गेहूं की सरकारी खरीद शुरू होते ही मंडियों में व्यवस्थाओं को लेकर हलचल तेज हो गई है। इसी कड़ी में प्रदेश के कृषि मंत्री शाम सिंह राणा ने रविवार को करनाल जिले की विभिन्न अनाज मंडियों का दौरा कर खरीद प्रक्रिया का जायजा लिया। गेहूं की सरकारी खरीद शुरू होने के साथ ही मंडियों में व्यवस्थाओं को पुख्ता करने के लिए मंत्री ने अधिकारियों और आढ़तियों के साथ सीधा संवाद किया। कृषि मंत्री ने करनाल जिले की महत्वपूर्ण मंडियों—इंद्री, कुंजपुरा, करनाल, घरौंडा, असंध, जुंडला, निसिंग और तरावड़ी का दौरा किया। उन्होंने मौके पर जाकर गेहूं की आवक, साफ-सफाई, नमी मापक यंत्रों और किसानों के लिए उपलब्ध सुविधाओं का निरीक्षण किया।
फिंगरप्रिंट नियम पर किसानों का विरोध
मार्केट कमेटी में पहुंचे मंत्री को किसानों के तीखे सवालों का सामना करना पड़ा। किसानों ने नए नियमों को लेकर नाराजगी जताते हुए कहा कि खेतों में काम करने से उनके अंगूठे फट चुके हैं, ऐसे में बायोमेट्रिक फिंगरप्रिंट देना मुश्किल हो रहा है। इसके अलावा मंडियों में कट्टों की कमी और खराब मौसम को लेकर भी चिंता जताई गई।
पोर्टल वेरिफिकेशन और भुगतान पर जोर
मंत्री श्याम सिंह राणा ने स्पष्ट किया कि 'मेरी फसल-मेरा ब्यौरा' पोर्टल पर किसानों के पंजीकरण और वेरिफिकेशन का काम लगभग पूरा हो चुका है। उन्होंने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि: खरीद प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। किसानों के खातों में फसल का भुगतान समय पर सुनिश्चित हो। पोर्टल संबंधी किसी भी तकनीकी खामी को तुरंत दूर किया जाए।
उठान और साइलो (Silo) विवाद पर समाधान
दौरे के दौरान सबसे बड़ा मुद्दा उठान (Lifting) की व्यवस्था को लेकर उठा। मंडी प्रधानों और आढ़तियों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि गेहूं को दूर स्थित साइलो केंद्रों तक भेजने से परिवहन खर्च बढ़ रहा है और काम में देरी हो रही है। आढ़तियों की समस्या सुनते ही मंत्री ने मौके पर मौजूद FCI (भारतीय खाद्य निगम) के अधिकारियों को तलब किया। उन्होंने आदेश दिया कि गेहूं को नजदीकी साइलो केंद्रों पर ही भेजा जाए ताकि परिवहन सरल हो और मंडियों में फसल के अंबार न लगें।
आढ़तियों और व्यापारियों के साथ बैठक
मंडियों के प्रतिनिधियों ने लेबर की कमी और बारदाने (बोरियों) की उपलब्धता को लेकर भी अपनी मांगें रखीं। कृषि मंत्री ने आश्वासन दिया कि सरकार व्यापारियों और आढ़तियों के साथ समन्वय बनाकर काम कर रही है ताकि खरीद सीजन सुचारू रूप से चलता रहे। कृषि मंत्री के इस दौरे का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि मंडी में आने वाले किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए लंबा इंतजार न करना पड़े। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी दी कि यदि उठान या भंडारण में लापरवाही पाई गई, तो संबंधित एजेंसी पर सख्त कार्रवाई होगी।
ट्रांसपोर्ट व्यवस्था सुधारने के निर्देश
मंत्री ने ट्रांसपोर्टरों को भी स्पष्ट निर्देश दिए कि मंडियों में गेहूं उठान के लिए पर्याप्त संख्या में वाहन उपलब्ध कराए जाएं। उन्होंने कहा कि उठान में देरी से किसानों और आढ़तियों को भुगतान में परेशानी आती है, इसलिए इसमें किसी प्रकार की ढिलाई न बरती जाए।
related
'जींद रैली': ₹253 करोड़ के तोहफे, IMT की घोषणा और विपक्ष पर तंज- जानें सीएम व तमाम नेताओं के तीखी टिप्पणियां
UCC के नाम पर 'सेलेक्टिव' खेल! कुमारी सैलजा ने असम कांग्रेस मुख्यालय से फूँका चुनावी बिगुल
करनाल की मंडियों में कृषि मंत्री का घेराव: फिंगरप्रिंट नियम पर बरसे किसान, उठान व्यवस्था पर आढ़तियों ने जताई नाराजगी
Latest stories
डिजिटल दुनिया 'साइलेंट किलर': छीन रही नींद, बढ़ रही मानसिक बीमारी और सुसाइडल टेंडेंसी : साइकोलॉजिस्ट यशदीप मलिक
"किस तोते में फंसी है सत्ता के राजा की जान?" – ऑपरेशन सिन्दूर और ट्रंप के बयानों पर बृजेंद्र सिंह का तीखा हमला
मिडिल ईस्ट वॉर इफेक्ट : सप्लाई चेन टूटी, रूट भटके - करनाल के बासमती पर मंडराया संकट, एक्सपोर्टर्स की बढ़ी टेंशन