
पानीपत के एसडी पीजी कॉलेज में चल रहे सात दिवसीय विशेष आवासीय राष्ट्रीय सेवा योजना कैंप के दूसरे दिन डॉ नीलम आर्य वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी फॉरेंसिक विभाग मधुबन (करनाल) और सोनू सिंह प्रोजेक्ट डायरेक्टर रेड क्रॉस आरसीआईटी पानीपत प्रेरणादायक वक्ता ने कैंप में शिरकत की और स्वयंसेवकों को अपने ज्ञान और अनुभव का लाभ दिया।
डॉ नीलम आर्य ने ‘महिला अपराध और फॉरेंसिक साइंस‘ और सोनू सिंह ने ‘कौशल विकास, कैरियर काउन्सलिंग और व्यक्तित्व निर्माण’ विषयों पर अपना व्याख्यान दिया। मेहमानों का स्वागत प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा, कैंप सेक्रेटरी डॉ राकेश गर्ग, डॉ संतोष कुमारी और डॉ एसके वर्मा ने पौधे रोपित गमले भेंट करके किया। कैंप में विभिन्न सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं का आयोजन भी किया गया. जिसके विजेताओं को कैंप के अंतिम दिन सम्मानित किया जाएगा।
अपराधों ने फॉरेंसिक विशेषज्ञों की मांग बढ़ा दी
डॉ नीलम आर्य वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी फॉरेंसिक विभाग मधुबन करनाल ने कहा कि लिंग अनुकूल वातावरण का अभाव ही देश में महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों का मुख्य कारण है। फॉरेंसिक साइंस अपराध से जुड़ा विज्ञान है और इसमें अपराध का पता लगाने के लिए शरीर के तरल पदार्थों की जांच की जाती है। फॉरेंसिक रिपोर्ट को अदालत भी अहम साक्ष्य मानती है। देश-विदेश में बढ रही आतंकी घटनाओं और अपराधों ने फॉरेंसिक विशेषज्ञों की मांग बढ़ा दी है । आपराधिक वारदातों के सूत्रधारों की धर-पकड के लिए प्रशिक्षित सुरक्षा बलों की जरूरत आज समाज और समय की मांग है। इस साइंस का जानकार अपराध से जुड़े लोगों को पकडवाने में काफी मददगार होता है।
इसकी पढ़ाई करने वालों के लिए नौकरियों के कई विकल्प
आतंकवादी गुत्थियां हों या रहस्यमय मौत, इसे सुलझाने में फॉरेंसिक साइंस की अहम भूमिका होती है। फॉरेंसिक साइंस अब विदेश में ही नहीं देश में भी लोकप्रिय होती जा रही है । इस क्षेत्र में बढ़ती नौकरियों ने विद्यार्थियों को फॉरेंसिक साइंस का कोर्स करने के लिए प्रेरित किया है । इसकी पढ़ाई करने वालों के लिए नौकरियों के कई विकल्प हैं। इसमें डिप्लोमा कोर्स से लेकर पीएचडी करने वालों के लिए हर स्तर पर नौकरी के अवसर है। एक अच्छे फॉरेंसिक एक्सपर्ट का स्वभाव जिज्ञासु, उसकी कानून-व्यवस्था पर आस्था, उसमे सटीकता का गुण, तार्किक, व्यावहारिक, व्यवस्थित दृष्टिकोण तथा उसमे वैज्ञानिक विश्लेषण की क्षमता होनी चाहिए। फॉरेंसिक साइंस में प्राप्त शिक्षा के आधार पर हम अध्यापक, फॉरेंसिक इंजीनियर, जेनेटिक एक्सपर्ट, फॉरेंसिक साइकोलॉजिस्ट, फॉरेंसिक साइंटिस्ट, फॉरेंसिक इन्वेस्टिगेटर, सिक्योरिटी एक्सपर्ट, फॉरेंसिक कंसलटेंट, डिटेक्टिव आदि महत्वपूर्ण पदों पर नौकरियां पा सकते है।
जानें डॉ नीलम आर्य के बारे में
डॉ. नीलम आर्य वर्तमान में हरियाणा के फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला में मोबाइल फोरेंसिक यूनिट की प्रभारी और वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने 5,000 से अधिक अपराध स्थलों पर जाकर अपनी राय दी है। वे कई आपराधिक मामलों में एसआईटी की सदस्य रहीं, जिनकी जांच क्राइम ब्रांच सहित विभिन्न जांच एजेंसियों द्वारा की गई। उन्होंने प्लांट बायोटेक्नोलॉजी में पीएचडी, बॉटनी में मास्टर और कंप्यूटर एप्लीकेशन में मास्टर की डिग्री हासिल की। इसके अलावा, उन्होंने एलएलबी, सूचना प्रौद्योगिकी में उन्नत पीजी डिप्लोमा और डिजिटल फोरेंसिक में सर्टिफिकेट कोर्स भी किया। उन्होंने पुलिस अकादमी, न्यायिक अकादमी और कई अन्य संस्थानों में फोरेंसिक विज्ञान और अपराध स्थल पर कई व्याख्यान दिए हैं।
उन्हें विभिन्न विश्वविद्यालयों और अकादमियों द्वारा मुख्य वक्ता और अतिथि व्याख्याता के रूप में आमंत्रित किया गया था। उन्होंने 75 से अधिक अंतर्राष्ट्रीय/राष्ट्रीय सम्मेलनों/संगोष्ठियों/संवाद आदि में भाग लिया और शोधपत्र प्रस्तुत किए हैं।
