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The Haryana Story | 'देश चलाना अब मोदी के बस की बात नहीं', राहुल बोले -'Compromised PM' खुद की जिम्मेदारी जनता पर डाल रहे

'देश चलाना अब मोदी के बस की बात नहीं', राहुल बोले -'Compromised PM' खुद की जिम्मेदारी जनता पर डाल रहे

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए लिखा कि 12 साल के शासन के बाद देश को इस मुकाम पर लाकर खड़ा कर दिया

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देश की जनता से की गई 7 अपीलों पर तीखा हमला बोला है। राहुल गांधी ने इन अपीलों को प्रधानमंत्री का 'उपदेश' मानने से इनकार करते हुए इन्हें सरकार की 'नाकामी का सबूत' करार दिया है। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए लिखा कि 12 साल के शासन के बाद देश को इस मुकाम पर लाकर खड़ा कर दिया गया है जहाँ प्रधानमंत्री को जनता को बताना पड़ रहा है कि उन्हें क्या खरीदना चाहिए और क्या नहीं।

नाकामी का सबूत : जवाबदेही से बचने की कोशिश

उन्होंने कहा कि जनता से त्याग की मांग करना कोई सुझाव नहीं बल्कि शासन की विफलता का प्रमाण है। राहुल ने आरोप लगाया कि हर बार सरकार अपनी जिम्मेदारी जनता पर डाल देती है ताकि खुद की जवाबदेही से बचा जा सके।' उन्होंने प्रधानमंत्री को 'Compromised PM' बताते हुए कहा कि अब देश चलाना उनके बस में नहीं रह गया है।

क्या थीं प्रधानमंत्री मोदी की वो 7 अपीलें?

प्रधानमंत्री मोदी ने रविवार को सिकंदराबाद (तेलंगाना) में एक रैली के दौरान पश्चिम एशिया संकट (यूएस-ईरान तनाव) के कारण पैदा हुई वैश्विक अनिश्चितता और विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने के लिए देशवासियों से 7 विशेष संकल्प लेने का आह्वान किया था।

सोना न खरीदें : अगले 1 साल तक सोने के गहने या सोना न खरीदने का संकल्प लें।

विदेश यात्रा टालें : कम से कम एक साल तक गैर-जरूरी विदेश यात्राओं से बचें।

ईंधन बचाएं : पेट्रोल और डीजल का कम उपयोग करें क्योंकि भारत में तेल के कुएं नहीं हैं।

Work From Home : जहाँ संभव हो, कोविड की तरह 'वर्क फ्रॉम होम' अपनाएं ताकि ईंधन की बचत हो।

सार्वजनिक परिवहन : निजी वाहनों की जगह मेट्रो और सार्वजनिक परिवहन का अधिक उपयोग करें।

खपत में कटौती : खाद (फर्टिलाइजर) और खाने के तेल का इस्तेमाल कम करें।

कारपूलिंग और ईवी : अकेले गाड़ी चलाने के बजाय कारपूल करें और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा दें।

राजनीतिक घमासान

इस बयान के बाद बीजेपी और कांग्रेस के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। जहाँ कांग्रेस इसे आर्थिक आपातकाल जैसी स्थिति बता रही है, वहीं बीजेपी इसे राष्ट्रहित में उठाया गया एक देशभक्तिपूर्ण कदम बता रही है। राहुल के अलावा अखिलेश यादव ने भी इसे सरकार की स्वीकारोक्ति बताया है कि वे संकट संभालने में विफल रहे हैं।

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