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The Haryana Story | मौत को दावत देते करनाल NH-44 पर अवैध होर्डिंग्स: सिर्फ 13 को मंजूरी, दर्जनों बिना परमिशन के तने, बड़े हादसे का डर

मौत को दावत देते करनाल NH-44 पर अवैध होर्डिंग्स: सिर्फ 13 को मंजूरी, दर्जनों बिना परमिशन के तने, बड़े हादसे का डर

करनाल में नियमों को ठेंगा दिखाकर लगे ओवरसाइज विज्ञापन, NHAI और नगर निगम की आंखों के सामने बड़ा खेल

नेशनल हाईवे-44  के दोनों तरफ लगे अवैध होर्डिंग्स और विशालकाय यूनिपोल कभी भी किसी बड़े हादसे का सबब बन सकते हैं। करनाल जिले की सीमा के भीतर नियमों को ताक पर रखकर बिना किसी प्रशासनिक अनुमति के दो दर्जन से अधिक ओवरसाइज विज्ञापन बोर्ड लगा दिए गए हैं। ये भारी-भरकम स्ट्रक्चर न केवल हाईवे से गुजरने वाले लाखों वाहन चालकों का ध्यान भटका रहे हैं, बल्कि तेज आंधी-तूफान के दौरान इनके गिरने की आशंका ने लोगों के मन में डर पैदा कर दिया है।

टोल प्लाजा से मधुबन तक अवैध होर्डिंग्स की भरमार

हाईवे के मुख्य रूट यानी टोल प्लाजा से लेकर मधुबन तक सफर करने पर सड़क के दोनों तरफ बड़े-बड़े यूनिपोल और होर्डिंग्स नजर आते हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इन भारी लोहे के स्ट्रक्चर्स को खड़ा करने के लिए न तो नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) से कोई एनओसी (NOC) ली गई है और न ही स्थानीय निकाय विभाग से कोई मंजूरी मिली है।

बीते दिनों आई आंधी ने दी चेतावनी, फटे पोस्टर

हाल ही में क्षेत्र में आई तेज आंधी और खराब मौसम के दौरान इन अवैध यूनिपोल पर लगे कई बड़े-बड़े फ्लेक्स और पोस्टर बीच से फटकर हवा में लहराते दिखे। स्थानीय लोगों और वाहन चालकों के अनुसार, इन होर्डिंग्स का साइज मानक से कई गुना बड़ा है। यदि तेज हवा के दबाव के कारण इनमें से एक भी स्ट्रक्चर मुख्य सड़क या सर्विस लेन पर गिरता है, तो इसकी चपेट में आकर कई जानें जा सकती हैं।

नगर निगम रिकॉर्ड: केवल 13 साइट्स ही वैध, बाकी सब अवैध

नगर निगम से प्राप्त आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, निगम सीमा के भीतर विज्ञापनों के प्रदर्शन के लिए केवल 13 साइट्स ही अधिकृत की गई हैं। इस सरकारी आंकड़े के उलट, हाईवे और शहर के अन्य अंदरूनी हिस्सों में कई दर्जन अवैध विज्ञापन बोर्ड मनमाने तरीके से माफियाओं द्वारा लगा दिए गए हैं, जिससे सरकार को भी लाखों रुपये के राजस्व का चूना लग रहा है।

सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों की चिंता: ड्राइवरों का भटकता है ध्यान

सड़क सुरक्षा मानकों के अनुसार, हाईवे के बिल्कुल नजदीक इस तरह के चमकीले और विशालकाय बोर्ड लगाने पर पाबंदी होती है ताकि तेज रफ्तार वाहनों के ड्राइवरों का ध्यान न भटके। 100 किमी/घंटा की रफ्तार वाले इस नेशनल हाईवे पर लगे ये अवैध होर्डिंग्स हादसों का बड़ा कारण बन रहे हैं।

बड़ा सवाल: कुंभकर्णी नींद में क्यों सोया है प्रशासन?

जब नगर निगम को भली-भांति ज्ञात है कि शहर और हाईवे पर नियमों के विरुद्ध दर्जनों अवैध होर्डिंग्स चल रहे हैं, तो अब तक इन पर बुलडोजर क्यों नहीं चला? बिना अनुमति के सरकारी या निजी जमीनों पर इतने बड़े लोहे के पोल कैसे खड़े हो गए, यह स्थानीय प्रशासन और एनएचएआई की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। लोग मांग कर रहे हैं कि किसी बड़े हादसे का इंतजार करने के बजाय प्रशासन को तुरंत इन अवैध स्ट्रक्चर्स को उखाड़ फेंकना चाहिए।

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