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The Haryana Story | फरीदाबाद के सूरजकुंड में शिल्प महाकुंभ का 31 जनवरी को उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन करेंगे उद्घाटन

फरीदाबाद के सूरजकुंड में शिल्प महाकुंभ का 31 जनवरी को उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन करेंगे उद्घाटन

हरियाणा के विरासत एवं पर्यटन मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा ने कहा कि 39वां सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प महोत्सव दुनिया के सांस्कृतिक एवं पर्यटन मानचित्र पर मजबूत दस्तक देगा

हरियाणा के विरासत एवं पर्यटन मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा ने कहा कि 39वां सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प महोत्सव दुनिया के सांस्कृतिक एवं पर्यटन मानचित्र पर मजबूत दस्तक देगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत संकल्प को सिद्धि तक ले जाने के उद्देश्य के साथ यह शिल्प महोत्सव राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय कलाकारों, हस्तशिल्पियों और बुनकरों की सांस्कृतिक विरासत को सशक्त करेगा तथा वैचारिक एवं व्यापारिक गतिविधियों को नई गति देगा। इसके लिए मूल मंत्र लोकल से ग्लोबल-आत्मनिर्भर भारत की पहचान होगा। विरासत एवं पर्यटन मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा ने आज हरियाणा सिविल सचिवालय स्थित अपने कार्यालय में 39वें सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प महोत्सव की तैयारियों को लेकर विभाग के आयुक्त एवं सचिव डॉ. अमित कुमार अग्रवाल तथा निदेशक पर्यटन पार्थ गुप्ता के साथ पत्रकार वार्ता को संबोधित किया।

16 दिन तक चलने वाले शिल्प महोत्सव का समापन 15 फरवरी को होगा

कैबिनेट मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा ने बताया कि 31 जनवरी को देश के उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन फरीदाबाद के सूरजकुंड में शिल्प महाकुंभ का उद्घाटन करेंगे, जबकि केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी विशिष्ट अतिथि के रूप में शिरकत करेंगे। उन्होंने कहा कि 16 दिन तक चलने वाले शिल्प महोत्सव का समापन 15 फरवरी को होगा, जिसमें राज्यपाल प्रोफेसर असीम कुमार घोष मुख्य अतिथि होंगे। पर्यटन मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा ने कहा कि 39वां सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प महोत्सव केवल एक आयोजन भर नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक एकता का उत्सव, शिल्प कौशल और आत्मनिर्भरता के विचार की आत्मा साबित होगा। उन्होंने कहा कि यह आयोजन हरियाणा प्रदेश की विरासत के संरक्षण, होनहार कारीगरों व हस्तशिल्पियों की स्थायी आजीविका तथा अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक गठजोड़ की प्रतिबद्धता पर खरा उतरेगा। 

इस वर्ष 50 से अधिक देशों के लगभग 800 प्रतिभागी शामिल होंगे

उन्होंने बताया कि पार्टनर नेशन के तौर पर इजिप्ट चौथी बार शिल्प महोत्सव में अपनी प्राचीन कला एवं संस्कृति के साथ पर्यटकों को आकर्षित करेगा, जबकि थीम स्टेट उत्तर प्रदेश और मेघालय की समृद्ध सांस्कृतिक एवं लोक कलाओं का प्रदर्शन मेला परिसर में किया जाएगा। उन्होंने जानकारी दी कि गत वर्ष 44 देशों के 635 प्रतिभागियों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया था, जबकि इस वर्ष 50 से अधिक देशों के लगभग 800 प्रतिभागी शामिल होंगे। विरासत एवं पर्यटन मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा ने बताया कि शिल्प महोत्सव में 1200 से अधिक स्टॉल राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बुनकरों, शिल्पकारों तथा पारंपरिक शिल्प प्रदर्शनी एवं बिक्री के लिए आवंटित किए गए हैं। उन्होंने कहा कि पद्मश्री कैलाश खेर, पंजाबी गायक गुरदास मान, पद्मश्री महाबीर गुड्डू सहित कई प्रख्यात कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देंगे।

हस्तशिल्प मेला केवल एक मेला नहीं, बल्कि.....

हरियाणवी संस्कृति एवं लोक कला की पुरानी परंपराओं को जीवंत रखने के लिए प्रादेशिक कलाकार विभिन्न मंचों पर प्रस्तुति देंगे, जिनमें इकतारा, सारंगी और ढेरू जैसे पारंपरिक वाद्य यंत्र भी शामिल होंगे। उन्होंने बताया कि मेला परिसर में हर वर्ष बढ़ते पर्यटकों के आवागमन को ध्यान में रखते हुए लगभग पौने पांच करोड़ रुपये की राशि खर्च कर ढांचागत विकास किया गया है। इसमें मेला परिसर का सौंदर्यीकरण, मार्गों का चौड़ीकरण, 127 नए हटों का निर्माण, पुरानी हटों की मरम्मत तथा झूला क्षेत्र का विस्तार शामिल है। कैबिनेट मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा ने महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के क्रैश लैंडिंग में असामयिक निधन पर गहरा शोक भी व्यक्त किया। पत्रकार वार्ता में विरासत एवं पर्यटन विभाग के आयुक्त एवं सचिव डॉ. अमित कुमार अग्रवाल ने कहा कि सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय हस्तशिल्प मेला केवल एक मेला नहीं, बल्कि राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पहचान वाला आयोजन है।

यह आयोजन आत्मनिर्भरता को सशक्त करता है

इस मेले में देश के कोने-कोने से कारीगर भाग लेते हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इसकी व्यापक भागीदारी रहती है। उन्होंने बताया कि मेले में शिल्प उत्पादों की निरंतर मांग और विविधता देखने को मिलती है। डॉ. अमित कुमार अग्रवाल ने कहा कि सूरजकुंड मेला किसी व्यावसायिक उद्देश्य से नहीं, बल्कि शिल्पकारों और उनकी शिल्प कला को बढ़ावा देने के लिए आयोजित किया जाता है। यह आयोजन आत्मनिर्भरता को सशक्त करता है, निर्यात क्षमता को बढ़ाता है और स्थानीय उत्पादों को वैश्विक मंच प्रदान करते हुए लोकल से ग्लोबल की अवधारणा को साकार करता है। 

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