रेवाड़ी जिले के कोसली विधानसभा क्षेत्र से विधायक अनिल यादव के पैतृक गांव डहीना में विकास कार्यों के ठप होने का मामला गरमा गया है। गांव की महिला सरपंच पिंकी यादव ने ग्राम सचिव (सेक्रेटरी) पर गंभीर आरोप लगाते हुए मोर्चा खोल दिया है। महिला सरपंच ने ग्राम सचिव पर विकास कार्यों में बाधा डालने और मनमानी करने के आरोप लगाए हैं। सरपंच का आरोप है कि ग्राम सचिव की गांव के विकास कार्यों में कोई रुचि नहीं है और वह जानबूझकर फाइलों को अटका रहे हैं। सरपंच के अनुसार, विकास कार्यों की पेमेंट को जानबूझकर छोटी-मोटी कमियां निकालकर रोक दिया जाता है, जिससे ठेकेदार काम बीच में ही छोड़ रहे हैं। ग्राम पंचायत की बैठकें समय पर नहीं बुलाई जा रही हैं और संपर्क करने पर भी सचिव कोई संतोषजनक जवाब नहीं देते। सरपंच ने यह भी आरोप लगाया कि सचिव उनके साथ अभद्र व्यवहार और बदसलूकी करते हैं।
अभी तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला
अधिकारियों और मंत्रियों तक पहुंची शिकायत सरपंच पिंकी ने पिछले महीने बाल भवन में हुई ग्रीवेंस कमेटी की बैठक में हरियाणा सरकार के मंत्री विपुल गोयल के सामने यह मुद्दा उठाया था। मंत्री ने आरोपों को गंभीरता से लेते हुए एडीसी (ADC) को इस मामले की जांच करने के आदेश दिए थे, सरपंच का कहना है कि उन्होंने बीडीपीओ (BDPO) और एडीसी को लिखित शिकायत दी है, लेकिन अभी तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है।
प्रदेश के एक प्रभावशाली विधायक का अपना गांव
प्रशासनिक प्रतिक्रिया फिलहाल स्थानीय प्रशासन ने इस मामले में जांच जारी होने की बात कही है। सरपंच का कहना है कि यदि जल्द ही ग्राम सचिव को नहीं बदला गया और विकास कार्य शुरू नहीं हुए, तो गांव की जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ेगा, यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि यह प्रदेश के एक प्रभावशाली विधायक का अपना गांव है।
“जैसा मैं चाहूंगा, वैसा ही होगा”
सरपंच के मुताबिक सचिव का रवैया इतना निरंकुश हो गया है कि वह खुले तौर पर कहता है—“जैसा मैं चाहूंगा, वैसा ही होगा।” इस मामले को लेकर वह कई बार उच्च अधिकारियों के पास जा चुकी हैं। उन्होंने बीडीपीओ, एडीसी और ग्रीवेंस कमेटी तक शिकायत दी, लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। वहीं, सरपंच पति मुकेश ने भी आरोप लगाया कि पंचायत द्वारा कराए गए विकास कार्यों में जानबूझकर खामियां निकालकर भुगतान रोका जा रहा है। उनका कहना है कि सरपंच को लगातार प्रताड़ित किया जा रहा है, जिससे गांव का विकास पूरी तरह प्रभावित हो रहा है। परिवार ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई की जाए, ताकि सरपंच को न्याय मिले और गांव के विकास कार्य दोबारा शुरू हो सकें।
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