मोदी सरकार ने कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने और देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए पेट्रोल में 30% तक एथेनॉल मिश्रण की तकनीकी तैयारी का एक बड़ा आदेश जारी किया है। भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने 18 मई 2026 को एक आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर E22, E25, E27 और E30 ईंधन के लिए नए मानकों को अधिसूचित कर दिया है। इसका मतलब है कि देश में अब E20 (20% एथेनॉल) के सफल चरण के बाद सरकार अगले चरण की ओर बढ़ रही है, जिसके तहत पेट्रोल में क्रमशः 22%, 25%, 27% और 30% तक एथेनॉल मिलाया जा सकेगा।
पश्चिम एशिया संकट और महंगे क्रूड ऑयल के बीच उठाया कदम
यह बड़ा फैसला ऐसे समय में आया है जब मिडिल ईस्ट में भू-राजनीतिक तनाव और ईरान-अमेरिका संघर्ष के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की सप्लाई चेन प्रभावित हुई है और कीमतें अस्थिर बनी हुई हैं। भारत अपनी जरूरत का करीब 85% कच्चा तेल आयात करता है। इस भारी-भरकम आयात बिल को घटाने और देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए केंद्र सरकार ने एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम की रफ्तार तेज कर दी है।
BIS ने अधिसूचित किए नए मानक भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) द्वारा जारी किए गए नए नोटिफिकेशन के तहत उच्च एथेनॉल मिश्रण वाले निम्नलिखित ईंधनों की तकनीकी विशिष्टताओं (Technical Specifications) को मंजूरी दी गई है:
E22: 22% एथेनॉल और 78% पेट्रोल का मिश्रण
E25: 25% एथेनॉल और 75% पेट्रोल का मिश्रण
E27: 27% एथेनॉल और 73% पेट्रोल का मिश्रण
E30: 30% एथेनॉल और 70% पेट्रोल का मिश्रण
इसे तत्काल प्रभाव से पूरे देश में अनिवार्य नहीं किया
यह नए नियम 15 मई 2026 से प्रभावी हो गए हैं। हालांकि, ध्यान देने वाली बात यह है कि सरकार ने इसे तत्काल प्रभाव से पूरे देश में अनिवार्य नहीं किया है, बल्कि बाजार में इसे धीरे-धीरे उतारने के लिए कानूनी और तकनीकी रास्ता साफ कर दिया है।
देश और आम जनता पर क्या होगा इसका असर?
कच्चे तेल के आयात में भारी कमी: पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा बढ़ने से भारत को हर साल अरबों डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार बचाने में मदद मिलेगी। सरकार के मुताबिक, पिछले 10 वर्षों में एथेनॉल ब्लेंडिंग के कारण देश ने ₹1.40 लाख करोड़ से अधिक की विदेशी मुद्रा बचाई है।
किसानों की बढ़ेगी आमदनी: एथेनॉल मुख्य रूप से गन्ना, मक्का, और खराब अनाज जैसे कृषि उत्पादों से तैयार किया जाता है। एथेनॉल की मांग बढ़ने से सीधे तौर पर किसानों को उनके उत्पादों का बेहतर दाम मिलेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
प्रदूषण पर लगाम: नीति आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक, एथेनॉल युक्त ईंधन साधारण पेट्रोल के मुकाबले काफी कम कार्बन उत्सर्जन करता है। इससे बड़े शहरों में वायु प्रदूषण को कम करने में बड़ी मदद मिलेगी।
वाहनों की इंजन तकनीक में बदलाव: वर्तमान में भारतीय सड़कों पर E20 अनुकूल (Compliant) वाहन चल रहे हैं। E30 पेट्रोल का इस्तेमाल करने के लिए ऑटोमोबाइल कंपनियों को अपने इंजनों में तकनीकी सुधार करने होंगे। कार निर्माता कंपनियां अब ऐसे 'फ्लेक्स-फ्यूल' वाहनों के परीक्षण में जुट गई हैं जो उच्च एथेनॉल मिश्रण पर भी आसानी से चल सकें।
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