हरियाणा में संगठित अपराध और गैंगस्टरों के सफाए के लिए हरियाणा पुलिस ने एक बेहद वैज्ञानिक और आधुनिक 'क्राइम इंटेलिजेंस मॉडल' तैयार किया है। इस नई रणनीति के तहत राज्य के सबसे संवेदनशील जिलों में पिछले 10 वर्षों के दौरान जघन्य अपराधों (जैसे हत्या, डकैती, रंगदारी और अपहरण) में संलिप्त रहे अपराधियों की चौबीसों घंटे डिजिटल निगरानी की जाएगी।
इसके लिए विशेष तौर पर गठित रोहतक-झज्जर-सोनीपत-फरीदाबाद (RJSF) यूनिट को एक्टिव कर दिया गया है। इस ऐतिहासिक पहल और राज्य की कानून-व्यवस्था की समीक्षा के लिए पंचकूला के सेक्टर-6 स्थित पुलिस मुख्यालय में एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई गई। हरियाणा के पुलिस महानिदेशक (DGP) अजय सिंघल की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADGP), पुलिस महानिरीक्षक (IG), पुलिस आयुक्त (CP) और जिला पुलिस अधीक्षकों (SP) सहित पुलिस महकमे के तमाम वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
RJSF यूनिट करेगी अपराधियों का 'डिजिटल पोस्टमार्टम'
हरियाणा पुलिस का यह नया मॉडल पूरी तरह से डेटा और एडवांस सर्विलांस तकनीक पर आधारित है। RJSF यूनिट ने रोहतक, झज्जर, सोनीपत और फरीदाबाद जिलों के उन तमाम अपराधियों का एक विस्तृत और अत्याधुनिक डेटाबेस तैयार किया है, जो पिछले एक दशक से गंभीर अपराधों में शामिल रहे हैं। जमानत पर बाहर आए या जेल से संचालित हो रहे गैंगस्टरों की हर हरकत पर 24 घंटे नजर रखी जा रही है। तकनीक की मदद से अपराधियों के मूवमेंट को ट्रैक किया जाएगा ताकि वे किसी नई वारदात को अंजाम न दे सकें। गैंगस्टरों के मददगारों, उन्हें लॉजिस्टिक्स और पैसा पहुंचाने वाले नेटवर्क को भी इस डिजिटल रडार पर लिया गया है।
संवेदनशील जिलों पर विशेष फोकस क्यों?
रोहतक, झज्जर, सोनीपत और फरीदाबाद (NCR से सटे इलाके) को अपराध की दृष्टि से बेहद संवेदनशील माना जाता है। दिल्ली और अन्य राज्यों की सीमाएं लगने के कारण यहां अंतरराज्यीय गैंग सक्रिय रहते हैं। RJSF यूनिट का मुख्य उद्देश्य इन चारों जिलों में फैले संगठित अपराध को जड़ से खत्म करना और सीमा पार से संचालित होने वाले आपराधिक गठजोड़ को तोड़ना है।
डीजीपी अजय सिंघल के कड़े निर्देश
समीक्षा बैठक के दौरान पुलिस महानिदेशक अजय सिंघल ने साफ किया कि राज्य में किसी भी सूरत में कानून व्यवस्था से समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को कड़े दिशा-निर्देश देते हुए कहा कि पुलिस का सूचना तंत्र इतना मजबूत होना चाहिए कि संभावित अपराध घटित होने से पहले ही पुलिस मौके पर पहुंच जाए। अपराधियों को सजा दिलाने के लिए पारंपरिक तरीकों के बजाय आधुनिक फॉरेंसिक और वैज्ञानिक साक्ष्यों का इस्तेमाल किया जाए। RJSF यूनिट के तहत आने वाले चारों जिलों की पुलिस आपस में रीयल-टाइम डेटा साझा करेगी ताकि अपराधियों को भागने का मौका न मिले।
क्या बदलेगा इस नए मॉडल से?
