देश में एक बार फिर किसान आंदोलन की आहट तेज हो गई है, क्योंकि संयुक्त किसान मोर्चा ने 27 मई से 31 मई 2026 तक राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन का बड़ा ऐलान किया है। संगठन ने कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (CACP) की रिपोर्ट और सरकार के हालिया न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) आदेश को "धोखाधड़ीपूर्ण" और "किसान विरोधी" करार दिया है। इस देशव्यापी आंदोलन के दौरान किसान संगठन और कृषि श्रमिक गांव-गांव में सरकारी एमएसपी आदेशों की प्रतियां जलाकर अपना रोष प्रकट करेंगे।
मुख्य मांगें और नाराजगी की वजहें
किसानों की नाराजगी केवल एमएसपी दरों तक सीमित नहीं है, बल्कि खेती से जुड़ी बढ़ती लागतों ने उनके संकट को और गहरा कर दिया है। एसकेएम का आरोप है कि केंद्र सरकार ने 2026-27 खरीफ सत्र के लिए स्वामीनाथन आयोग के C2+50% फार्मूले (व्यापक लागत + 50% मुनाफा) के बजाय A2+FL+50% के आधार पर मूल्य तय किया है। किसान नेताओं के अनुसार, धान का एमएसपी 2,441 रुपए प्रति क्विंटल घोषित किया गया है, जबकि सही फार्मूले के हिसाब से यह 3,243 रुपए होना चाहिए था। इससे किसानों को सीधे 802 रुपए प्रति क्विंटल का नुकसान हो रहा है। कुल 20 खरीफ फसलों पर किसानों को लगभग 3 लाख करोड़ रुपए का घाटा उठाना पड़ सकता है।
देश भर में डीजल, बिजली और सिंचाई की लागत लगातार बढ़ रही है। इसके साथ ही रासायनिक खादों (उर्वरक) की भारी कमी और उसकी कथित कालाबाजारी पर सरकार की निष्क्रियता ने किसानों के गुस्से को और भड़का दिया है। एमएसपी घोषित होने के बावजूद धरातल पर मजबूत सरकारी खरीद तंत्र की कमी है, जिससे छोटे किसानों को अपनी उपज मजबूरी में कम दामों पर बिचौलियों को बेचनी पड़ रही है।
गांव-गांव तक आंदोलन तेज करने की रणनीति
पहले दिल्ली की सीमाओं पर ऐतिहासिक धरना दे चुके संयुक्त किसान मोर्चा ने इस बार रणनीति बदलते हुए आंदोलन को सीधे ग्रामीण स्तर पर ले जाने के संकेत दिए हैं। 27 से 31 मई के बीच राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन के तहत सभी राज्यों में जिला और ग्राम स्तर पर किसान एकजुट होकर केंद्र की मूल्य नीतियों की प्रतियां फूंकेंगे। एसकेएम का आरोप है कि सरकार विश्व व्यापार संगठनऔर अमेरिकी व्यापार दबाव के आगे घुटने टेक रही है, जिससे देश के डेयरी, पोल्ट्री और कृषि क्षेत्रों का नुकसान हो रहा है। आंदोलनकारियों ने दोहराया है कि जब तक सभी फसलों की खरीद पर कानूनी गारंटी वाला एमएसपी कानून नहीं बनता और किसानों को पूर्ण कर्जमुक्ति नहीं मिलती, तब तक यह लड़ाई अलग-अलग चरणों में जारी रहेगी।
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