पंचकूला के रामगढ़ में हाई-कैलिबर बम का सफल परीक्षण हुआ है, जिसके तेज धमाके से करीब 6 किलोमीटर दूर तक के घरों की खिड़कियां और दरवाजे हिल गए। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) की महत्वपूर्ण इकाई टर्मिनल बैलिस्टिक रिसर्च लेबोरेटरी (TBRL) द्वारा आयोजित यह परीक्षण भारतीय वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारियों की सीधी निगरानी में पूरी तरह सफल रहा। इस महाधमाके के बाद आसमान में करीब डेढ़ किलोमीटर (1.5 KM) की ऊंचाई तक मलबे और धुएं का गुबार देखा गया।
सेना के आला अफसरों की मौजूदगी में DRDO का बड़ा परीक्षण
हरियाणा के पंचकूला जिला स्थित रामगढ़ की टीबीआरएल (TBRL) फायरिंग रेंज में रक्षा क्षेत्र का एक बड़ा और बेहद संवेदनशील परीक्षण सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। यह परीक्षण रविवार सुबह करीब 11:20 बजे भारतीय वायुसेना (Indian Air Force) के शीर्ष अधिकारियों और वैज्ञानिकों की देखरेख में किया गया। हाई-कैलिबर बम का ब्लास्ट इतना जोरदार था कि इसकी गूंज से कई किलोमीटर का इलाका दहल उठा।
आसमान में 1.5 किलोमीटर ऊपर तक उड़े बम के छर्रे
टर्मिनल बैलिस्टिक्स रिसर्च लेबोरेटरी (TBRL) के वैज्ञानिकों द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, इस उच्च क्षमता वाले बम के फटने के बाद इसके टुकड़े (स्प्लिंटर्स) और मलबे हवा में करीब डेढ़ किलोमीटर (1.5 KM) ऊपर तक गए। वहीं जमीन पर ब्लास्ट पॉइंट से चारों तरफ 2 किलोमीटर के दायरे में इसके कण और छर्रे फैलने की आशंका जताई गई थी, जिसके कारण सुरक्षा के बेहद कड़े इंतजाम किए गए थे।
6 किलोमीटर दूर तक महसूस किए गए झटके
जैसे ही रेंज के प्रतिबंधित जंगली क्षेत्र में बम को एक्टिव किया गया, एक गगनभेदी आवाज के साथ जमीन हिल गई। धमाके का असर इतना व्यापक था कि परीक्षण स्थल से करीब 6 किलोमीटर दूर तक स्थित रिहायशी इलाकों में लोगों के घरों के दरवाजे और खिड़कियों के शीशे अचानक खड़खड़ाने लगे। आसमान में दूर-दूर से धुएं का एक विशाल गुबार साफ देखा जा सकता था।
प्रशासन ने लागू किया था 'शॉर्ट लॉकडाउन', दो गांव बने थे डेंजर जोन
धमाके की गंभीरता और मलबे के खतरे को देखते हुए पंचकूला जिला प्रशासन और पुलिस ने पहले ही कड़ा सुरक्षा घेरा तैयार किया था:स्प्लिंटर डेंजर जोन: रेंज से सटे भानू और बिल्ला गांवों को 'स्प्लिंटर डेंजर जोन' घोषित कर पूरी तरह सील कर दिया गया था। परीक्षण के दौरान सुबह 10:30 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक लोगों को अपने घरों के अंदर रहने और मवेशियों को बांधकर रखने की सख्त हिदायत दी गई थी। सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पुलिस ने स्थानीय गुरुद्वारों और मंदिरों के लाउडस्पीकरों से गांवों में मुनादी करवाई थी। इसके अलावा असरेवाली, नाग्गल, मोगीचंद, किशनगढ़ और नजदीकी आईटीबीपी (ITBP) कैंप को भी अलर्ट पर रखा गया था।
पूरी तरह सुरक्षित रहा ट्रायल, कोई नुकसान नहीं
भारी सुरक्षा तैयारियों के चलते इस हाई-प्रोफाइल ट्रायल के दौरान किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना या नुकसान की खबर नहीं है। हालांकि धमाके के बाद कुछ समय के लिए आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में कौतूहल और हल्के डर का माहौल देखा गया, लेकिन वैज्ञानिकों और सुरक्षा अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह देश की सैन्य शक्ति को मजबूत करने के लिए किया गया एक सामान्य और पूर्व-निर्धारित वैज्ञानिक परीक्षण था।
क्या है TBRL और क्यों होते हैं ये टेस्ट?
टीबीआरएल की स्थापना वर्ष 1968 में हुई थी, जिसका मुख्य मुख्यालय चंडीगढ़ में है और 5,000 एकड़ में फैली इसकी मुख्य फायरिंग रेंज पंचकूला के रामगढ़ में स्थित है। कार्य: डीआरडीओ की यह अहम प्रयोगशाला आधुनिक मिसाइलों, हाई-एक्सप्लोसिव वारहेड्स, शॉक वेव्स और आधुनिक हथियार प्रणालियों के डिजाइन और मारक क्षमता (लेथैलिटी स्टडी) पर रिसर्च करती है।
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