ऑपरेशन सिंदूर से पाकिस्तान हौसलों को पस्त करने के करीब साढ़े तीन महीने बाद भारत ने अपने सुदर्शन चक्र प्रोजेक्ट के पहले चरण में कम और मध्यम दूरी के लिए इंटीग्रेटेड एअर डिफेंस वेपन सिस्टम (आइएडीडब्ल्यूएस) का पहला सफल परीक्षण किया।, जी हां, भारतीय रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने स्वदेशी एयर डिफेंस सिस्टम तैयार कर लिया है। देश वासियों के लिए गर्व की बात है कि डीआरडीओ ने 23 अगस्त 2025 को लगभग 12:30 बजे ओडिशा के तट पर एकीकृत वायु रक्षा हथियार प्रणाली (IADWS) का पहला परीक्षण सफलतापूर्वक किया।
ये रक्षा प्रणाली सीमाओं से लेकर शहरों और सामरिक ठिकानों तक के लिए रक्षा कवच हो सकती है साबित
बता दें कि स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने भाषण में जिस एअर डिफेंस सिस्टम सुदर्शन चक्र मिशन की घोषणा की थी, उसके तहत ये रक्षा प्रणाली सीमाओं से लेकर शहरों और सामरिक ठिकानों तक के लिए रक्षा कवच साबित हो सकती है। डीआरडीओ ने शनिवार दोपहर को इस परीक्षण के दौरान क्विक रिएक्शन सरफेस टू एयर मिसाइल (क्यूआरसैम) यानी त्वरित प्रतिक्रिया वाली सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल और वैरी शॉर्ट रेंज एयर डिफेंस सिस्टम यानी वीशोराड (वीएसएचओआरएडीएस) मिसाइल सहित एक उच्च शक्ति लेजर आधारित निर्देशित ऊर्जा हथियार (डीईडब्ल्यू) को शामिल किया गया। इस दौरान 3 अलग-अलग हवाई लक्ष्यों को इन तीनों हथियारों (मिसाइल और लेजर वेपन) ने नष्ट कर दिया। इन लक्ष्यों में 2 यूएवी और 1 मल्टी कॉप्टर ड्रोन था। इन सभी टारगेट को अलग-अलग दूरी और ऊंचाई पर मार गिराया गया।
IADWS कोई एक हथियार नहीं बल्कि तीन परतों वाला ऐसा कवच है, जो...
यहां ये भी बता दें कि IADWS कोई एक हथियार नहीं बल्कि तीन परतों वाला ऐसा कवच है, जो आसमान से आने वाले हर खतरे जैसे ड्रोन, मिसाइल, फाइटर जेट या स्वार्म अटैक को नाकाम करने में सक्षम है। 2035 तक जब ‘सुदर्शन चक्र' पूरी तरह ऑपरेशनल होगा, तब भारत के पास एक ऐसा एयर डिफेंस होगा, जो दुनिया की सबसे मज़बूत प्रणालियों में गिना जाएगा. यह न सिर्फ़ दुश्मन के लिए चुनौती है, बल्कि आत्मनिर्भर भारत की ताक़त का भी प्रतीक है। आईएडीडब्ल्यूएस एक बहुस्तरीय वायु रक्षा प्रणाली है जिसमें सभी स्वदेशी मिसाइलों और लेजर वेपन को शामिल किया गया है।
आईएडीडब्ल्यूएस प्रणाली को स्वदेशी तकनीक के जरिए बनाया गया
डीआरडीओ के मुताबिक, परीक्षण के दौरान कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम से लेकर कम्युनिकेशन और रडार प्रणाली ने सफल परिणाम प्रस्तुत किए। टेस्ट के दौरान डीआरडीओ के सीनियर वैज्ञानिक और आर्म्ड फोर्सेज से जुड़े कमांडर भी मौजूद थे। आईएडीडब्ल्यूएस प्रणाली को स्वदेशी तकनीक के जरिए बनाया गया है। इस बहुस्तरीय वायु रक्षा प्रणाली से विभिन्न स्तरों पर वायु रक्षा प्रदान की जा सकती है जिससे दुश्मन के हवाई हमलों (ड्रोन, मिसाइल, फाइटर जेट इत्यादि) को प्रभावी ढंग से विफल किया जा सकता है। खास बात ये है कि इसी महीने स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त) के मौके पर पीएम मोदी ने लाल किले की प्राचीर से सुदर्शन चक्र मिशन का ऐलान किया था।
गगनयान मिशन की तैयारी तेज, इसरो ने किया पहला सफल एयर ड्रॉप टेस्ट
वहीं इसरो ने गगनयान मिशन की तैयारी तेज कर दी है। इसरो ने रविवार को पैराशूट आधारित डीसेलेरेशन सिस्टम का प्रदर्शन किया। इसके तहत एयर ड्रॉप सिस्टम का सफल परीक्षण किया गया। इसमें सशस्त्र बलों ने भी भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (इसरो) की मदद की। इसरो ने ‘एक्स’ पर लिखा कि गगनयान मिशन के लिए पैराशूट आधारित डीसेलेशन सिस्टम के संपूर्ण प्रदर्शन के लिए पहला एकीकृत एयर ड्रॉप टेस्ट सफलतापूर्वक पूरा किया।
यह परीक्षण इसरो, भारतीय वायुसेना, डीआरडीओ, भारतीय नौसेना और भारतीय तटरक्षक बल के संयुक्त प्रयास से संपन्न हुआ। गगनयान देश का पहला मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन है जिसके तहत 4 अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष की सैर करवाई जाएगी। यान को इसी साल लांच करने की योजना है। पहले मानवरहित परीक्षण उड़ान होगी जिसमें एक व्योममित्र रोबोट भेजा जाएगा। गगनयान मिशन 3 दिवसीय है। मिशन के लिए 400 किलोमीटर की पृथ्वी की निचली कक्षा पर मानव को अंतरिक्ष में भेजा जाएगा और फिर सुरक्षित पृथ्वी पर वापस लाया जाएगा।
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