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The Haryana Story | ईरान को भारत से 'दोस्ती' की उम्मीद: तनाव के बीच ईरानी विदेश मंत्री का दिल्ली दौरा, BRICS के मंच पर बड़ा मंथन!

ईरान को भारत से 'दोस्ती' की उम्मीद: तनाव के बीच ईरानी विदेश मंत्री का दिल्ली दौरा, BRICS के मंच पर बड़ा मंथन!

ईरान के विदेश मंत्री जल्द ही नई दिल्ली का दौरा कर सकते हैं, जिसे वैश्विक राजनीति के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।

पश्चिम एशिया (Mid-East) में युद्ध के बादलों के बीच कूटनीतिक गलियारों से बड़ी खबर आ रही है। अमेरिका और इजरायल के साथ जारी भारी तनाव के बीच ईरान अब अपने पुराने और भरोसेमंद दोस्त 'भारत' की ओर देख रहा है। ईरान के विदेश मंत्री जल्द ही नई दिल्ली का दौरा कर सकते हैं, जिसे वैश्विक राजनीति के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।

तनाव के बीच 'मिशन इंडिया' पर तेहरान

ईरान और इजरायल के बीच किसी भी वक्त युद्ध छिड़ने की आशंका है। ऐसे में ईरान दुनिया के उन देशों को साधने की कोशिश कर रहा है, जिनका दबदबा वैश्विक राजनीति में बढ़ा है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरानी नेतृत्व के बीच हमेशा से अच्छे संबंध रहे हैं। ईरानी विदेश मंत्री का यह दौरा भारत को इस संकट में एक 'मध्यस्थ' (Mediator) के रूप में देखने की कोशिश हो सकती है।

BRICS के मंच पर बड़ा मंथन

ईरान अब BRICS (ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका) का पूर्ण सदस्य बन चुका है। आगामी बैठकों में ईरान इस मंच का उपयोग अपनी आवाज उठाने और अमेरिका द्वारा लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों के खिलाफ समर्थन जुटाने के लिए करेगा। भारत, जो कि BRICS का एक संस्थापक सदस्य है, इस चर्चा में अहम भूमिका निभाएगा। ईरान चाहता है कि ब्रिक्स देश मिलकर एक ऐसा आर्थिक ढांचा तैयार करें जो पश्चिमी देशों के दबाव से मुक्त हो।

भारत के लिए 'संतुलन' की चुनौती

भारत के लिए यह दौरा किसी 'अग्निपरीक्षा' से कम नहीं है। एक तरफ भारत की इजरायल के साथ गहरी रणनीतिक साझेदारी है, वहीं दूसरी तरफ ईरान के साथ चाबहार बंदरगाह और ऊर्जा सुरक्षा को लेकर पुराने रिश्ते हैं। नई दिल्ली की कोशिश होगी कि वह दोनों पक्षों के बीच तनाव कम करने की अपील करे ताकि खाड़ी क्षेत्र में शांति बनी रहे, क्योंकि वहां लाखों भारतीय काम करते हैं।

चाबहार और ट्रेड पर होगी खास नजर

ईरानी विदेश मंत्री की यात्रा के दौरान चाबहार पोर्ट के विस्तार और इसके संचालन पर बड़ी बातचीत होने की उम्मीद है। भारत इस बंदरगाह के जरिए मध्य एशिया तक पहुंचना चाहता है। अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद भारत ने इस प्रोजेक्ट पर काम जारी रखा है, जो ईरान के लिए आर्थिक ऑक्सीजन की तरह है।

क्या भारत कराएगा सुलह?

दुनियाभर की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या भारत अपनी 'सॉफ्ट पावर' का इस्तेमाल कर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती खाई को कम कर पाएगा। ईरान को उम्मीद है कि भारत वैश्विक मंचों पर उसके हितों की अनदेखी नहीं होने देगा।

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