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The Haryana Story | शर्मिला धनखड़ ने ग्लासगो में रच दिया इतिहास, कड़े संघर्ष से कॉमनवेल्थ गेम्स के गोल्ड मेडल तक...पढ़िए चैंपियन शर्मिला धनखड़ की कहानी!

शर्मिला धनखड़ ने ग्लासगो में रच दिया इतिहास, कड़े संघर्ष से कॉमनवेल्थ गेम्स के गोल्ड मेडल तक...पढ़िए चैंपियन शर्मिला धनखड़ की कहानी!

ग्लासगो में शर्मिला का स्वर्णिम थ्रो! 9.81 मीटर के साथ पैरा-एथलेटिक्स में भारत को दिलाया पहला राष्ट्रमंडल स्वर्ण!

शर्मिला धनखड़ ने ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेल 2026 में महिलाओं की शॉट पुट F57 स्पर्धा में 9.81 मीटर के थ्रो के साथ स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया है। वह राष्ट्रमंडल खेलों के इतिहास में पैरा एथलेटिक्स में भारत को पहला स्वर्ण पदक दिलाने वाली खिलाड़ी बन गई हैं। इस स्वर्णिम थ्रो के साथ उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स में पैरा एथलेटिक्स मेडल के लिए भारत का 20 साल का सूखा भी खत्म कर दिया है।

स्वर्णिम प्रदर्शन और मुकाबला

स्कॉटलैंड के ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में शर्मिला ने अपने तीसरे प्रयास में 9.81 मीटर का सीजन-बेस्ट थ्रो फेंककर शीर्ष स्थान हासिल किया। उन्होंने घाना की ज़िनाबू ईसा (8.65 मीटर) को काफी बड़े अंतर से पीछे छोड़ते हुए क्लीन स्वीप किया। 

ऐतिहासिक डबल पोडियम

इसी स्पर्धा में भारत की एक और एथलीट शिल्पा के. शायला ने भी दमदार प्रदर्शन करते हुए 7.26 मीटर के थ्रो के साथ कांस्य पदक जीता। राष्ट्रमंडल खेलों के इतिहास में यह पहली बार है जब भारत ने किसी पैरा एथलेटिक्स स्पर्धा में एक साथ दो मेडल जीते हैं।

जीवन का कड़ा संघर्ष: शून्य से शिखर तक का सफर

शर्मिला धनखड़ की जीवनी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है, जहां उन्होंने हर कदम पर समाज और किस्मत की बाधाओं को तोड़ा है। हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले के छितरौली गांव में जन्मी शर्मिला जब महज 2 साल की थीं, तब पोलियो के कारण उनका एक पैर प्रभावित हो गया था। मां दृष्टिबाधित थीं और पिता छोटे किसान थे, जिस वजह से शुरुआती जीवन तंगहाली में बीता।

घरेलू हिंसा और तलाक

19 साल की उम्र में उनकी शादी हुई, लेकिन पहले पति और ससुराल वालों ने उन पर बेहद घरेलू अत्याचार किए। आखिरकार दो बेटियों के साथ उन्हें घर से निकाल दिया गया। बेटियों को पालने के लिए शर्मिला ने हार नहीं मानी और हरियाणा रोडवेज में राज्य की पहली महिला बस कंडक्टर के रूप में भी काम किया।

दूसरे पति का साथ और खेल की शुरुआत

28 साल की उम्र में उन्होंने अजीत सिंह से दूसरी शादी की, जिन्होंने शर्मिला के भीतर की प्रतिभा को पहचाना और उन्हें खेलों में उतरने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने 34 साल की उम्र में रेवाड़ी में कोच टेकचंद के मार्गदर्शन में शॉट पुट की ट्रेनिंग शुरू की। साल 2023 में ट्रेनिंग और खेल का खर्च उठाने के लिए इस परिवार को अपना इकलौता मकान तक बेचना पड़ा, जिसके बाद वे किराए के घर में रहने लगे।

शर्मिला की खेल यात्रा बेहद कम समय में बड़ी सफलताओं से भरी

शर्मिला की खेल यात्रा बेहद कम समय में बड़ी सफलताओं से भरी रही है :

2021: पहली बार शॉट पुट में नेशनल चैंपियन बनीं।

2022 बर्मिंघम CWG: अपने पहले राष्ट्रमंडल खेलों में वह मामूली अंतर से पदक से चूक गईं और चौथे स्थान पर रहीं।

2026 ग्लासगो CWG: अपनी पिछली हार का बदला लेते हुए उन्होंने अपने देश के लिए स्वर्ण पदक जीता।

प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्री और हरियाणा के मुख्यमंत्री सहित तमाम दिग्गजों ने दी बधाई

शर्मिला से प्रेरित होकर उनकी दोनों बेटियां अनुज और लक्ष्मी भी एथलेटिक्स जैवलिन थ्रो और लॉन्ग जंप की तैयारी कर रही हैं और वे सब रेवाड़ी में एक साथ प्रैक्टिस करते हैं। इस गौरवशाली पल पर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया, केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी समेत कई दिग्गजों ने उन्हें बधाई दी है। खेल मंत्री ने इसे भारतीय पैरा एथलेटिक्स के लिए एक 'मील का पत्थर' बताया है।

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