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The Haryana Story | भिवानी की बेटी ने घुटने की चोट और मातृत्व को मात देकर रचा इतिहास, PHD के साथ साधा खेल का संतुलन, एशियन गेम्स के लिए किया क्वालीफाई

भिवानी की बेटी ने घुटने की चोट और मातृत्व को मात देकर रचा इतिहास, PHD के साथ साधा खेल का संतुलन, एशियन गेम्स के लिए किया क्वालीफाई

भिवानी की रहने वाली डिस्कस थ्रो खिलाड़ी सीमा कलीरमन ने विपरीत परिस्थितियों से लड़कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया

हरियाणा के भिवानी की रहने वाली डिस्कस थ्रो खिलाड़ी सीमा कलीरमन ने विपरीत परिस्थितियों से लड़कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। उन्होंने हाल ही में संपन्न प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन करते हुए तीन बार एशियन गेम्स के क्वालीफाइंग मार्क को पार किया। उनका सर्वश्रेष्ठ थ्रो 59.73 मीटर रहा, जिसने उन्हें सीधे एशियन गेम्स 2026 का टिकट दिला दिया। यह सफलता इसलिए भी बड़ी है क्योंकि सीमा कुछ समय पहले घुटने की गंभीर चोट से जूझ रही थीं, लेकिन उन्होंने बिना सर्जरी के खुद को ठीक किया और मैदान पर दमदार वापसी की।

पढ़ाई और खेल का अनूठा संगम: सीबीएलयू में कर रही हैं पीएचडी

सीमा कलीरमन केवल खेल के मैदान में ही नहीं, बल्कि शिक्षा के क्षेत्र में भी अव्वल हैं। वह भिवानी के चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय के शारीरिक शिक्षा (फिजिकल एजुकेशन) विभाग की पीएचडी स्कॉलर हैं। वह एक 3 साल के बेटे की मां हैं और पारिवारिक जिम्मेदारियों को संभालते हुए अपनी रिसर्च और खेल दोनों को बराबर समय दे रही हैं। उनका रिसर्च का विषय भी खेल से जुड़ा है, जिसका शीर्षक 'इम्पैक्ट ऑफ इमेजरी एंड पॉजिटिव सेल्फ-टॉक ट्रेनिंग ऑन एथलेटिक परफॉर्मेंस' है।

विश्वविद्यालय में जश्न का माहौल, कुलगुरु ने जताया गर्व

सीमा की इस स्वर्णिम सफलता पर पूरे विश्वविद्यालय परिसर और भिवानी जिले में खुशी की लहर है। विश्वविद्यालय की कुलगुरु प्रो. दीप्ति धर्माणी ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि यह पूरे क्षेत्र और विश्वविद्यालय के लिए बेहद हर्ष और गर्व की बात है। डीन स्टूडेंट वेलफेयर डॉ. सुरेश मलिक ने बताया कि सीमा एक बेहद प्रतिभाशाली और मेहनती खिलाड़ी हैं, जिन्होंने विश्वविद्यालय का मान वैश्विक स्तर पर बढ़ाया है।

अगला बड़ा लक्ष्य: लॉस एंजिलिस ओलंपिक 2028

एशियन गेम्स के लिए क्वालीफाई करने के बाद अब सीमा और उनके पति व कोच रविंदर का अगला बड़ा सपना लॉस एंजिलिस ओलंपिक 2028 में देश के लिए पदक जीतना है। रविंदर खुद एक डिस्कस थ्रोअर रह चुके हैं, जो चोट के कारण अपना सपना पूरा नहीं कर पाए थे, लेकिन अब वह सीमा की तैयारी और ट्रेनिंग की पूरी जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। परिवार और इन-लॉज के मजबूत सहयोग की बदौलत सीमा अब पूरी तरह से अपनी आगामी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं।

 

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