पानीपत स्थित आइओसीएल रिफाइनरी में मजदूरों का हड़ताल पर जाना अत्यंत चिंताजनक स्थिति को दर्शाता है। जब श्रमिक कई दिनों से 12 घंटे की ड्यूटी, अतिरिक्त 4 घंटे के ओवरटाइम का उचित भुगतान और हर माह 1 से 7 तारीख के बीच समय पर वेतन तथा चिकित्सा सुविधा और किसी मजदूर के कार्य स्थल पर मृत्यु होने पर उचित मुआवजा और उसके परिवार के एक सदस्य को नौकरी जैसी बुनियादी मांगों को लेकर प्रबंधन व प्रशासन से संवाद कर रहे हों, और फिर भी उनकी सुनवाई न हो, तो यह स्थिति सरकार की कार्यशैली पर प्रश्न खड़े करती है।
वेतन का भुगतान सुनिश्चित करना सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी
यह बात सिरसा की सांसद, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री कुमारी सैलजा ने आज जारी एक बयान में कही। उन्होंने कहा कि 8 घंटे का कार्य दिवस कोई विशेष सुविधा नहीं, बल्कि श्रमिकों का वैधानिक अधिकार है। अतिरिक्त समय तक काम लेने पर उचित ओवरटाइम देना और निर्धारित समय पर वेतन का भुगतान सुनिश्चित करना सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है। कुमारी सैलजा ने कहा कि मजदूरों को पीने के पानी, शौचालय और जरूरी चिकित्सा सुविधा जैसे मूलभूत आवश्यकताओं के लिए भी यदि श्रमिकों को हड़ताल का सहारा लेना पड़े, तो यह औद्योगिक तंत्र के लिए गंभीर संकेत है।
संवाद और सहमति से ही समाधान संभव
इस रिफाइनरी में हजारों की संख्या में प्रवासी मजदूर अपने घरों से दूर अपने बच्चों का पालन पोषण करने के लिए कार्यरत है फिर भी उनका निरंतर शोषण जारी है जो काफी चिंता जनक है। उन्होंने कहा कि औद्योगिक विकास का दावा तभी सार्थक है, जब उसमें श्रमिकों का सम्मान और सुरक्षा सुनिश्चित हो। श्रमिकों की आवाज को दबाने या आंदोलन को कानून-व्यवस्था का विषय बनाने के बजाय सरकार को उनकी समस्याओं को संवेदनशीलता से सुनना चाहिए। संवाद और सहमति से ही समाधान संभव है।
समस्याओं को समझते हुए इसमें उचित कदम उठाने की मांग
कुमारी सैलजा ने सरकार से मांग की कि वह तुरंत मामले में संज्ञान लेकर पीने के पानी, शौचालय, चिकित्सा तथा अन्य जरूरी मांगों के विषय में हस्तक्षेप कर श्रमिकों के प्रतिनिधियों के साथ सार्थक वार्ता सुनिश्चित करे और उनकी जायज मांगों को स्वीकार करे। सांसद सैलजा ने सरकार को आईना दिखाते हुए कहा कि कितने शर्म की बात है कि हर घर शौचालय का दावा करने वाली डबल इंजन की सरकार मजदूरों को पीने का पानी और शौचालय तक उपलब्ध नहीं करा पा रही है। श्रमिक देश और प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। उनके अधिकारों की अनदेखी कर विकास का दावा केवल दिखावा साबित होगा। उन्होंने केंद्र सरकार से तुरंत मजदूरों की समस्याओं को समझते हुए इसमें उचित कदम उठाने की मांग की।
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