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The Haryana Story | सरकारी स्कूलों में घटते दाखिले गंभीर चेतावनी, सैलजा बोलीं - क्या साज़िश के तहत बंद हो रही सरकारी शिक्षा?

सरकारी स्कूलों में घटते दाखिले गंभीर चेतावनी, सैलजा बोलीं - क्या साज़िश के तहत बंद हो रही सरकारी शिक्षा?

सैलजा ने कहा हरियाणा की शिक्षा नीति फेल, एक साल में सरकारी स्कूलों से टूटे 4 लाख बच्चों के सपने, दाखिलों में 18% की भारी गिरावट

सिरसा की सांसद सिरसा, पूर्व केंद्रीय मंत्री, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री कुमारी सैलजा ने कहा कि हरियाणा में सरकारी स्कूलों में लगातार घटते दाखिलों के ताज़ा आंकड़े राज्य की शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े करते हैं। हाल ही में सामने आए आंकड़ों के अनुसार केवल एक वर्ष में ही लगभग 3,92,983 बच्चों के दाखिले कम हुए हैं, जो करीब 18 प्रतिशत की गिरावट दर्शाते हैं। यह स्थिति अत्यंत चिंताजनक है, विशेषकर तब जब पिछले 6 वर्षों से लगातार नामांकन में कमी दर्ज की जा रही है। सांसद ने कहा कि एक साजिश के तहत सरकारी स्कूलों को बंद करने जा रही है।

सरकार को इन आंकडों से ही सबक लेकर जल्द प्रभावी कदम उठाना चाहिए

सांसद कुमारी सैलजा ने कहा है कि सरकारी स्कूलों में लगातार घटते दाखिलों के ताज़ा आंकड़े स्पष्ट संकेत है कि आम जनता का भरोसा सरकारी शिक्षा व्यवस्था से धीरे-धीरे समाप्त होता जा रहा है। अगर सरकार की शिक्षा नीति बेहतर होती तो सरकारी स्कूलों में अविभावक बच्चों का दाखिल कराने के लिए आगे आते पर हो इसका उलट रहा है अविभावक सरकारी स्कूलों से बच्चों को निकालकर प्राइवेट स्कूलों में दाखिला करवा रहे हैं। आंकड़े स्पष्ट संकेत दे रहे है कि शहरी क्षेत्रों खासकर महानगरों के स्कूलों में दाखिलों में बड़ी कमी आई है। फरीदाबाद, गुरूग्राम, करनाल, पानीपत, हिसार, भिवानी जींद, सिरसा, फतेहाबाद इसके ताजा उदाहरण है। सरकार को इन आंकडों से ही सबक लेकर जल्द प्रभावी कदम उठाना चाहिए। अगर सरकार ने शुरू में ही सरकारी स्कूलों में दाखिलों को लेकर अभियान चलाकर अविभावकों को भरोसे में लिया होता इतनी गंभीर स्थिति न होती। 

अभिभावक मजबूर होकर निजी स्कूलों की ओर रुख कर रहे

कुमारी सैलजा ने कहा कि सरकार द्वारा चलाया जा रहा प्रवेश उत्सव जैसे अभियान केवल औपचारिकता बनकर रह गए हैं। यदि वास्तव में शिक्षा को प्राथमिकता दी जाती, तो स्कूलों में बच्चों की संख्या बढ़ती, न कि इस प्रकार घटती। कई सरकारी स्कूल आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं कहीं पर्याप्त कक्षाएं नहीं हैं, तो कहीं शौचालय, पेयजल और डिजिटल संसाधनों की भारी कमी है। सांसद ने यह भी कहा कि शिक्षकों के हजारों पद खाली पड़े हैं, जिसके कारण बच्चों की पढ़ाई सीधे प्रभावित हो रही है। एक ओर सरकार शिक्षा सुधार की बात करती है, वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर स्कूलों की स्थिति बद से बदतर होती जा रही है। ऐसे हालात में अभिभावक मजबूर होकर निजी स्कूलों की ओर रुख कर रहे हैं। 

गरीब और कमजोर वर्ग के बच्चों के भविष्य के साथ अन्याय

कुमारी सैलजा ने चिराग योजना पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि यह नीति सरकारी स्कूलों को मजबूत करने के बजाय उन्हें कमजोर करने की दिशा में काम कर रही है। सरकार स्वयं बच्चों को निजी स्कूलों में भेजने के लिए प्रोत्साहित कर रही है, जो शिक्षा के निजीकरण को बढ़ावा देने जैसा है। यह नीति गरीब और कमजोर वर्ग के बच्चों के भविष्य के साथ अन्याय है। उन्होंने विशेष चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि सरकारी स्कूलों में मुख्य रूप से गरीब, वंचित और पिछड़े वर्ग के बच्चे शिक्षा प्राप्त करते हैं। यदि इन स्कूलों की स्थिति लगातार खराब होती रही, तो समाज के इन वर्गों के बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का सपना अधूरा रह जाएगा। यह सामाजिक असमानता को और बढ़ाने का कार्य करेगा, जो किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए उचित नहीं है। 

हरियाणा सरकार से मांग

सांसद ने हरियाणा सरकार से मांग की कि वह तुरंत प्रभाव से सरकारी स्कूलों की स्थिति सुधारने के लिए ठोस कदम उठाए। शिक्षकों के खाली पदों को शीघ्र भरा जाए, बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं और शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाया जाए। उन्होंने कहा कि सरकार का कर्तव्य है कि हर बच्चे को समान और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले, ताकि वह देश और समाज के विकास में अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर सके।

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