संक्षिप्त में बताएं तो उन्हें आयरन लेडी अवार्ड (मई 2017), सशक्त महिला पुरस्कार (दिसंबर 2017), राष्ट्रीय स्वर्णिम हिंद पुरस्कार (जनवरी 2018) और महिला अचीवर्स अवार्ड (जनवरी 2018) से सम्मानित किया गया है। इसके अलावा भी बहुत से सम्मान और अवार्डों से नवाजा जा चुका है, और उनकी उपलब्धियों को देखते हुए लगातार उन्हें खास सम्मान मिलते रहते हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कई प्रशिक्षण, सेमिनार, कार्यशालाओं और सम्मेलनों में भाग लिया है। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय पत्रिकाओं, पत्रिकाओं और कार्यवाहियों में 85 से अधिक प्रकाशन किए हैं। इसके अलावा, उन्होंने हरियाणा पुलिस अकादमी द्वारा प्रकाशित प्रतिष्ठित राष्ट्रीय समाचार पत्र में प्रकाशित कई लेख और चंडीगढ़ न्यायिक अकादमी, चंडीगढ़ द्वारा प्रकाशित फोरेंसिक विज्ञान की पुस्तिका में अपराध के दृश्य पर एक अध्याय लिखा है।
हमारा करियर विकास एक आजीवन प्रक्रिया है चाहे हम इसे जानते है या नहीं
वहीं एसडी कॉलेज के इस कार्यक्रम में सोनू सिंह प्रोजेक्ट डायरेक्टर रेड क्रॉस आरसीआईटी पानीपत ने कहा कि किसी भी ऐसी धारणा को जो हमारे मन में किसी व्यक्ति के प्रति उसका सदभाव, हितैषिता, सत्यता, दृढ़ता आदि अथवा किसी सिद्धांत आदि की सत्यता अथवा उत्तमता का ज्ञान होने के कारण होती है ही हमारा विश्वास है। आत्मविश्वास से ही हमें अपने विचारों की स्वाधीनता प्राप्त होती है और इसके कारण ही महान कार्यों के संपादन में सरलता और सफलता मिलती है। इसी के द्वारा आत्मरक्षा होती है, जो व्यक्ति आत्मविश्वास से ओतप्रोत है उसे अपने भविष्य के प्रति किसी प्रकार की चिंता नहीं रहती है। करियर काउंसलिंग पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि हमारा करियर विकास एक आजीवन प्रक्रिया है चाहे हम इसे जानते है या नहीं।
हमें लगातार करियर और जीवन के निर्णय लेने होंगे
वास्तव में यह प्रक्रिया तब शुरू हो जाती है जब हम पैदा हो जाते है। ऐसे कई कारक हैं जो हमारे कैरियर विकास को प्रभावित करते हैं जिसमें हमारी रुचियां, योग्यताएं, मूल्य, व्यक्तित्व, पृष्ठभूमि और परिस्थितियां शामिल होती हैं । कैरियर काउंसलिंग एक ऐसी प्रक्रिया है जो हमें करियर, शिक्षा और जीवन के फैसले लेने के लिए खुद को और काम की दुनिया को जानने और समझने में मदद करती है। करियर विकास सिर्फ़ एक विषय चुनने और स्नातक होने के बाद हम कौन सी नौकरी करना चाहते हैं तय करने से कहीं ज़्यादा है। यह वास्तव में एक आजीवन प्रक्रिया है जिसका अर्थ है कि हम अपने पूरे जीवन में खुद को बदलेंगे, परिस्थितियाँ बदलेंगी, और हमें लगातार करियर और जीवन के निर्णय लेने होंगे।
महिलाएं एक नहीं बल्कि दो-दो परिवारों को संभालती
प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने महिला स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान में व्याप्त समयाओं से निपटने की अगुआई महिलाओं ने की है । शिक्षित महिला परिवार, समाज और राष्ट्रनिर्माण के दायित्वों का सबसे संतुलित एवं श्रेष्ठ मार्ग है। उन्होंने कहा कि महिलाओं की शिक्षा के माध्यम से ही विकसित भारत का सपना साकार हो सकता है क्यूंकि महिलाएं एक नहीं बल्कि दो-दो परिवारों को संभालती है। उन्होंने कहा कि सभी को यह जानकर आश्चर्य होगा कि पहले अधिकतर देशों में महिलाओं को वोट देने का अधिकार भी नहीं था।
उन्होंने कहा कि नारियों में अपरिमित शक्ति और क्षमताएँ विद्यमान हैं। व्यावहारिक जगत के सभी क्षेत्रों में उन्होने कीर्तिमान स्थापित किये हैं। अपने अदभुत साहस, अथक परिश्रम तथा दूरदर्शी बुद्धिमत्ता के आधार पर विश्व पटल पर अपनी पहचान बनाने में महिलाये कामयाब रहीं हैं। मानवीय संवेदना, करुणा, वात्सल्य जैसे भावो से परिपूर्ण अनेक नारियों ने युग निर्माण में अपना योगदान दिया है। छात्राओं को आत्मसुरक्षा और आत्मसम्मान के लिए खुद ही पहल करनी पड़ेगी । छात्राओं को चाहिए कि वे अपने अधिकारों का निरंतर और बेखौफ तरीके से प्रयोग करें और अपने घर मे भी अपने भाइयों को सिखाएं कि वे जीवन में महिलाओं का सम्मान करे तथा समाज में उन्हे उनका उचित स्थान दिलवाने में मदद करें।
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