सिरसा की सांसद, कांग्रेस की महासचिव एवं पूर्व मंत्री कुमारी सैलजा ने हिसार-फतेहाबाद नई रेल लाइन परियोजना को नकारात्मक प्रतिफल दर के आधार पर स्थगित किए जाने पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2002 में घोषित यह महत्वपूर्ण परियोजना 23 वर्षों बाद भी धरातल पर साकार नहीं हो सकी, जो क्षेत्र की जनता के साथ गंभीर अन्याय है। कुमारी सैलजा ने कहा कि यदि सरकार जनता को मूलभूत सुविधाएं देने के लिए भी लाभ-हानि का गणित देखने लगे, तो कल्याणकारी राज्य की अवधारणा का अर्थ ही शेष नहीं रहता।
सामाजिक, आर्थिक, शैक्षिक तथा व्यापारिक विकास प्रभावित हुआ
रेलवे देश की सार्वजनिक संपत्ति है और उसका उद्देश्य प्रत्येक क्षेत्र के नागरिकों को समान रूप से सुविधा प्रदान करना होना चाहिए, न कि केवल उन मार्गों तक सीमित रहना जो तात्कालिक रूप से लाभकारी दिखाई दें। उन्होंने कहा कि फतेहाबाद एवं आसपास का क्षेत्र लंबे समय से रेल संपर्क से वंचित है, जिससे सामाजिक, आर्थिक, शैक्षिक तथा व्यापारिक विकास प्रभावित हुआ है।
लाखों लोगों की आस्था एवं सुगम आवागमन का प्रश्न
यह परियोजना क्षेत्र के अनेक धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थलों से भी जुड़ी है और लाखों लोगों की आस्था एवं सुगम आवागमन का प्रश्न है। इसलिए इस परियोजना का मूल्यांकन केवल वित्तीय प्रतिफल के आधार पर करना न्यायसंगत नहीं है। कुमारी सैलजा ने मांग की कि इस रेल लाइन का पुनर्मूल्यांकन सामाजिक-आर्थिक लाभ, क्षेत्रीय संतुलन और भविष्य की विकास संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए किया जाए तथा अलाभकारी का ठप्पा लगाकर इसे स्थगित करने के निर्णय पर तत्काल पुनर्विचार कर शीघ्र स्वीकृति और कार्यारंभ सुनिश्चित किया जाए।
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