हरियाणा में पिछले 12 दिनों से जारी सफाई कर्मचारियों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल का मामला अब पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय पहुंच गया है, जहां कांग्रेस विधायक गोकुल सेतिया द्वारा दायर जनहित याचिका (PIL) पर मुख्य न्यायाधीश ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए 14 मई 2026 को तत्काल सुनवाई की अनुमति दे दी है। इस विकट स्वच्छता संकट और जनता के स्वास्थ्य पर मंडराते खतरे को देखते हुए, प्रदेश की भाजपा सरकार भी पूरी तरह एक्शन मोड में आ गई है। शहरी स्थानीय निकाय (ULB) मंत्री विपुल गोयल ने गतिरोध को समाप्त करने के लिए सफाई कर्मचारी यूनियनों के प्रतिनिधियों के साथ चंडीगढ़ स्थित हरियाणा निवास में एक आपात बैठक बुलाई है।
हाईकोर्ट पहुंचा मामला, निकाय मंत्री की आपात बैठक
कांग्रेस विधायक गोकुल सेतिया ने जनहित याचिका दायर कर अदालत से तत्काल दखल देने की मांग की। मुख्य न्यायाधीश ने मामले को अति-महत्वपूर्ण मानते हुए इसकी सुनवाई 14 मई 2026 को तय की है। वहीं बढ़ते दबाव के बीच शहरी स्थानीय निकाय मंत्री विपुल गोयल ने सफाई कर्मचारी यूनियन के नेताओं को सीधे संवाद के लिए आमंत्रित किया।सड़कों पर कचरे का सैलाब: प्रदेश के प्रमुख शहरों (सिरसा, पानीपत, करनाल और हिसार) में हजारों टन कचरा जमा है, जिससे संक्रामक बीमारियों (डेंगू, मलेरिया) का खतरा बढ़ गया है।उग्र होता आंदोलन: कई शहरों में प्रदर्शनकारी कर्मचारियों ने विधायक कार्यालयों और मुख्य अदालती मार्गों पर कचरे से भरी ट्रॉलियां पलटकर अपना कड़ा रोष व्यक्त किया है।
कर्मचारी यूनियनों की मुख्य 19-सूत्रीय मांगें
कर्मचारी संघ अपनी मांगों को लेकर अड़े हुए हैं, जिनमें मुख्य रूप से वर्षों से कार्यरत संविदा (कच्चे) कर्मचारियों को तुरंत पक्का (नियमित) किया जाए। हाल ही में सेवा से हटाए गए लगभग 3,500 सफाई कर्मियों को नौकरी पर वापस लिया जाए।समान अधिकार' समान काम-समान वेतन' नीति लागू हो और पुराने बकायों का तत्काल भुगतान किया जाए। आउटसोर्सिंग और ठेका प्रथा को पूरी तरह समाप्त कर सीधे पक्की भर्तियां निकाली जाएं। पिछले आंदोलनों के दौरान कर्मचारियों पर दर्ज किए गए पुलिस मुकदमों और चार्जशीट को रद्द किया जाए।
विपक्ष का सरकार पर तीखा हमला
हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने सफाई कर्मियों की इन मांगों का पूर्ण समर्थन किया है। उन्होंने सोशल मीडिया (X) पर पोस्ट कर आरोप लगाया कि भाजपा सरकार आम जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रही है। उन्होंने याद दिलाया कि कांग्रेस शासनकाल के दौरान 10,000 ग्रामीण और 11,000 शहरी सफाई कर्मचारियों की पक्की भर्तियां की गई थीं, जबकि वर्तमान सरकार कर्मचारियों की जायज मांगों को लगातार नजरअंदाज कर रही है।
आम जनता की परेशानी
भीषण गर्मी के इस मौसम में सफाई ठप होने के कारण कॉलोनियों और मुख्य बाजारों में नरकीय स्थिति बन गई है। कचरे से उठने वाली तीव्र दुर्गंध के कारण लोगों का सांस लेना दूषित हो चुका है। झज्जर और बहादुरगढ़ जैसे क्षेत्रों में स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि कुछ व्यापारी और स्थानीय नागरिक खुद झाड़ू उठाकर सफाई करने मैदान में उतरे, जिसका कई जगह प्रदर्शनकारी यूनियनों ने विरोध भी किया। अब सभी की नजरें सरकार के साथ होने वाली इस बैठक और 14 मई को हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं, जिससे इस बड़े संकट का समाधान निकलने की उम्मीद है।
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