loader
The Haryana Story | 'ओपन सीक्रेट' किताब के दावों की खुली पोल, रणजीत चौटाला बोले-1984 में इंदिरा गांधी की हत्या हुई, 1987 में मुलाकात कैसे संभव?

'ओपन सीक्रेट' किताब के दावों की खुली पोल, रणजीत चौटाला बोले-1984 में इंदिरा गांधी की हत्या हुई, 1987 में मुलाकात कैसे संभव?

अभय चौटाला के आरोपों पर रणजीत सिंह का पलटवार: '1982 में तो मैं विधायक ही नहीं था, सरकार कैसे गिराता?'

पूर्व कैबिनेट मंत्री रणजीत सिंह चौटाला ने रविवार को पंचकूला स्थित रेड बिशप में प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान रणजीत सिंह सिंह चौटाला ने अभय चौटाला के उस बयान पर पलटवार किया] जिसमें उन्होंने सरकार गिराने के आरोप लगाए है। पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय चौधरी देवीलाल की सरकार को कई बार गिरने के अभय चौटाला के आरोपों को रणजीत सिंह चौटाला ने निराधार बताया है। रणजीत चौटाला ने कहा अभय सिंह चौटाला ने मुझ पर आरोप लगाए हैं 1982 और 1987 में चौधरी देवीलाल और 1991 में चौधरी देवीलाल की सरकार रणजीत चौटाला गिराई।

1982 में मैं विधायक ही नहीं था

रणजीत सिंह चौटाला ने कहा मैं राजनीति में पहली बार 1987 में आया था फिर उसके बाद विधायक बना था। रणजीत सिंह चौटाला ने कहा 1982 में मैं विधायक ही नहीं था। उन्होंने कहा अभय सिंह चौटाला आईबी (इंटेलिजेंस ब्यूरो) के पूर्व चीफ़ मलोय कृष्ण धर की किताब "ओपन सीक्रेट" का हवाला दे रहे हैं, जबकि उस किताब में ये जानकारी पूरी तरीके से गलत छपी हुई है। इस ओपन सीक्रेट किताब में दावा किया गया है 1987 में देवीलाल और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की मुलाकात हुई थी, जबकि इंदिरा गांधी की हत्या 1984 में हो चुकी थी। रणजीत सिंह चौटाला ने कहा जब इंदिरा गांधी की हत्या पहले ही हो चुकी थी ऐसे में 1987 मुलाकात कैसे हो सकती है।

1987 से पहले हम तीनों हाउस के सदस्य ही नहीं थे

किताब में चौधरी देवीलाल और इंदिरा गांधी के लिफ्ट में मिलने की बात कही गई है, जिसके पीछे हरियाणा में चौधरी देवीलाल की आगामी जीत को रोकना बताया गया है। इस किताब में मेरा बनारसी दास गुप्ता और खुर्शीद अहमद का जिक्र है। रणजीत चौटाला ने कहा 1987 से पहले हम तीनों हाउस के सदस्य ही नहीं थे। किताब में दावा किया गया है उस वक्त एनटी रामा राव की दक्षिण भारत और हरियाणा में देवीलाल की आंधी चल रही थी। हरियाणा में चौधरी देवीलाल की आंधी रोकने के लिए पूर्व इंटेलिजेंट ब्यूरो धर की जिम्मेवारी लगाई गई थी रणजीत सिंह चौटाला ने कहा 1984 और 1987 में कोई भी विधायक नहीं बिका था।

लोकदल के 7 विधायक थे जिनको ओम प्रकाश चौटाला ने खुद चुनाव हरवाया था

रणजीत सिंह चौटाला ने आगे कहा कि महम कांड के चलते दबाव में ओपी चौटाला को इस्तीफा देना पड़ा था। रणजीत चौटाला ने कहा तब तत्कालीन प्रधानमंत्री वीपी सिंह ने चौधरी देवीलाल को नैतिकता के नाम पर ओमप्रकाश चौटाला से इस्तीफा देने को कहा था, इसके बाद बनारसी दास गुप्ता हरियाणा के मुख्यमंत्री बने थे। इसके 4 महीने के बाद ओम प्रकाश चौटाला दोबारा हरियाणा के मुख्यमंत्री बने थे और इसके बाद हुकुम सिंह को सीएम बनाया गया वे साढ़े तीन महीने रहे और उसके फिर ओम प्रकाश चौटाला सीएम बने थे और विधानसभा में बहुमत साबित करने से पहले त्यागपत्र दे दिया था। रणजीत सिंह चौटाला ने कहा 1982 में चौधरी चरण सिंह और चौधरी देवीलाल जब एक साथ थे उस वक्त लोकदल के 7 विधायक थे जिनको ओम प्रकाश चौटाला ने खुद चुनाव हरवाया था।

अभय चौटाला ने उन पर जो आरोप लगाए है वो पूरी तरह बेबुनियाद

इसी के चलते 1982 में कांग्रेस की 36 सीट आई थी और लोकदल की 34  सीट आई थी और बहुमत लोकदल को नहीं मिला था। रणजीत चौटाला ने कहा1982 में लोकदल के 6 विधायक जो चौधरी चरण सिंह ग्रुप के थे उनमें ओम प्रकाश राणा, सतबीर मलिक, बलबीर ग्रेवाल, कंवल सिंह, ओमप्रकाश बेरी और चंद्रावती थे जिनको ओपी चौटाला ने ही हरवाया था जिसके चलते चौधरी देवीलाल को बहुमत नहीं मिला था। देश के महत्वपूर्ण पदों पर बैठे अधिकारियों को बिना तथ्यों सहित ऐसी किताबें नहीं लिखनी चाहिए। रणजीत सिंह चौटाला ने कहा अभय चौटाला ने उन पर जो आरोप लगाए है वो पूरी तरह बेबुनियाद है।

Join The Conversation Opens in a new tab
×