हरियाणा के सहकारिता विभाग में आईसीडीपी योजना के घोटाले में फंसे दो सहायक रजिस्ट्रारों को निलंबित कर दिया गया है। कृष्ण चंद्र जो करनाल में तैनात थे और जितेंद्र कौशिक जो कैथल में तैनात थे, उनको मुख्यालय से निलंबित कर दिया गया है। उनके खिलाफ गिरफ्तारी के आदेश पहले ही दे दिए गए थे।
सहकारिता विभाग ने कहा कि इस घटना के बाद विभागीय अधिकारियों को गिरफ़्तार कर लिया गया। उनके ख़िलाफ़ कुछ सबूत मिले जिसके आधार उन्हें गिरफ़्तार कर लिया गया था। इस घटना के बाद, अनु कौशिश, रोहित गुप्ता, बलविंद्र, और डॉ. रामकुमार जैसे अन्य अधिकारियों को भी निलंबित किया गया है। यह घटना सहकारिता विभाग में एक बड़ा झटका मानी जा रही है।
आईसीडीपी योजना में घोटाले के आरोपों के बाद, एंटी करप्शन ब्यूरो ने इन अधिकारियों को गिरफ्तार किया था। वे संविदा(कॉंट्रैक्ट) पर काम कर रहे थे और उनके ऊपर घोटाले के आरोप दर्ज किए गए थे।
इसके साथ ही, पानीपत में आईसीडीपी में करोड़ों के घोटाले के आरोपी सहायक रजिस्ट्रार डॉ. रामकुमार के खिलाफ एंटी करप्शन ब्यूरो ने एक और मुकदमा दर्ज किया है। उनके ऊपर पहला मुक़दमा रेवाड़ी में हुए घोटाले में दर्ज किया गया था। बताया जा रहा है कि उनके बैंक खाते में अनु कोशिश के खाते से पैसे ट्रांसफर हुए थे। उनको रेवाड़ी वाले मुक़दमे में तो ज़मानत मिल गई थी।किंतु अब उनको पानीपत के घोटाले में गिरफ्तार किया गया है और उनके द्वारा आरोपों को स्वीकार भी कर लिया किया गया है।
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