मीडिया को जारी बयान में कुमारी सैलजा ने कहा कि सरकार ने खर्च घटाने और नीतिगत सुधार के नाम पर जो कदम उठाए हैं, वे वास्तव में गरीब और मध्यम वर्ग की पीड़ा बढ़ाने वाले साबित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि सिरसा सहित राज्य के अधिकांश जिला अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों के पद खाली पड़े हैं, अनेक विभागों में तकनीशियन नहीं हैं, और आवश्यक उपकरण या तो अनुपलब्ध हैं या खराब अवस्था में पड़े हैं। स्वास्थ्य सेवाएं किसी भी सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी होती हैं, लेकिन मौजूदा सरकार ने इसे पूरी तरह उपेक्षित कर दिया है। गरीब मरीज अपने अधिकार के लिए भी संघर्ष कर रहे हैं।
बकाया भुगतान का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं किया गया
सांसद ने कहा कि आयुष्मान योजना का मूल उद्देश्य गरीब और जरूरतमंद परिवारों को निशुल्क उपचार प्रदान करना था, लेकिन वर्तमान स्थिति में यह योजना अपने मकसद से भटक चुकी है। उन्होंने कहा कि कई अस्पताल इस योजना के तहत मरीजों का इलाज करने से कतराते हैं, जबकि सरकार की ओर से उनके बकाया भुगतान का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं किया गया। सांसद कुमारी सैलजा ने सरकार से मांग की कि सभी सिविल अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति, आवश्यक मशीनों की उपलब्धता, और जीवनरक्षक दवाओं का पर्याप्त स्टॉक तुरंत सुनिश्चित किया जाए।
जिला अस्पतालों में एक अलग ग्रीन हेल्प डेस्क बनाई जाए
उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि जिला अस्पतालों में एक अलग ग्रीन हेल्प डेस्क बनाई जाए, जहां आयुष्मान और ग्रीन कार्ड धारक मरीजों को प्राथमिकता के आधार पर पर्ची, परामर्श और उपचार की सुविधा दी जा सके। कुमारी सैलजा ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द सुधारात्मक कदम नहीं उठाए, तो कांग्रेस पार्टी इस मुद्दे को विधानसभा से लेकर सड़को तक उठाएगी। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं बल्कि जनहित के लिए लड़ी जाएगी। जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कांग्रेस जनता के साथ खड़ी है और गरीबों को उनका हक दिलाकर रहेगी।
सभी प्रबंंध करने के बाद ही प्राइवेट अस्पतालों की सूची से रोगों को हटाना चाहिए था
स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर गरीब मरीजों से हो रहा है मजाक सांसद कुमारी सैलजा ने कहा कि प्रदेश में एक करोड़ 30 लाख गरीब लोग आयुष्मान और चिरायु योजना के दायरे में आते हैं। प्रदेश की भाजपा सरकार ने अनेक रोगों के उपचार को प्राइवेट अस्पतालों की सूची से हटाते हुए कहा है कि इन रोगों का उपचार और आपेरशन की सुविधा सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध करवाई जाएगी।
सरकार को सबसे पहले सरकारी अस्पताल में सभी प्रबंंध करने के बाद ही प्राइवेट अस्पतालों की सूची से रोगों को हटाना चाहिए था, पर एक ओर सूची से रोगों का उपचार और आपरेशन बंद कर दिए तो दूसरी ओर सरकारी अस्पतालों में सुविधा नहीं है। कूल्हें और घुटने बदलने की सुविधा बहुत कम अस्पतालों में है, कहा आर्थोपेडिक सर्जन है को ट्रांसप्लांट की सुविधा नहीं है, इतना ही नहीं अनेक सरकार अस्पताल तो ऐसे है जहां पर बबासीर, हार्नियां और अपेंडिक्स के आपरेशन तक की सुविधा नहीं है।