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The Haryana Story | ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेल 2026: भिवानी की बेटी जैस्मिन लम्बोरिया ने सेमीफाइनल में बनाई जगह, भारत का 10वां बॉक्सिंग मेडल पक्का

ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेल 2026: भिवानी की बेटी जैस्मिन लम्बोरिया ने सेमीफाइनल में बनाई जगह, भारत का 10वां बॉक्सिंग मेडल पक्का

भारतीय सेना की इस जांबाज नायब सूबेदार ने हुंकार भरते हुए कहा अबकी बार मेरा पूरा प्रयास मेडल का कलर बदलने यानी स्वर्ण पदक जीतने का है

ग्लास्गो (स्कॉटलैंड) में आयोजित राष्ट्रमंडल खेल 2026 के रिंग से भारत के लिए एक बेहद गौरवशाली और ऐतिहासिक खबर आई है। हरियाणा के 'मिनी क्यूबा' कहे जाने वाले भिवानी की स्टार मुक्केबाज जैस्मिन लम्बोरिया ने महिला 57 किलोग्राम भार वर्ग के क्वार्टर फाइनल में इंग्लैंड की मुक्केबाज एलिस ग्लिन को 4-1 से करारी शिकस्त देकर सेमीफाइनल में प्रवेश कर लिया है। इस धमाकेदार जीत के साथ ही जैस्मिन ने भारत की झोली में बॉक्सिंग का 10वां पदक सुरक्षित कर लिया है।जीत के बाद भारतीय सेना की इस जांबाज नायब सूबेदार ने हुंकार भरते हुए कहा पिछली बार बर्मिंघम 2022 में मेरे पास ब्रॉन्ज (कांस्य) मेडल था, लेकिन अबकी बार मेरा पूरा प्रयास मेडल का कलर बदलने यानी स्वर्ण पदक जीतने का है।

मुकाबले का रोमांच: इंग्लैंड की मुक्केबाज को रणनीतिक मात

ग्लासगो के स्कॉटिश इवेंट कैंपस में बुधवार रात को खेला गया यह मुकाबला बेहद कड़ा और रोमांचक रहा। शुरुआती दो राउंड्स में दोनों मुक्केबाजों के बीच कांटे की टक्कर थी, जहां दोनों एक-दूसरे पर सटीक पंच बरसा रहे थे। तीसरे और आखिरी राउंड में इंग्लैंड की मुक्केबाज एलिस ने आक्रामक बॉडी अटैक्स के जरिए दबाव बनाने की कोशिश की। लेकिन जैस्मिन ने अपनी बेहतरीन रीच, शानदार मूवमेंट और काउंटर-अटैक कॉम्बिनेशन के दम पर मुकाबले को पूरी तरह अपने पक्ष में कर लिया। पांच में से चार जजों ने जैस्मिन के पक्ष में फैसला सुनाते हुए उन्हें 4-1 से विजेता घोषित किया।

जैस्मिन लम्बोरिया का सफर: संघर्ष से सफलता तक

जैस्मिन का जन्म 30 अगस्त 2001 को भिवानी (हरियाणा) में हुआ। पिता होमगार्ड और मां गृहिणी है। परदादा कप्तान चंदर भान पहलवान थे। जैस्मिन ने साल 2020 में भारतीय सेना ज्वाइन की। वह सेना में शामिल होने वाली देश की पहली महिला मुक्केबाज बनीं। आर्मी स्पोर्ट्स इंस्टीट्यूट में विश्वस्तरीय और सख्त ट्रेनिंग मिली। जैस्मिन के घर में बॉक्सिंग की गहरी जड़ें हैं। उनके दादा और चाचा, संदीप सिंह और परविंदर सिंह भी राष्ट्रीय स्तर के चैंपियन रहे हैं, जिनसे प्रेरणा लेकर उन्होंने 14-15 साल की उम्र में ग्लव्स थामे थे।

करियर की बड़ी उपलब्धियां

जैस्मिन ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार देश का मान बढ़ाया है। वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप 2025 में पिछले साल उन्होंने पोलैंड की ओलंपिक रजत पदक विजेता जूलिया सेरेमेटा को हराकर 57 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचा था। बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेल 2022 में महिला 60 किलोग्राम लाइटवेट कैटेगरी में देश के लिए कांस्य पदक जीता। पेरिस ओलंपिक 2024 में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए देश को बॉक्सिंग कोटा दिलाया। राष्ट्रीय चैंपियनशिप 2025 में सर्विसेज स्पोर्ट्स कंट्रोल बोर्ड  का प्रतिनिधित्व करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया।

भारतीय बॉक्सिंग दल ने रचा इतिहास

ग्लासगो 2026 में भारतीय मुक्केबाजों का दबदबा सिर चढ़कर बोल रहा है। जैस्मिन के अलावा प्रीति पवार, प्रिया घंघास, साक्षी चौधरी, लवलीना बोरगोहेन, और सचिन सिवाच जैसे धुरंधरों ने भी सेमीफाइनल में जगह पक्की कर ली है। भारतीय बॉक्सिंग टीम ने एक ही दिन में अपने सभी मुकाबले जीतकर कुल 10 पदक पक्के कर नया इतिहास रच दिया है। अब पूरे देश की नजरें शुक्रवार को होने वाले सेमीफाइनल मुकाबलों पर टिकी हैं, जहां भिवानी की यह 'सैनिक' अपने मेडल का रंग बदलने के इरादे से रिंग में उतरेगी।

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