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The Haryana Story | पहले लगातार 18 घंटे कान हिलाकर लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड में नाम दर्ज़, अब इंटरनेशनल हुमन सॉलिडेरिटी अवॉर्ड 2025 से सम्मानित

पहले लगातार 18 घंटे कान हिलाकर लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड में नाम दर्ज़, अब इंटरनेशनल हुमन सॉलिडेरिटी अवॉर्ड 2025 से सम्मानित

17 देश में काम करने वाली सोक्रेट्स सोशल रिसर्च यूनिवर्सिटी द्वारा जगदीश मलिक सम्मानित

लगातार 18 घंटे कान हिला कर लिम्का बुक आप रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज करवाने वाले समालखा वासी डॉक्टर जगदीश मलिक को 17 देश में काम करने वाली सोक्रेट्स सोशल रिसर्च यूनिवर्सिटी अंतरराष्ट्रीय संस्था ने योग और ध्यान साधना में इंटरनेशनल हुमन सॉलिडैरिटी अवॉर्ड 2025 का अवार्ड देकर डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया है, जिसको लेकर जगदीश मलिक के घर उन्हें बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है। जगदीश मलिक ने बताया कि वह वर्ष 2001 में जब स्पेयर पार्ट्स की दुकान चल रहा था तो अचानक जब वह शीशे के आगे खड़ा था तो उसने अपने कान को हिलते हुए देखा और उसने वहीं से कान हिलाने का अभ्यास करना शुरू कर दिया था, और और वह लगातार इसी धुन में कान हिलाने का अभ्यास निरंतर करता रहा।

इनकी इस उपलब्धि का रिकॉर्ड किसी से नहीं टूट पाया

उन्होंने बताया कि इस बारे में जब जिला पानीपत प्रशासन को पता लगा तो प्रशासन ने उससे संपर्क किया और उसे कहा कि वह कान हिलाने की प्रैक्टिस हमारे सामने करें तो जगदीश प्रशासनिक अधिकारियों के पास गया और उसने उसे अभ्यास को प्रशासन के सामने करना शुरू कर दिया। प्रशासन की ओर से उस अभ्यास की वीडियो बनाकर उसका सबूत के तौर पर रिकॉर्ड अपने पास रखा और वर्ष 2001 में ही जिला प्रशासन की ओर से उन्हें इस उपलब्धि को लेकर जिला प्रशासन की ओर से सम्मानित किया गया था, हालांकि वर्ष 2003 में उसका लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड में नाम दर्ज हो गया था और अब तक उस उपलब्धि में उसका रिकॉर्ड किसी से नहीं टूट पाया है।

निस्वार्थ भाव से सिखाते हैं योग और ध्यान 

डॉ. जगदीश मलिक ने बताया कि हालांकि अब वह कुछ काम दिल्ली में भी करता है और काम के साथ-साथ वह योग और साधना करने का भी काम कर रहा है और कई सालों से वह निस्वार्थ भाव से स्कूलों विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संस्थाओं में जाकर लोगों को योग और ध्यान साधना करने के लिए भी प्रेरित कर रहा है, उसने कहा कि वह किसी से कोई भी पैसा नहीं लेता, केवल और केवल लोगों को अच्छा स्वास्थ्य देने के लिए वह यह काम कर रहा है, उसने कहा कि इस बारे में भी कई संस्थाओं को मेरे बारे में पता लगा तो उन्होंने मेरे को बुलाया और योग साधना करवाकर मेरा अभ्यास अपने पास रिकॉर्ड के रूप में रखा और उन्होंने इस बारे में गहनता से जांच की। उन्होंने कहा कि सोक्रेट्स सोशल रिसर्च यूनिवर्सिटी जो कि 17 देश में विभिन्न क्षेत्र में काम करने वाले लोगों को सम्मान देने का काम करती है और इसी यूनिवर्सिटी ने जगदीश मलिक को इंटरनेशनल हुमन सॉलिडैरिटी अवॉर्ड 2025 का अवार्ड देकर डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया है।

मन में कुछ करने की लग्न हो तो जरूर मिलती है सफलता 

डॉ. जगदीश मलिक ने कहा कि यह सम्मान समस्त समालखा वासियों का सम्मान है, क्योंकि जिस तरह से कड़ी मेहनत व लगन से मैंने इस मुकाम को हासिल किया है, निश्चित रूप से आज की युवा पीढ़ी इससे कुछ प्रेरणा लेकर और लगन से काम करने की सोच रखें तो उन्हें भी उनके द्वारा की गई मेहनत के कार्य में सफलता मिलेगी। जगदीश मलिक ने कहा कि जीवन में आगे केवल वही व्यक्ति बढ़ते हैं जो मन में कुछ करने की लगन रखते हैं, क्योंकि दूसरों पर आरोप लगाने वाले व्यक्ति अगर खुद अपने अंदर झांक कर देखें तो हर आदमी के अंदर जो बुराइयां हैं वह दूर हो सकती हैं, इसलिए हर व्यक्ति हमेशा समाज और राष्ट्र के हित में जो भी कार्य हो उसको करने कि अपने मन में सोच पैदा करें।

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