सुप्रीम कोर्ट ने हवाई टिकटों की बेतहाशा कीमतों और विसंगतियों पर कड़ा रुख अपनाते हुए केंद्र सरकार को विमान किरायों को तर्कसंगत बनाने और आम जनता को राहत देने का निर्देश दिया है। अदालत ने इस बात पर गहरी चिंता जताई कि एक ही दिन और एक ही रूट पर अलग-अलग एयरलाइंस के किरायों में ज़मीन-आसमान का अंतर है, जहाँ एक एयरलाइन इकॉनमी क्लास के लिए 8,000 रुपए चार्ज कर रही है, वहीं दूसरी एयरलाइन उसी सफर के लिए 18,000 रुपए वसूल रही है।
'एक रूट, एक दिन... फिर किराए में 10,000 रुपए का अंतर क्यों?'
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने सामाजिक कार्यकर्ता एस. लक्ष्मीनारायणन द्वारा दायर एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए यह तीखी टिप्पणी की। कोर्ट ने केंद्र की तरफ से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा, "इस विसंगति के कारण परेशान हो रहे लोगों को कुछ राहत देने का प्रयास करें। यह कैसे मुमकिन है कि एक ही सेक्टर में, एक ही दिन की उड़ान के लिए इकॉनमी क्लास का किराया एक कंपनी 8,000 रुपए रखे और दूसरी 18,000 रुपए वसूल करे?"
एयरलाइंस की 'मनमानी और शोषण' पर उठे सवाल
याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट में पक्ष रखते हुए कहा गया कि त्योहारों, छुट्टियों या मौसम खराब होने जैसी आपातकालीन स्थितियों में एयरलाइंस डायनेमिक प्राइसिंग का गलत फायदा उठाती हैं और किराया 300% तक बढ़ा देती हैं। याचिका में एयरलाइंस की इस कार्यप्रणाली को "अपारदर्शी, अनियमित और शोषणकारी" बताया गया है, जो सीधे तौर पर नागरिकों के समानता और आवागमन के मौलिक अधिकार का उल्लंघन करती है। इसके अलावा, बिना किसी किराए कटौती के फ्री बैगेज अलाउंस को 25 किलो से घटाकर 15 किलो करने पर भी सवाल उठाए गए।
केंद्र सरकार का जवाब: नए कानून पर चल रहा है काम
सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को भरोसा दिया कि सरकार यात्रियों के कल्याण को लेकर गंभीर है और इस समस्या को गैर-विवादास्पद मानकर देख रही है। उन्होंने बताया कि: पुराना एयरक्राफ्ट एक्ट, 1937 अब बदल चुका है। नया भारतीय वायुयान अधिनियम, 2024 (Bhartiya Vayuyan Adhiniyam, 2024) लागू हो चुका है। इस नए कानून के तहत हवाई किरायों और नियमों को नियमित करने के लिए ड्राफ्ट रूल्स (नियमों का मसौदा) बनाने की प्रक्रिया जारी है और विभिन्न पक्षों से परामर्श लिया जा रहा है।
नियमों के पालन में ढिलाई पर नाराजगी
याचिकाकर्ता के वकील वरिष्ठ अधिवक्ता रवींद्र श्रीवास्तव ने दलील दी कि समस्या कानूनों की कमी की नहीं है, बल्कि नियमों को लागू न करने की है। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) के पास पहले से ही अत्यधिक या मनमाना किराया वसूलने वाली कंपनियों पर कार्रवाई करने की शक्तियां हैं, लेकिन उनका उपयोग नहीं किया जा रहा है। कोर्ट ने केंद्र को नए नियमों को जल्द अंतिम रूप देने को कहा है।
अब आगे क्या?
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार द्वारा दाखिल हलफनामे पर याचिकाकर्ता से जवाब मांगा है। इस मामले की अगली विस्तृत सुनवाई 13 जुलाई को तय की गई है। तब तक आम यात्रियों को उम्मीद है कि सरकार कोर्ट की इस फटकार के बाद किराए को कंट्रोल करने के लिए सख्त गाइडलाइंस जारी करेगी।
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