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The Haryana Story | सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: चुनाव आयोग की कार्रवाई वैध, 'SIR' अवैध नहीं, 4 हफ्ते में केंद्र को भेजी जाए संदिग्ध नामों की लिस्ट

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: चुनाव आयोग की कार्रवाई वैध, 'SIR' अवैध नहीं, 4 हफ्ते में केंद्र को भेजी जाए संदिग्ध नामों की लिस्ट

शीर्ष अदालत ने साफ किया है कि चुनाव आयोग ने कानून के दायरे में रहकर काम किया है और उसकी 'स्टेटस इमेज रिपोर्ट' (SIR) किसी भी तरह से अवैध नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूचियों के शुद्धीकरण और संदिग्ध नामों को हटाने की प्रक्रिया को पूरी तरह वैध करार दिया है। शीर्ष अदालत ने साफ किया है कि चुनाव आयोग ने कानून के दायरे में रहकर काम किया है और उसकी 'स्टेटस इमेज रिपोर्ट' (SIR) किसी भी तरह से अवैध नहीं है। इसके साथ ही कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया है कि वह मतदाता सूची से हटाए गए संदिग्ध नामों की अंतिम सूची अगले 4 हफ्तों के भीतर केंद्र सरकार को सौंपे।

कानून के मुताबिक हुई कार्रवाई

मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने याचिकाकर्ताओं की उन आपत्तियों को खारिज कर दिया, जिसमें चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए गए थे। अदालत ने कहा कि निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करना चुनाव आयोग का संवैधानिक कर्तव्य है। आयोग ने फर्जी या दोहरे मतदाताओं के नाम हटाने के लिए जो भी कदम उठाए हैं, वे पूरी तरह से तय कानूनी प्रक्रियाओं के अनुकूल हैं।

4 हफ्ते में रिपोर्ट सौंपने के निर्देश

अदालत ने इस मामले को अंतिम रूप देते हुए केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को समन्वय बनाने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि मतदाता सूची के सत्यापन अभियान के दौरान जितने भी संदिग्ध या अवैध नाम हटाए गए हैं, उनका पूरा डेटाबेस तैयार किया जाए। इस संकलित डेटा को आगामी 4 हफ्तों के भीतर केंद्र सरकार के संबंधित मंत्रालय को समीक्षा और आगे की कार्रवाई के लिए भेजा जाए।

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, देश में पारदर्शी चुनाव कराने के उद्देश्य से चुनाव आयोग ने देशव्यापी स्तर पर मतदाता सूचियों को अपडेट करने का अभियान चलाया था। इस प्रक्रिया के तहत तकनीकी और धरातलीय सत्यापन के बाद लाखों की संख्या में संदिग्ध, स्थानांतरित और मृत मतदाताओं के नाम हटाए गए थे। इस कार्रवाई के खिलाफ कुछ पक्षों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था और आयोग की स्टेटस रिपोर्ट (SIR) को चुनौती दी थी, जिसे अब सुप्रीम कोर्ट ने पूरी तरह से खारिज कर दिया है।

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