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The Haryana Story | ग्लासगो CWG 2026 में भारत ने जीते 13 गोल्ड सहित 39 मेडल, 7 गोल्ड के साथ रिंग के 'किंग' बने हरियाणा के खिलाड़ी

ग्लासगो CWG 2026 में भारत ने जीते 13 गोल्ड सहित 39 मेडल, 7 गोल्ड के साथ रिंग के 'किंग' बने हरियाणा के खिलाड़ी

हरियाणा के धाकड़ खिलाड़ियों ने CWG 2026 में जीते कुल 11 पदक, बॉक्सिंग में दिखाया सबसे दमदार प्रदर्शन

ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत ने 13 स्वर्ण, 17 रजत और 9 कांस्य सहित कुल 39 पदक जीतकर अंक तालिका में चौथा स्थान हासिल किया है। अंतिम दिन रविवार को कोई पदक न मिलने के बावजूद भारत ने स्कॉटलैंड को पछाड़कर लगातार दूसरी बार शीर्ष चार में अपनी जगह पक्की की। इसके साथ ही, भारत को आगामी 2030 राष्ट्रमंडल खेलों (100वें वर्षगांठ संस्करण) की आधिकारिक मेजबानी मिल गई है, जिसका आयोजन गुजरात के अहमदाबाद में किया जाएगा।

अब अहमदाबाद करेगा CWG 2030 की मेजबानी

स्कॉटलैंड के ग्लासगो में आयोजित 2026 राष्ट्रमंडल खेलों का एक शानदार और रंगारंग समापन हो गया है। भारतीय एथलीटों ने सीमित खेलों के बावजूद अपनी ताकत का लोहा मनवाते हुए कुल 39 पदक अपने नाम किए। इस बेहतरीन प्रदर्शन की बदौलत भारत पदक तालिका में ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और कनाडा के बाद चौथे स्थान पर रहा।भारत के लिए सबसे बड़ी खुशखबरी इसके समापन समारोह से आई, जहां यह आधिकारिक घोषणा की गई कि साल 2030 में होने वाले ऐतिहासिक 100वें राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी भारत को सौंप दी गई है। इन खेलों का आयोजन भारत के अहमदाबाद (गुजरात) में किया जाएगा।

भारत ने एक ही दिन में रिकॉर्ड जीते 16 पदक

राष्ट्रमंडल खेलों के अंतिम दिन रविवार को भारतीय खिलाड़ी (ट्रैक साइकिलिंग और जूडो में) कड़ी चुनौती के बावजूद कोई पदक नहीं जीत सके। हालांकि, शनिवार को भारत ने एक ही दिन में रिकॉर्ड 16 पदक जीतकर अपनी चौथी पोजीशन पहले ही सुरक्षित कर ली थी। ऑस्ट्रेलिया ने 171 पदक (70 स्वर्ण), इंग्लैंड ने 110 पदक (29 स्वर्ण) , कनाडा ने 62 पदक (19 स्वर्ण) भारत ने  39 पदक (13 स्वर्ण, 17 रजत, 9 कांस्य), स्कॉटलैंड: 39 पदक (13 स्वर्ण - लेकिन कम सिल्वर होने के कारण भारत से पीछे)

बिना कोर खेलों के भी 'शेरों' जैसी दहाड़

इस बार ग्लासगो 2026 का कार्यक्रम बेहद छोटा था। भारत को पारंपरिक रूप से सबसे ज्यादा मेडल दिलाने वाले 9 खेल जैसे कुश्ती, बैडमिंटन, टेबल टेनिस, हॉकी और शूटिंग, इस बार टूर्नामेंट का हिस्सा नहीं थे। इन खेलों के न होने के बावजूद भारतीय दल ने 39 पदक जीतकर अपनी खेल विविधता और असली ताकत का परिचय दिया है।

इन जांबाजों ने रचा इतिहास

बॉक्सिंग का जलवा-7 गोल्ड : भारतीय मुक्केबाजों ने इस बार इतिहास रच दिया। साक्षी चौधरी, जैस्मीन लैंबोरिया, अरुंधति चौधरी और सचिन सिवाच समेत अन्य मुक्केबाजों ने रिंग में तहलका मचाते हुए 7 स्वर्ण सहित कुल 10 पदक देश की झोली में डाले।

मीराबाई चानू की हैट्रिक: वेटलिफ्टिंग स्टार मीराबाई चानू ने गोल्ड मेडल जीतकर कॉमनवेल्थ गेम्स में अपने स्वर्ण पदकों की हैट्रिक पूरी की। उनके साथ ही ऋषिकांत सिंह ने सिल्वर जीतकर नया रिकॉर्ड बनाया।

पैरा-एथलीटों का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन: भारत ने पैरा-स्पोर्ट्स में अपना अब तक का सबसे शानदार प्रदर्शन करते हुए 7 पदक जीते (3 गोल्ड, 2 सिल्वर, 2 ब्रॉन्ज)। दिलीप गावित (100 मीटर रेस स्वर्ण) और शर्मिला धनखड़ (शॉट पुट स्वर्ण) ने ऐतिहासिक खेल दिखाया।

ट्रैक और जेवलिन में दम: गुलवीर सिंह एक ही राष्ट्रमंडल खेलों में दो व्यक्तिगत पदक (5000 मीटर और 10000 मीटर) जीतने वाले पहले भारतीय धावक बने। वहीं, हमारे स्टार एथलीट नीरज चोपड़ा ने पुरुषों की भाला फेंक (जैवलिन थ्रो) स्पर्धा में रजत पदक जीतकर पोडियम पर वापसी की।

2030 में भारत रचेगा नया इतिहास

ग्लासगो में समापन समारोह के दौरान दर्शकों ने 2030 के खेलों की एक शानदार सांस्कृतिक झलक देखी। दिल्ली 2010 के सफल आयोजन के बाद, यह दूसरा मौका होगा जब भारत राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी करेगा। अहमदाबाद के विश्व स्तरीय स्पोर्ट्स इन्फ्रास्ट्रक्चर में होने वाले ये खेल भारत को वैश्विक खेल महाशक्ति के रूप में स्थापित करेंगे। सीमित संसाधनों और पसंदीदा खेलों के हटने के बाद भी चौथा स्थान हासिल करना यह साबित करता है कि भारतीय खेलों का भविष्य बेहद उज्ज्वल है। 

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