हरियाणा सरकार ने राज्य की स्कूली शिक्षा व्यवस्था में सुधार और छात्रों में नैतिक मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए दो बेहद महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। शिक्षा मंत्री की इस नई घोषणा के बाद अब प्रदेश के सभी सरकारी स्कूलों के नियमों में बड़ा बदलाव होने जा रहा है।
स्कूलों में अनिवार्य होगा 'श्रमदान पीरियड'
इस फैसले का उद्देश्य विद्यार्थियों में स्वच्छता, आत्मनिर्भरता और श्रम के प्रति सम्मान की भावना पैदा करना है। इस विशेष पीरियड के दौरान छात्र अपने क्लासरूम, स्कूल परिसर की सफाई और पर्यावरण संरक्षण जैसी गतिविधियों में स्वेच्छा से भाग लेंगे। यह पीरियड स्कूल टाइम टेबल का एक नियमित हिस्सा होगा।
क्लासरूम में शिक्षकों के मोबाइल ले जाने पर पूर्ण बैन
अब कोई भी शिक्षक या शिक्षिका क्लास में पढ़ाते समय अपने साथ स्मार्टफोन या मोबाइल फोन नहीं ले जा सकेंगे। क्लासरूम में मोबाइल के इस्तेमाल से शिक्षकों का ध्यान भटकता है और छात्रों की पढ़ाई प्रभावित होती है। सभी शिक्षकों को कक्षा शुरू होने से पहले अपने मोबाइल फोन स्टाफ रूम या प्रिंसिपल ऑफिस में जमा कराने होंगे। केवल आपातकालीन स्थिति में ही विशेष अनुमति दी जाएगी।
फैसले का मुख्य लक्ष्य
क्लासरूम को 'नो-मोबाइल जोन' बनाकर शिक्षा के स्तर और बच्चों की एकाग्रता को बेहतर करना है। श्रमदान के जरिए बच्चों को सामाजिक जिम्मेदारी सिखाना और स्कूलों को स्वच्छ बनाना। यह नियम राज्य के सभी प्राथमिक, माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक सरकारी स्कूलों पर समान रूप से लागू होगा। इस नई व्यवस्था को पूरी तरह से लागू करने के लिए शिक्षा विभाग जल्द ही सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को लिखित गाइडलाइंस जारी करने जा रहा है।
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