी तरह का कोई गलत सलूक नहीं किया गया लेकिन वहां दिक्कतों का सामना जरूर करना पड़ा। प्रशासन से मांग की जा रही है कि ऐसे एजेंटों पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि कोई और परिवार इस तरह बर्बाद न हो।
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