कहते हैं कि प्रतिभा उम्र की मोहताज नहीं होती, उसे बस सही दिशा, कड़ी मेहनत और सही प्रोत्साहन की जरूरत होती है। इस बात को पूरी तरह सच साबित कर दिखाया है अंबाला कैंट के महज 6 साल के एक नन्हे उस्ताद ने। अंबाला कैंट के खड़गा आर्मी प्राइमरी स्कूल में पढ़ने वाले अव्यान कौशिक ने अपनी अद्भुत खेल प्रतिभा के दम पर 'इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स 2026' में अपना नाम सुनहरे अक्षरों में दर्ज करा लिया है। नन्हे अव्यान ने जो कारनामा किया है, उसे देखकर अच्छे-अच्छे दांतों तले उंगली दबाने को मजबूर हो जाएं। उन्होंने पैरों में स्केट्स पहनकर संतुलन बनाते हुए एक हाथ से लगातार 1055 बार बास्केटबॉल ड्रिब्लिंग करने का अनोखा कीर्तिमान स्थापित किया है।
10 मिनट तक नहीं डिगा संतुलन, थामे रखी गेंद की रफ्तार
अव्यान कौशिक ने यह ऐतिहासिक उपलब्धि महज 6 साल, 6 महीने और 9 दिन की उम्र में हासिल की है। रिकॉर्ड बनाने के दौरान अव्यान ने पूरे 10 मिनट और 20 सेकंड तक स्केट्स पर अपना शानदार बैलेंस बनाए रखा। इस पूरे समय के दौरान उन्होंने अपने दाएं हाथ से लगातार बास्केटबॉल को ड्रिबल किया। सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि इतने लंबे समय तक न तो उनका संतुलन एक पल के लिए भी बिगड़ा और न ही गेंद पर से उनकी पकड़ कमजोर हुई।
बचपन से ही है स्केटिंग का जुनून: अव्यान
अपनी इस शानदार सफलता और रिकॉर्ड के बारे में बात करते हुए 6 वर्षीय अव्यान कौशिक के चेहरे पर एक मासूम सी मुस्कान तैर गई। उन्होंने अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा, 'मुझे बचपन से ही स्केटिंग करने का बहुत ज्यादा शौक है। आज यह बड़ा रिकॉर्ड बनाकर मुझे बहुत ज्यादा खुशी हो रही है। मैं यहीं रुकने वाला नहीं हूं, आगे चलकर इससे भी बड़ा रिकॉर्ड बनाना चाहता हूं और देश का नाम रोशन करना चाहता हूं।'
स्कूल और परिवार में जश्न का माहौल
अव्यान की इस अविश्वसनीय कामयाबी के बाद उनके परिवार और खड़गा आर्मी प्राइमरी स्कूल में जश्न का माहौल है। शिक्षकों और परिजनों का कहना है कि अव्यान बचपन से ही बेहद ध्यान केंद्रित करने वाला बच्चा है। स्केट्स और बास्केटबॉल के इस अनूठे कॉम्बिनेशन के लिए वह पिछले काफी समय से कड़ी मेहनत कर रहा था। खेल विशेषज्ञों का भी मानना है कि इतनी छोटी उम्र में स्केटिंग के साथ बास्केटबॉल ड्रिब्लिंग के लिए गजब के मानसिक और शारीरिक संतुलन की आवश्यकता होती है, जो अव्यान ने बखूबी कर दिखाया।
माता-पिता और स्केटिंग कोच की मेहनत भी शामिल
अव्यान की इस सफलता के पीछे उनके माता-पिता और स्केटिंग कोच की मेहनत भी शामिल है। लगातार अभ्यास और परिवार के सहयोग ने इस नन्हे खिलाड़ी को राष्ट्रीय पहचान दिलाई है।उनकी माता शिल्पा ने बताया कि हर बच्चे में कोई न कोई विशेष प्रतिभा होती है। जरूरत उसे पहचानकर सही दिशा देने की होती है। अव्यान ने लगातार मेहनत की और 200-300 ड्रिब्लिंग से शुरू होकर 1000 से ज्यादा ड्रिब्लिंग तक का सफर तय किया।"वही पिता का कहना है कि अव्यान को बचपन से ही मेडल जीतने का शौक था। वह घर में भी स्केट्स पहनकर घूमता रहता था और हर समय अभ्यास करता था। आज बेटे ने कम उम्र में रिकॉर्ड बनाकर पूरे परिवार का नाम रोशन किया है।"
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