चंडीगढ़ : किसान आंदोलन की गूंज एक बार फिर दिल्ली को दहलाने जा रही है। अपनी मांगों को लेकर आगामी 13 फरवरी को किसान एक बार फिर दिल्ली की ओर कूच कर रहे हैं। वहीं आंदोलन मद्देनजर प्रशासन भी पूरी तरह से चौकन्ना हो गया है। किसान आंदोलन के दौरान प्रशासन ड्रोन कैमरों के जरिए वीडियोग्राफी करवाएगा। हालांकि हरियाणा पुलिस एक्ट 2007 की धारा 69 के अनुसार सड़क पर या किसी सार्वजनिक स्थान पर सभा बुलाने, आंदोलन के लिए संबंधित पुलिस थाने को लिखित में सूचना देनी होगी। पुलिस अधिकारी के कानूनी तौर पर संतुष्ट होने पर ही किसी सभा या जूलुस की अनुमति दी जाती है।
सरकार के आश्वासन के बाद स्थगित कर दिया था पहला आंदोलन वहीं आंदोलन को देखते हुए एसपी जश्नदीप सिंह रंधावा ने बताया कि कई किसानों की ओर से किसान आंदोलन में भाग लिया जा सकता है। इसलिए कोई भी वाहनों को किराये या भाईचारे में न दें अन्यथा उनके वाहनों को इंपाउंड करके अपंजीकृत कर दिया जाएगा। अवहेलना करने के जुर्म में कानूनी कार्रवाई भी होगी। उल्लेखनीय है कि 2020 में किसान आंदोलन हुआ था और एक साल से ऊपर चला था जोकि एक ऐतिहासिक आंदाेलन बन चुका है। उस समय सरकार के आश्वासन के बाद आंदोलन स्थगित तो कर दिया था, मगर केंद्र ने अभी तक मांगों को लागू नहीं किया। जिस कारण किसान एक बार फिर ट्रैक्टरों को लेकर दिल्ली का रूख कर रहे हैं।
ये हैं किसानों की मुख्य मांगे
- पिछले आंदोलन में मारे गए किसान परिवारों के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए।
- किसानों पर दर्ज मामले वापस लिए जाएं।
- एमएसपी पर गारंटी कानून बनाया जाए।
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