loader
The Haryana Story | ग्लोबल मार्केट में भारत को महाझटका: टॉप-100 कंपनियों से सभी भारतीय दिग्गज बाहर, रिलायंस-TCS औंधे मुंह गिरे

ग्लोबल मार्केट में भारत को महाझटका: टॉप-100 कंपनियों से सभी भारतीय दिग्गज बाहर, रिलायंस-TCS औंधे मुंह गिरे

दुनिया के एलीट क्लब से बाहर हुआ भारत, टॉप-100 में एक भी भारतीय कंपनी नहीं, TCS की रैंकिंग में ऐतिहासिक गिरावट

AI-Generated Image

भारतीय शेयर बाजार में जारी चौतरफा गिरावट के कारण कई वर्षों में पहली बार दुनिया की टॉप-100 सबसे मूल्यवान कंपनियों की सूची से सभी भारतीय कंपनियां बाहर हो गई हैं। ग्लोबल मार्केट्स में रिलायंस इंडस्ट्रीज, एचडीएफसी बैंक और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) जैसी दिग्गज कंपनियों के बाजार पूंजीकरण (Market Cap) में भारी सेंध लगी है, जिससे भारत ने इस एलीट क्लब से अपनी चमक पूरी तरह खो दी है।

कंपनियों की मार्केट वैल्यू को बुरी तरह प्रभावित

भारतीय कॉर्पोरेट जगत और निवेशकों के लिए वैश्विक मोर्चे से बेहद निराशाजनक खबर है। पिछले कुछ समय से भारतीय शेयर बाजार पर हावी 'बियर्स' (मंदी के रुख) और लगातार जारी बिकवाली (selling out) ने देश की सबसे बड़ी कंपनियों की मार्केट वैल्यू को बुरी तरह प्रभावित किया है। 2025 की शुरुआत तक भारत की तीन बड़ी कंपनियां वैश्विक टॉप-100 में मजबूती से शामिल थीं, लेकिन अब टॉप-100 की लिस्ट में एक भी भारतीय कंपनी अपनी जगह बचाने में कामयाब नहीं हो सकी है।

भारतीय दिग्गजों की रैंकिंग में ऐतिहासिक गिरावट

ग्लोबल मार्केट कैपिटलाइजेशन इंडेक्स के अनुसार, देश के बड़े सेक्टर्स की रैंकिंग में आए बदलावों की विस्तृत स्थिति इस प्रकार है:

रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL): देश की सबसे मूल्यवान कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज, जो 2025 की शुरुआत में वैश्विक स्तर पर 57वें स्थान पर थी, अब लुढ़ककर सीधे 106वें स्थान पर आ गई है।

HDFC बैंक: भारत के इस सबसे बड़े निजी बैंक की हालत और भी खराब हुई है। वर्ष 2025 की शुरुआत में 97वें पायदान पर रहने वाला यह बैंक अब गिरकर 190वें स्थान पर पहुंच चुका है। 

भारती एयरटेल: टेलीकॉम सेक्टर की इस दिग्गज कंपनी की चाल भी बिगड़ गई है। 2026 की शुरुआत में 164वें रैंक पर काबिज एयरटेल अब फिसलकर 202वें स्थान पर पहुंच गई है।

TCS और IT सेक्टर: सबसे बड़ी गिरावट सूचना प्रौद्योगिकी (IT) सेक्टर में दर्ज की गई है। देश की सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर निर्यातक कंपनी TCS (टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज), जो 2025 की शुरुआत में 84वें नंबर पर थी, अब भारी गिरावट के साथ 314वें स्थान पर आ गई है। वहीं, इन्फोसिस भी लुढ़ककर सीधे 590वें स्थान पर जा चुकी है।

अन्य बड़े नाम: सरकारी बैंकिंग क्षेत्र का दिग्गज स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) 276वें और ICICI बैंक 274वें स्थान पर खिसक गए हैं।

$100 बिलियन क्लब से भी कई कंपनियां बाहर

बाजार में मंदी का आलम यह है कि भारत में 100 अरब डॉलर (लगभग ₹8.3 लाख करोड़) से अधिक मार्केट कैप वाली एलीट कंपनियों का कुनबा भी सिकुड़ गया है। अब इस लिस्ट में केवल 3 कंपनियां रिलायंस इंडस्ट्रीज ($198 बिलियन), एचडीएफसी बैंक ($124 बिलियन), और भारती एयरटेल ($113 बिलियन) ही बची हैं। टीसीएस, एसबीआई और आईसीआईसीआई बैंक इस क्लब से बाहर हो चुके हैं। इसके अलावा, ग्लोबल टॉप-500 कंपनियों में भारत की संख्या 15 से घटकर अब सिर्फ 9 रह गई है।

भारतीय कंपनियों की रैंकिंग में गिरावट एक नजर में

कंपनी का नाम     2025 की रैंक  वर्तमान वैश्विक रैंक    वर्तमान स्थिति

रिलायंस इंडस्ट्रीज 57वां                     106वां              शामिल  ($198B)

HDFC बैंक        97वां                      190वां             शामिल ($124B)

भारती एयरटेल   164वां (2026)          202वां              शामिल ($113B)

TCS                84वां                        314वां              बाहर 

CICI बैंक         215वां (2026)           274वां               बाहर

SBI                 231वां (2026)           276वां               बाहर

इन्फोसिस         198वां                       590वां               बाहर

क्यों डूब रहा है भारतीय बाजार?

गिरावट के 5 बड़े कारण ग्लोबल ब्रोकरेज फर्मों और वित्तीय विश्लेषकों के मुताबिक, भारतीय बाजारों पर चौतरफा दबाव के मुख्य इस प्रकार हैं : 

विदेशी निवेशकों की ताबड़तोड़ सेलिंग आउट : विदेशी संस्थागत निवेशक भारतीय बाजार के ऊंचे वैल्युएशन के कारण लगातार अपने पैसे निकाल रहे हैं और वैश्विक बाजारों का रुख कर रहे हैं।

वैश्विक ब्रोकरेज फर्मों द्वारा रेटिंग घटाना: मार्च से मई के बीच UBS, मॉर्गन स्टेनली, नोमुरा, जेपी मॉर्गन, HSBC, गोल्डमैन सैक्स और सिटी बैंक जैसी दुनिया की शीर्ष एजेंसियों ने भारतीय बाजार को 'डाउनग्रेड' कर दिया है, जिससे बड़े निवेशकों का भरोसा डिगा है।

कच्चे तेल में लगी आग: पश्चिम एशिया (अमेरिका-ईरान-इजराइल संघर्ष) में जारी तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 100 से 109 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल चुकी हैं। भारत अपनी जरूरत का 80% से अधिक तेल आयात करता है, जिससे देश में महंगाई और कॉरपोरेट मार्जिन पर दबाव बढ़ गया है।

रुपए का ऐतिहासिक निचला स्तर: अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया लगातार कमजोर होकर 92-96 प्रति डॉलर के दायरे में कारोबार कर रहा है, जिससे विदेशी निवेशकों का रिटर्न कम हो रहा है।

AI सेक्टर में सीमित एक्सपोजर: जहां दुनिया भर में अमेरिकी टेक्नोलॉजी कंपनियों जैसे एनवीडिया - $5.33 ट्रिलियन, अल्फाबेट, एप्पल का दबदबा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) क्रांति के कारण बढ़ रहा है, वहीं भारतीय आईटी कंपनियों का इस हाई-ग्रोथ सेक्टर में एक्सपोजर बेहद सीमित है। 

Join The Conversation Opens in a new tab
×