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The Haryana Story | 'मास्टर जी स्पेयर पार्ट नहीं!'...हाई कोर्ट की फटकार, 20 साल बाद गेस्ट टीचर्स की ऐतिहासिक जीत, 2 महीने में होंगे रेगुलर

'मास्टर जी स्पेयर पार्ट नहीं!'...हाई कोर्ट की फटकार, 20 साल बाद गेस्ट टीचर्स की ऐतिहासिक जीत, 2 महीने में होंगे रेगुलर

हाई कोर्ट ने हरियाणा सरकार को दिया 2 महीने का अल्टीमेटम

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हरियाणा के हजारों गेस्ट टीचर्स के लिए न्याय की दहलीज पर आखिरकार इंसाफ का दरवाजा खुल गया है। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए 20 साल से 'स्टॉप-गैप' व्यवस्था के नाम पर चल रहे शिक्षकों के शोषण को खत्म करने का आदेश दिया है। हाई कोर्ट ने कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि "मास्टर जी कोई 'स्पेयर पार्ट' नहीं हैं", जिन्हें जरूरत पड़ने पर इस्तेमाल किया जाए और फिर छोड़ दिया जाए। अदालत ने हरियाणा सरकार को सख्त निर्देश दिए हैं कि अगले दो महीने के भीतर सभी पात्र गेस्ट टीचरों को नियमितकिया जाए।

अब तक का सबसे बड़ा फैसला

यह फैसला ऐतिहासिक Madan Singh जजमेंट (2026) और सुप्रीम कोर्ट के हालिया रुख के बाद कर्मचारियों के हक में आया अब तक का सबसे बड़ा फैसला माना जा रहा है। इस आदेश के बाद वर्ष 2005 से न्याय की गुहार लगा रहे हजारों शिक्षकों का '20 साल का वनवास' समाप्त होने जा रहा है। हाई कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि रिक्त पदों पर 20 साल से पढ़ा रहे हैं तो हकदार हैं।

रिप्लेस, डोंट रेगुलराइज" कल्चर पर भारी नाराजगी

मामले की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट की बेंच ने साफ किया कि जो शिक्षक स्वीकृत और रिक्त पदों पर पिछले दो दशकों से निरंतर अपनी सेवाएं दे रहे हैं, वे स्थायी नौकरी के पूरी तरह हकदार हैं। कोर्ट ने सार्वजनिक संस्थानों में लगातार काम ले रहे कर्मचारियों को हटाकर दूसरे अस्थायी कर्मचारी रखने की नीति ("रिप्लेस, डोंट रेगुलराइज" कल्चर) पर भारी नाराजगी जताई। अदालत ने कहा "अगर शैक्षणिक आवश्यकता कभी खत्म नहीं हुई, छात्र वही हैं, कक्षाएं निरंतर चल रही हैं और काम का स्वरूप स्थायी है, तो शिक्षकों को बुनियादी सेवा सुरक्षा और नियमितीकरण के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता।"

योग्य शिक्षकों के भविष्य को सुरक्षित किया जाना अनिवार्य

2014 की नियमितीकरण पॉलिसी पर लगी मुहर अदालत ने स्पष्ट किया कि जून 2014 में बनाई गई नियमितीकरण नीतियों की वैधता के आधार पर योग्य शिक्षकों के भविष्य को सुरक्षित किया जाना अनिवार्य है। इसके तहत सुप्रीम कोर्ट के तय मानकों के अनुसार, जो शिक्षक 10 वर्ष या उससे अधिक की निरंतर सेवा पूरी कर चुके हैं और निर्धारित योग्यता (जैसे HTET/B.Ed.) रखते हैं, उन्हें परमानेंट किया जाना चाहिए। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया है कि यदि सीधे तौर पर नियमित पद खाली नहीं हैं, तो सरकार को इनके समायोजन के लिए अतिरिक्त पद सृजित करने होंगे।

डॉ. अजय लोहान का बयान

राष्ट्र निर्माताओं की जीत इस ऐतिहासिक जीत पर गेस्ट टीचर्स एसोसिएशन के मीडिया प्रभारी डॉ. अजय लोहान ने खुशी जताते हुए इसे 'सच्चे राष्ट्र निर्माताओं' के संघर्ष की जीत बताया है। डॉ. लोहान ने अपने बयान में कहा "यह संघर्ष बेहद लंबा और पीड़ादायी था, लेकिन कोर्ट के इस फैसले ने साबित कर दिया कि न्याय में देरी हो सकती है, अंधेर नहीं।"

सरकार को अपना वह पुराना वादा तुरंत पूरा करना चाहिए

बीजेपी सरकार पूरा करे 2014 का वादाहरियाणा की वर्तमान बीजेपी सरकार ने 2014 के चुनावों के दौरान गेस्ट टीचरों को नियमित करने का वादा किया था। अब हाई कोर्ट के इस ऐतिहासिक आदेश के बाद सरकार को अपना वह पुराना वादा तुरंत पूरा करना चाहिए।"इससे पहले भी हरियाणा सरकार ने हरियाणा गेस्ट टीचर्स सर्विस एक्ट, 2019 बनाकर गेस्ट टीचर्स की नौकरी को 58 साल तक सुरक्षित किया था। अब कोर्ट के आदेश से 'गेस्ट' का यह अस्थायी टैग हमेशा के लिए हट जाएगा।

शिक्षकों में जश्न का माहौल, सरकार से जल्द लागू करने की उम्मीद

हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ा रहे हजारों गेस्ट टीचर्स के परिवारों में खुशी की लहर दौड़ गई है। संघ के पदाधिकारियों और शिक्षकों ने इस फैसले का दिल से स्वागत किया है। गेस्ट टीचर्स को पूरी उम्मीद है कि हरियाणा सरकार कोर्ट की गरिमा का सम्मान करते हुए बिना किसी देरी के दो महीने की तय समय सीमा के भीतर इस नीति को जमीनी स्तर पर लागू कर देगी ताकि लंबे समय से लंबित सभी सेवा लाभ और न्यूनतम वेतनमान का लाभ शिक्षकों को मिल सके।

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