पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में जारी भारी सैन्य संघर्ष और भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत के ऊर्जा क्षेत्र के लिए एक बेहद राहत भरी खबर आई है। कतर के रास लफान टर्मिनल से 20,000 मीट्रिक टन लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस लेकर चला मालवाहक जहाज 'सिमी' MV SYMI सभी खतरों को पार करते हुए सुरक्षित रूप से गुजरात के कच्छ जिले में स्थित कांडला के दीनदयाल पोर्ट पर पहुंच गया है। इस जहाज ने दुनिया के सबसे संवेदनशील और खतरनाक समुद्री मार्ग माने जाने वाले 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) को सफलतापूर्वक पार किया।
होर्मुज स्ट्रेट में ट्रैकिंग बंद कर 'डार्क मोड' में निकला जहाज
पश्चिम एशिया में युद्ध के माहौल के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों पर हमलों का खतरा लगातार बना हुआ है। इस बेहद जोखिम भरे रास्ते को पार करने के लिए 'सिमी' जहाज ने अपनी ट्रैकिंग सिग्नल्स को पूरी तरह बंद कर दिया था और 'डार्क मोड' में सफर तय किया, ताकि दुश्मन की मिसाइलों या ड्रोन हमलों से बचा जा सके। जहाज ने 13 मई 2026 को इस खतरनाक चोक पॉइंट को पार किया था और आखिरकार 16 मई 2026 की देर रात (करीब 11:30 बजे) कांडला बंदरगाह पर सुरक्षित रूप से लंगर डाल दिया।
भारतीय रेस्क्यू और सुरक्षा विभागों का बेहतरीन समन्वय
युद्ध क्षेत्र के इतने करीब होने के बावजूद इस जहाज की सुरक्षित वापसी भारत सरकार के विभिन्न विभागों के बेहतरीन तालमेल से संभव हो सकी है। इस पूरे ऑपरेशन की निगरानी महानिदेशक जहाजरानी (DG Shipping), विदेश मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय और पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा संयुक्त रूप से की जा रही थी। भारतीय नौसेना इस मार्ग से गुजरने वाले भारतीय ऊर्जा जहाजों को सुरक्षा और मार्गदर्शन प्रदान करने में सक्रिय भूमिका निभा रही है। मार्शल आइलैंड्स के झंडे वाले इस टैंकर पर कुल 21 क्रू सदस्य सवार हैं, जिनमें 13 फिलिपिनो और 8 यूक्रेनी नागरिक शामिल हैं, जो पूरी तरह सुरक्षित हैं।
देश में जारी एलपीजी किल्लत के बीच बड़ी संजीवनी
यह खेप ऐसे समय में आई है जब भारत में पिछले कुछ हफ्तों से एलपीजी आपूर्ति बाधित होने के कारण घरेलू रसोई गैस की कमी देखी जा रही थी। भारत अपनी जरूरत का लगभग 90% एलपीजी आयात करता है और इसका एक बड़ा हिस्सा इसी होर्मुज स्ट्रेट मार्ग से होकर गुजरता है। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) ने इस प्रोपेन और ब्यूटेन की खेप को कतर से सुरक्षित खरीदा है। इस संकट से निपटने के लिए भारत सरकार ने घरेलू एलपीजी उत्पादन को भी दैनिक 35,000 टन से बढ़ाकर लगभग 54,000 टन कर दिया है।
रास्ते में है एक और बड़ा जहाज
भारत के लिए राहत का यह सिलसिला यहीं नहीं थमा है। 'सिमी' जहाज के ठीक पीछे वियतनाम के झंडे वाला एक और बड़ा एलपीजी टैंकर 'NV सनशाइन' भी होर्मुज स्ट्रेट को पार कर चुका है। यह जहाज अपने साथ 46,427 टन ईंधन लेकर न्यू मंगलुरु पोर्ट की ओर बढ़ रहा है। इन दोनों जहाजों को मिलाकर भारत को कुल 66,392 मीट्रिक टन रसोई गैस की बड़ी आपूर्ति मिल रही है, जिससे देश में एलपीजी संकट काफी हद तक दूर हो जाएगा।
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