'उम्र सिर्फ एक आंकड़ा है, हौसला अगर बुलंद हो तो कामयाबी की कोई सीमा नहीं होती।' इसे चरितार्थ कर दिखाया है हरियाणा के चरखी दादरी के बाढड़ा निवासी 76 वर्षीय रामकिशन शर्मा ने। उम्र के इस पड़ाव पर जहां लोग अक्सर आराम की जिंदगी चुनते हैं, वहीं रामकिशन शर्मा ने अपनी मेहनत, लगन और उपलब्धियों से ऐसा इतिहास रच दिया, जिसे देखकर हर कोई गौरवान्वित है। उनके नाम 401 मेडल और 336 प्रमाण पत्र दर्ज हैं और उनकी उपलब्धियों को इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स और एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज किए जाने का दावा सामने आया है।
इतनी बड़ी संख्या में पुरस्कार और प्रमाण पत्र हासिल करना अपने आप में उल्लेखनीय उपलब्धि
हरियाणा के चरखी दादरी स्थित बाढड़ा निवासी 76 वर्षीय रामकिशन शर्मा की असाधारण उपलब्धि ने प्रदेश का नाम गौरवान्वित किया है। उनकी उपलब्धियों को ‘इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ और ‘एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ की ओर से आधिकारिक रूप से प्रमाणित किए जाने का दावा सामने आया है। रिकॉर्ड टीम के सत्यापन के मुताबिक, रामकिशन शर्मा के नाम कुल 401 मेडल और 336 प्रमाण पत्र दर्ज किए गए हैं। इतनी बड़ी संख्या में पुरस्कार और प्रमाण पत्र हासिल करना अपने आप में उल्लेखनीय उपलब्धि मानी जा रही है।
401 मेडल और 336 प्रमाण पत्र का रिकॉर्ड
रामकिशन शर्मा की उपलब्धि की सबसे खास बात उनके नाम दर्ज पुरस्कारों की संख्या है। रिकॉर्ड सत्यापन के दौरान उनके पास 401 मेडल और 336 प्रमाण पत्र दर्ज किए गए। यानी उनकी उपलब्धियों का रिकॉर्ड केवल एक-दो प्रतियोगिताओं या आयोजनों तक सीमित नहीं है, बल्कि लंबे समय में अर्जित बड़ी संख्या में सम्मान और प्रमाण पत्रों का संकलन है। रिकॉर्ड टीम की ओर से उपलब्धियों का सत्यापन किए जाने के बाद इसे रिकॉर्ड बुक में स्थान दिए जाने की जानकारी सामने आई है। इस उपलब्धि के बाद रामकिशन शर्मा का नाम इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स और एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स से जुड़ गया है।
दो प्रतिष्ठित रिकॉर्ड बुक में उपलब्धि दर्ज
किसी व्यक्ति की उपलब्धि को रिकॉर्ड बुक में शामिल करने से पहले उसके दावे और उपलब्धियों का सत्यापन किया जाता है। रामकिशन शर्मा के मामले में भी रिकॉर्ड टीम द्वारा उनके मेडल और प्रमाण पत्रों का सत्यापन किए जाने की बात कही गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सत्यापन के दौरान 401 मेडल और 336 प्रमाण पत्र रिकॉर्ड टीम के सामने प्रस्तुत किए गए। इसके बाद इस उपलब्धि को दोनों रिकॉर्ड संस्थाओं द्वारा प्रमाणित किए जाने की जानकारी सामने आई।
मेहनत और निरंतरता का परिणाम
इतनी बड़ी संख्या में मेडल और प्रमाण पत्र हासिल करना किसी एक दिन की उपलब्धि नहीं होती। इसके पीछे वर्षों की मेहनत, अलग-अलग प्रतियोगिताओं में भागीदारी और लगातार बेहतर प्रदर्शन की भूमिका होती है। रामकिशन शर्मा की उपलब्धि भी इसी निरंतर प्रयास का परिणाम मानी जा रही है। 401 मेडल का आंकड़ा यह बताता है कि उन्होंने अलग-अलग स्तर की प्रतियोगिताओं में लगातार भाग लिया और सफलता हासिल की। वहीं 336 प्रमाण पत्र उनकी उपलब्धियों और सहभागिता का दस्तावेजी रिकॉर्ड प्रस्तुत करते हैं।
हरियाणा के लिए भी गौरव की बात
रामकिशन शर्मा की उपलब्धि व्यक्तिगत सफलता के साथ-साथ हरियाणा के लिए भी गौरव की बात है। प्रदेश के खिलाड़ियों, प्रतिभाओं और विभिन्न क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों की उपलब्धियों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलना हरियाणा की उपलब्धि परंपरा को मजबूत करता है। दो रिकॉर्ड बुक में नाम दर्ज होने के बाद रामकिशन शर्मा की उपलब्धि चर्चा में है। खास तौर पर 401 मेडल और 336 प्रमाण पत्र का आंकड़ा लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहा है।
रिकॉर्ड का महत्व
‘इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ और ‘एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ में किसी उपलब्धि का दर्ज होना संबंधित व्यक्ति के लिए महत्वपूर्ण सम्मान माना जाता है। ऐसे रिकॉर्ड किसी व्यक्ति की असाधारण उपलब्धि को दस्तावेजी पहचान देने का काम करते हैं। रामकिशन शर्मा के मामले में भी रिकॉर्ड टीम द्वारा उपलब्धियों के सत्यापन के बाद प्रमाणन किए जाने की जानकारी सामने आई है। अब उनकी इस उपलब्धि को लेकर क्षेत्र में भी उत्साह का माहौल है।
401 मेडल, 336 प्रमाण पत्र—एक असाधारण आंकड़ा
रामकिशन शर्मा की उपलब्धि का सबसे बड़ा आकर्षण यही है कि उनके नाम 401 मेडल और 336 प्रमाण पत्र दर्ज हैं। यदि रिकॉर्ड टीम के सत्यापन में दर्ज यह आंकड़ा आधिकारिक प्रमाणपत्रों से मेल खाता है, तो यह निश्चित रूप से उनकी लंबी उपलब्धि यात्रा और निरंतर प्रयास का असाधारण उदाहरण है। हालांकि, रामकिशन शर्मा के गृह जिले, उनकी उपलब्धियों के क्षेत्र, रिकॉर्ड की सटीक श्रेणी और रिकॉर्ड प्रमाणपत्रों की तारीख जैसी अतिरिक्त जानकारियों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध स्रोतों से नहीं हो सकी है। इन विवरणों को मूल रिकॉर्ड प्रमाणपत्र या संबंधित रिकॉर्ड संस्थाओं के आधिकारिक दस्तावेज के आधार पर ही प्रकाशित करना उचित होगा।
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