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The Haryana Story | सुप्रीम कोर्ट का राज्यों को आदेश- पब्लिक ट्रांसपोर्ट को तुरंत सुरक्षित बनाएं, बसों-कैब में ट्रैकिंग और पैनिक बटन अनिवार्य

सुप्रीम कोर्ट का राज्यों को आदेश- पब्लिक ट्रांसपोर्ट को तुरंत सुरक्षित बनाएं, बसों-कैब में ट्रैकिंग और पैनिक बटन अनिवार्य

सड़क हादसों पर सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणी : भारत में 'लेन ड्राइविंग' का कोई कॉन्सेप्ट ही नहीं, अनुशासनहीनता से हो रहे हादसे

प्रतीकात्मक तस्वीर

सुप्रीम कोर्ट ने देश में बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं पर गंभीर चिंता जताते हुए साफ कहा है कि भारत में व्यावहारिक रूप से 'लेन ड्राइविंग' का कोई कॉन्सेप्ट नहीं है, जो कि अधिकांश सड़क हादसों की सबसे बड़ी वजह है। जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने सड़क सुरक्षा से जुड़ी एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (UTs) को सख्त निर्देश दिया है कि यात्रियों विशेषकर महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा के लिए सभी सार्वजनिक परिवहन वाहनों (कमर्शियल गाड़ियों जैसे बस, टैक्सी, कैब आदि) में व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (VLTD) और पैनिक बटन अनिवार्य रूप से लगवाएं।

लेन ड्राइविंग पर सुप्रीम कोर्ट की तीखी टिप्पणी

अदालत ने सुनवाई के दौरान देश की यातायात व्यवस्था में अनुशासन की कमी पर गहरा दुख व्यक्त किया। हादसों की मुख्य वजह: पीठ के सदस्य जस्टिस पारदीवाला ने टिप्पणी की, "आप इस देश में यह कैसे सुनिश्चित करेंगे कि ड्राइवर लेन ड्राइविंग के नियमों का पालन करें? हमारे यहाँ इसका कोई कॉन्सेप्ट ही नहीं है और ज्यादातर हादसे इसी अनुशासनहीनता के कारण होते हैं।" सरकारों को निर्देश: कोर्ट ने कहा कि लेन ड्राइविंग एक ऐसा प्रभावी माध्यम है जिससे सड़क दुर्घटनाओं को काफी हद तक कम किया जा सकता है, इसलिए केंद्र और राज्य सरकारों को इस दिशा में विशेष ध्यान देना चाहिए। 

बिना ट्रैकिंग डिवाइस और पैनिक बटन के नहीं मिलेगा परमिट

सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि साल 2018 में केंद्र सरकार द्वारा नियम बनाए जाने के बावजूद, देश में 1% से भी कम सार्वजनिक वाहनों में ट्रैकिंग डिवाइस लगे हैं, जिसे कोर्ट ने बेहद 'परेशान करने वाला' माना। इसके सुधार के लिए निम्नलिखित कड़े आदेश दिए गए हैं: फिटनेस और परमिट पर रोक अब से किसी भी पब्लिक सर्विस वाहन को तब तक फिटनेस सर्टिफिकेट या ट्रांसपोर्ट परमिट जारी नहीं किया जाएगा, जब तक कि उसमें चालू स्थिति में VLTD और इमरजेंसी पैनिक बटन इंस्टॉल नहीं हो जाते।

गाड़ियों में लगे ट्रैकिंग डिवाइस का डेटा सीधे सरकारी वाहन (Vahan) पोर्टल से लिंक होना चाहिए। जब तक पोर्टल पर यह प्रमाणित नहीं होगा, तब तक कागजी कार्रवाई आगे नहीं बढ़ेगी। पुरानी गाड़ियों में रेट्रोफिटिंग: यह नियम केवल नए वाहनों के लिए नहीं है। 21 दिसंबर 2018 तक या उससे पहले पंजीकृत सभी पुराने सार्वजनिक वाहनों में भी इन उपकरणों को अनिवार्य रूप से अलग से (रेट्रोफिट) करना होगा। शीर्ष अदालत ने सुझाव दिया कि गाड़ी कंपनियां प्रोडक्शन के वक्त ही फैक्ट्री से इसे इन-बिल्ट लगाकर दें। इसके लिए केंद्र सरकार को सभी ऑटोमोबाइल निर्माताओं से बातचीत कर रिपोर्ट दाखिल करने को कहा गया है। 

स्पीड गवर्नर (SLD) पर राज्यों की ढिलाई से नाराजगी

वाहनों की तेज रफ्तार और ओवरस्पीडिंग को रोकने के लिए लगे स्पीड लिमिटिंग डिवाइस (SLD) को लेकर भी सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों की सुस्ती पर कड़ी फटकार लगाई। केंद्रीय मोटर वाहन नियमों के नियम 118 के बावजूद अधिकांश राज्यों ने अपनी स्टेटस रिपोर्ट दाखिल नहीं की थी। कोर्ट ने सभी राज्यों को 'वाहन' और 'परिवहन' पोर्टल के सटीक आंकड़ों के साथ एक नई विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट कोर्ट में पेश करने का अंतिम आदेश दिया है। 

राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा बोर्ड के लिए 3 महीने का अल्टीमेटम

अदालत इस बात से भी नाराज दिखी कि उसके पिछले आदेशों के बावजूद अब तक राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा बोर्ड (National Road Safety Board) का गठन जमीन पर नहीं हो सका है। केंद्र सरकार को याद दिलाया गया कि मई 2025 में इसके लिए 6 महीने का समय दिया गया था जो कि बीत चुका है। पीठ ने इसे "अंतिम अवसर" करार देते हुए केंद्र को आगामी 3 महीने के भीतर इस बोर्ड का गठन पूरा करने की समय-सीमा तय कर दी है।

क्या है मामला?

यह पूरा मामला कोयंबटूर के एक आर्थोपेडिक सर्जन डॉ. एस. राजशेखरन द्वारा साल 2012 में दायर की गई एक जनहित याचिका (PIL) से जुड़ा हुआ है। उन्होंने देश में होने वाले भीषण सड़क हादसों को रोकने, घायल पीड़ितों को त्वरित इलाज (Post-Accident Care) दिलाने और हाईवे इंफ्रास्ट्रक्चर को सुरक्षित बनाने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। इसी मामले की निरंतर सुनवाई के दौरान सर्वोच्च अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार) का हवाला देते हुए यात्रियों की सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करने के लिए ये कड़े कदम उठाए हैं।

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