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The Haryana Story | ग्लासगो में भारत का डबल धमाका: जैवलिन थ्रो में नीरज ने सिल्वर, यशवीर ने जीता ब्रॉन्ज, नीरज ने ठंडे मौसम और तेज हवाओं को एक बड़ी चुनौती बताया

ग्लासगो में भारत का डबल धमाका: जैवलिन थ्रो में नीरज ने सिल्वर, यशवीर ने जीता ब्रॉन्ज, नीरज ने ठंडे मौसम और तेज हवाओं को एक बड़ी चुनौती बताया

मौसम बना विलेन, नीरज ने कहा- 'तैयारियां जारी रहेंगी'

स्कॉटलैंड के ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के पुरुष जैवलिन थ्रो इवेंट में भारत ने ऐतिहासिक दोहरा पदक हासिल किया है, जहां नीरज चोपड़ा ने रजत और युवा खिलाड़ी यशवीर सिंह ने कांस्य पदक जीता है.मुकाबले के बाद दोनों खिलाड़ियों ने मीडिया से बातचीत में अपने मेडल और प्रदर्शन पर गहरा संतोष जताया। नीरज चोपड़ा ने ठंडे मौसम और तेज हवाओं को एक बड़ी चुनौती बताया। उन्होंने कहा 'स्टार्टिंग में थोड़ा ठीक था पर बाद में काफी बाद में ठंड और हवा फिर चलने लग गई थी', जैसा कि रिपब्लिक वर्ल्ड ने रिपोर्ट किया है।

ऐसे बड़े मंच पर नीरज भाई के साथ पोडियम साझा करना उनके लिए बेहद गर्व की बात

नीरज ने आगे कहा कि वह स्वर्ण पदक जीतकर राष्ट्रगान की धुन सुनना चाहते थे, लेकिन चोट से उबरने के बाद वापसी करते हुए सीजन का सर्वश्रेष्ठ थ्रो (85.83 मीटर) करने और देश के लिए मेडल जीतने से वे काफी खुश हैं। उन्होंने भविष्य के लिए अपनी तैयारियां जारी रखने की बात कही है। वहीं, अपना पहला कॉमनवेल्थ गेम्स खेल रहे यशवीर सिंह ने आखिरी प्रयास में 85.41 मीटर का अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए कांस्य जीता। यशवीर ने खुशी जताते हुए कहा कि ऐसे बड़े मंच पर नीरज भाई के साथ पोडियम साझा करना उनके लिए बेहद गर्व की बात है।

ग्लासगो के स्कॉट्सटौन स्टेडियम में शुक्रवार रात को आयोजित इस फाइनल मुकाबले में मौसम की स्थिति काफी चुनौतीपूर्ण थी। मैदान पर काफी ठंड थी और तेज हवाएं चल रही थीं, जिसके कारण एथलीटों को थ्रो करने में मुश्किलों का सामना करना पड़ा। नीरज चोपड़ा ने अपने पहले प्रयास में 80.97 मीटर के थ्रो के साथ शुरुआत की। इसके बाद अपने दूसरे प्रयास में उन्होंने शानदार सुधार करते हुए 85.83 मीटर दूर भाला फेंका, जो इस साल का उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन भी रहा। हालांकि, इसके बाद श्रीलंका के एथलीट रुमेश थरंगा पथिरागे ने 89.75 मीटर का एक विशाल और रिकॉर्ड थ्रो फेंककर स्वर्ण पदक पर कब्जा कर लिया।

सिल्वर मेडल से संतोष करना पड़ा

नीरज ने आखिरी थ्रो तक वापसी की पूरी कोशिश की, लेकिन उनके अंतिम प्रयास फाउल रहे और उन्हें सिल्वर मेडल से संतोष करना पड़ा। दूसरी ओर, 25 वर्षीय यशवीर सिंह ने अपने खेल से सभी को हैरान कर दिया। पांचवें राउंड तक वे छठे स्थान पर चल रहे थे, लेकिन छठे और आखिरी प्रयास में यशवीर ने अपने करियर का सबसे बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए 85.41 मीटर का थ्रो फेंका और सीधे तीसरे स्थान पर पहुंचकर कांस्य पदक अपने नाम कर लिया।

पदक का विवरण

एथलीट का नाम      देश         सर्वश्रेष्ठ थ्रो (मीटर)           पदक

रुमेश थरंगा           श्रीलंका        89.75 मीटर                 स्वर्ण (Gold)