इस तकनीकी बदलाव के बाद हरियाणा पुलिस अब केवल 'क्राइम होने के बाद जांच' करने वाली एजेंसी नहीं, बल्कि 'क्राइम को भांपकर रोकने' वाली आधुनिक फोर्स बनने की दिशा में आगे बढ़ चुकी है। 10 साल का क्रिमिनल रिकॉर्ड खंगालकर तैयार की गई यह डिजिटल कुंडली गैंगस्टरों के लिए हरियाणा में टिकना नामुमकिन कर देगी।
पायलट प्रोजेक्ट से राज्यस्तरीय मॉडल तक का सफर
बैठक के दौरान रोहतक रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सिमरदीप सिंह ने आरजेएसएफ यूनिट की कार्यप्रणाली और उपलब्धियों पर प्रेजेंटेशन दी। उन्होंने बताया कि पुलिस महानिदेशक अजय सिंघल के निर्देशानुसार इस यूनिट की शुरुआत सबसे पहले रोहतक जिले में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में की गई थी। प्रारंभिक चरण में प्राप्त उल्लेखनीय परिणामों के बाद इस मॉडल को झज्जर, सोनीपत और फरीदाबाद जिलों में भी लागू किया गया। अब यह यूनिट चार जिलों में अपराध नियंत्रण और अपराधियों की निगरानी के लिए एक विशेष इंटेलिजेंस आधारित तंत्र के रूप में कार्य कर रही है। इसे भविष्य में अन्य जिलों में भी लागू करने की योजना है।
10,892 जघन्य अपराधियों का तैयार किया गया विस्तृत डाटाबेस
आरजेएसएफ यूनिट ने पिछले दस वर्षों के दौरान हत्या, हत्या के प्रयास तथा अन्य गंभीर अपराधों में शामिल 10,892 अपराधियों का विस्तृत डाटाबेस तैयार किया है। इस डाटाबेस में प्रत्येक अपराधी का आपराधिक इतिहास, गतिविधियां, संपर्क, सामाजिक पृष्ठभूमि तथा वर्तमान स्थिति का विस्तृत विवरण सहित कई अन्य तथ्य शामिल किये गए हैं। यूनिट द्वारा इन अपराधियों का केवल रिकॉर्ड तैयार नहीं किया गया, बल्कि उन्हें विभिन्न श्रेणियों में बांटते हुए उनके जोखिम स्तर का भी आकलन किया गया है। इससे पुलिस को यह समझने में मदद मिल रही है कि कौन से अपराधी दोबारा अपराध कर सकते हैं और किन व्यक्तियों के संगठित आपराधिक गिरोहों के संपर्क में आने की संभावना अधिक है।
गैंगस्टरों की नई भर्ती रोकने पर विशेष फोकस
आरजेएसएफ यूनिट की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि यह केवल वर्तमान अपराधियों पर ही नहीं, बल्कि उन व्यक्तियों पर भी नजर रख रही है जिन्हें संगठित आपराधिक गिरोह अपने नेटवर्क में शामिल करने का प्रयास कर सकते हैं। पुलिस अधिकारियों के अनुसार गैंगस्टर गिरोह छोटे अपराधियों, जमानत पर बाहर आए आरोपियों या आपराधिक प्रवृत्ति के युवाओं को अपने नेटवर्क में शामिल करने की कोशिश करते रहते हैं। यूनिट ऐसे व्यक्तियों की पहचान कर उनकी गतिविधियों का विश्लेषण कर रही है ताकि उन्हें अपराध की दुनिया में और अधिक सक्रिय होने से पहले चिन्हित किया जा सके। इस रणनीति का उद्देश्य अपराध होने के बाद कार्रवाई करने के बजाय अपराध की संभावना को पहले ही समाप्त करना है।
तकनीक, मानव स्रोत और फील्ड इंटेलिजेंस का समन्वय
आरजेएसएफ यूनिट अपराधियों की निगरानी के लिए आधुनिक तकनीक, मानव स्रोतों और फील्ड इंटेलिजेंस का समन्वित उपयोग कर रही है। प्रत्येक क्षेत्र में विशेष टीमों का गठन किया गया है, जो अपराधियों के वर्तमान पते, सामाजिक गतिविधियों, संपर्कों और आपराधिक नेटवर्क की जानकारी एकत्र करती हैं। तकनीकी विश्लेषण के माध्यम से अपराधियों के व्यवहार में आने वाले बदलावों का अध्ययन किया जाता है। अपराधियों से संबंधित प्रत्येक तथ्य का सूक्ष्म विश्लेषण किया जा रहा है, जिसके परिणामस्वरूप कई महत्वपूर्ण मामलों को सुलझाने में सफलता भी मिली है।
हर जिले तक पहुंचेगा अपराधियों का डाटाबेस
पुलिस महानिदेशक अजय सिंघल ने कहा कि अपराधी किसी एक जिले तक सीमित नहीं रहते। इसलिए आरजेएसएफ यूनिट द्वारा की गई कार्यवाही भविष्य में राज्य के अन्य जिलों के साथ भी साझा किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि किसी अपराधी की गतिविधियों की जानकारी पहले से उपलब्ध होगी तो पुलिस समय रहते आवश्यक कदम उठा सकेगी। इससे अपराध की रोकथाम, निगरानी तथा अंतर-जिला समन्वय को और अधिक मजबूती मिलेगी।
गैंगस्टरों के खिलाफ STF की बड़ी कार्रवाई, तीन वर्षों में 941 गैंग सदस्यों की गिरफ्तारी
बैठक में हरियाणा स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की उपलब्धियों की भी समीक्षा की गई। STF के पुलिस अधीक्षक वसीम अकरम ने बताया कि गैंगस्टर नेटवर्क के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत वर्ष 2024 में 323, वर्ष 2025 में 470 तथा वर्ष 2026 में 28 मई तक 148 गैंग सदस्यों एवं अपराधियों को एसटीएफ द्वारा गिरफ्तार किया गया।इस प्रकार पिछले तीन वर्षों में STF ने कुल 941 गैंग सदस्यों को गिरफ्तार कर संगठित अपराध के खिलाफ बड़ी सफलता हासिल की है।
विदेशों से 22 गैंगस्टरों को भारत लाने में सफलता,14 अन्य गैंगस्टर विदेशों में हिरासत में
हरियाणा STF ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय गैंगस्टरों के खिलाफ भी उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। STF के गठन के बाद से अब तक 22 वांछित गैंगस्टरों को दूसरे देशों से डिपोर्ट अथवा प्रत्यर्पित कर भारत वापस लाया जा चुका है। विशेष रूप से वर्ष 2026 में अब तक 9 गैंगस्टरों की भारत में वापस लाना सुनिश्चित किया गया है, जो इस दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। हरियाणा पुलिस के प्रयासों के परिणामस्वरूप 14 अन्य गैंगस्टरों को विभिन्न देशों में हिरासत में लिया जा चुका है तथा उनकी भारत लाने के लिए कानूनी, राजनयिक तथा प्रशासनिक प्रक्रियाएं जारी हैं।
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