आरटीआई एक्टिविस्ट कॉमरेड पीपी कपूर ने डीसी को शिकायत देकर पूर्व केंद्रीय मंत्री चौ चांद राम और उसके बहू बेटे पर दलितों पिछड़ों के तकनीकी संस्थान की 200 करोड़ रुपए मूल्य की 15 एकड़ भूमि हड़पने आरोप लगाया है। डीसी वीरेंद्र कुमार के आदेश पर एसडीएम की अगुआई में डीटीपी (पी) व तहसीलदार की तीन सदस्यीय जांच टीम ने आरोपों की जांच शुरू कर दी है। कपूर ने आरोप लगाया कि भूमि माफिया को बड़े भाजपा नेता का संरक्षण है।
एक नज़र मामले पर
आरटीआई एक्टिविस्ट कॉमरेड पीपी कपूर ने डीसी को शिकायत देकर आरोप लगाया कि पूर्व केंद्रीय मंत्री चौ चांद राम व उनके बेटे, बहू ने पानीपत में 200 करोड़ रुपए से ज्यादा मूल्य की 14.75 एकड़ भूमि हड़प कर बड़ा घोटाला किया है । शिकायत में बताया कि वर्ष 1978 में तत्कालीन केंद्रीय मंत्री एवं रोहतक से सांसद चौ चांद राम ने आल इंडिया अंत्योदय एजुकेशन सोसाइटी को रजिस्टर्ड कराया। इसमें कई केंद्रीय मंत्री व देश भर से कई एमपी ,विधायक व ब्यूरोक्रेट्स शामिल थे। दलित वो पिछड़े वर्ग के बच्चों के लिए तकनीकी संस्थान बना कर तकनीकी शिक्षा देने के लिए सोसायटी बनाई थी। वर्ष 1982 में इस सोसाइटी ने पुनर्वास विभाग हरियाणा सरकार से रियायती दरों पर असंध रोड़ दोनों नहर पार तरफ इंसार में 14.75 एकड़ भूमि अलॉट करा ली।
सर्वे सर्वा बन कर भूमि को ठेके पर देकर आमदन लेते रहे
अलॉटमेंट की शर्तों के मुताबिक इस भूमि का उपयोग सिर्फ तकनीकी संस्थान करने के लिए था दूसरा उपयोग करने पर भूमि का अलॉटमेंट रद्द करके जमा धनराशि ज़ब्त की जानी थी। वर्ष 1984 में यहां मात्र आधा एकड़ भूमि पर विधाता टेक्निकल इंस्टीट्यूट के नाम से आईटीआई बनाई गई और बाकी भूमि कृषि कार्य के लिए ठेके पर दे दी गई। यह आईटीआई भी वर्ष 1995 में ठप्प हो गई और मौके पर भूमि माफिया ने बाउंसर बैठा रखे हैं। भूमि को कृषि कार्य के लिए ठेके पर देकर पिछले 48 वर्षों से प्राप्त आमदन को चौ चांद राम लेते रहे। वर्ष 2015 में उनकी मृत्यु के बाद उनकी पत्नी, फिर बेटा फिर बहू इस सोसाइटी की सर्वे सर्वा बन कर भूमि को ठेके पर देकर आमदन लेते रहे।
न तो समिति का कभी नवीनीकरण हुआ, न ऑडिट हुआ, न कोई मीटिंग
यानि जिस उद्देश्य के लिए सरकार से सस्ते दामों पर भूमि अलॉट कराई थी, उस उद्देश्य दफन कर इस 14.75 एकड़ भूमि को अपनी निजी संपति मान लिया गया। पानीपत के एक बड़े भाजपा नेता के भूमि माफिया को संरक्षण के कारण अधिकारियों ने इस सरकारी भूमि पर कब्जा नहीं लिया। कपूर ने शिकायत में यह भी आरोप लगाया कि वर्ष 1978 में आल इंडिया अंत्योदय एजुकेशन सोसाइटी का रजिस्ट्रेशन कराने के बाद से न तो समिति का कभी नवीनीकरण हुआ, न ऑडिट हुआ, न कोई मीटिंग हुई।
ये है मांग
समस्त 14.75 एकड़ भूमि की अलाटमेंट तुरंत रद्द करके सरकार अपना कब्जा ले। इस सरकारी भूमि की निशानदेही करवा कर यहां बने होटल वगैरह के अवैध कब्जे हटवाए जाएं। सरकारी भूमि को कृषि कार्य के लिए ठेके पर देकर प्राप्त हुई समस्त धनराशि ब्याज सहित वसूल की जाए। भूमि माफिया के विरुद्ध केस दर्ज करके कानूनी कारवाई की जाए।