नीरज चोपड़ा          भारत         85.83 मीटर                  रजत (Silver)

यशवीर सिंह           भारत         85.41 मीटर                  कांस्य (Bronze)

रोहित यादव           भारत         81.56 मीटर                  सातवां स्थान

मौसम बना विलेन, नीरज ने कहा- 'तैयारियां जारी रहेंगी'

नीरज ने कहा, “आज ठंड बहुत ज्यादा थी और हवा भी काफी तेज चल रही थी... मैं ठंड में अपना बेस्ट प्रदर्शन नहीं कर पाता। मुझे गर्म मौसम पसंद है। 'ग्लास्गो में मौसम काफी ठंडा (लगभग 14 डिग्री सेल्सियस) था और हवाएं सीधे सामने से न आकर साइड से चल रही थीं, जिससे भाले की दिशा और गति प्रभावित हुई। नीरज 18 खिलाड़ियों की सूची में सबसे आखिरी नंबर पर थ्रो करने वाले थे। ठंड के बीच लंबी प्रतीक्षा के कारण शरीर को पूरी तरह वॉर्म-अप और एक्टिव रखना बेहद मुश्किल साबित हुआ। मैच के बाद नीरज चोपड़ा ने अपने मेडल पर संतोष व्यक्त किया।

यशवीर की तारीफ

उन्होंने गोल्ड कोस्ट 2018 में जीते स्वर्ण पदक को याद करते हुए कहा कि हर खिलाड़ी का सपना पोडियम के शीर्ष पर रहकर राष्ट्रगान सुनना होता है, लेकिन खेल में हर दिन अलग होता है। मौसम पर बात करते हुए नीरज ने कहा कि कल की तुलना में मौसम थोड़ा बेहतर था, लेकिन बाद में ठंड और हवा बढ़ जाने से मुश्किलें हुईं। चोट के बाद वापसी को लेकर उन्होंने कहा कि शरीर अब धीरे-धीरे पटरी पर आ रहा है। आगे कई प्रतियोगिताएं हैं और वे अपनी कमियों को सुधारने के लिए तैयारियां जारी रखेंगे। उन्होंने यशवीर की तारीफ करते हुए कहा कि उन्हें सबसे ज्यादा खुशी इस बात की है कि जब वे मैदान पर नहीं होते हैं, तो पीछे संभालने वाले युवा खिलाड़ी मौजूद हैं।

यशवीर सिंह के लिए 'सपने के सच होने' जैसा पल

अपने डेब्यू राष्ट्रमंडल खेलों में ही इतिहास रचने वाले यशवीर सिंह की खुशी का ठिकाना नहीं था। उन्होंने कहा कि नीरज भाई जैसे महान खिलाड़ी के साथ पोडियम साझा करना किसी सपने के सच होने जैसा है।  यशवीर ने बताया कि इतने कठिन और ठंडे मौसम में भी वे अपना पर्सनल बेस्ट थ्रो फेंकने में सफल रहे, जिससे उनका आत्मविश्वास काफी बढ़ा है। नीरज भाई की मौजूदगी ने उन्हें मैदान पर बेहतर करने के लिए प्रेरित किया। भारतीय एथलेटिक्स के लिए ग्लासगो की यह शाम हमेशा के लिए यादगार बन गई है, जिसने यह साबित कर दिया है कि वैश्विक स्तर पर भारत की जैवलिन थ्रो की नर्सरी अब कितनी मजबूत हो चुकी है।

भारत के लिए अन्य ऐतिहासिक पल

भारत के ही यशवीर सिंह ने अपने आखिरी प्रयास में 85.41 मीटर का पर्सनल बेस्ट थ्रो कर ब्रॉन्ज मेडल जीता। यह कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में पहली बार है जब जेवलिन थ्रो इवेंट के पोडियम पर दो भारतीय खिलाड़ी एक साथ खड़े हुए हैं। पाकिस्तान के ओलंपिक चैंपियन अरशद नदीम इस मुकाबले में टॉप-8 में भी जगह नहीं बना पाए और 77.41 मीटर के थ्रो के साथ 9वें स्थान पर रहे.नीरज चोपड़ा के घर पानीपत (हरियाणा) में सिल्वर मेडल पक्का होते ही ग्रामीणों और परिजनों ने मिठाई बांटकर इस ऐतिहासिक सफलता का जश्न मनाया। 

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