रोहतक के डी-पार्क इलाके में 9 जून को एक भीषण अग्निकांड हुआ था, जिसमें जूता शोरूम और आसपास की दुकानों में आग लगने से 3 लोगों की जान चली गई और 10 से अधिक दुकानें जलकर खाक हो गईं। इस दुखद घटना के बाद राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने शुक्रवार को प्रभावित बाजार का दौरा कर पीड़ित परिवारों और दुकानदारों से मुलाकात की। उन्होंने सरकार द्वारा घोषित की गई मुआवजा राशि को नाकाफी बताते हुए पीड़ितों के लिए सरकारी नौकरी और पूर्ण आर्थिक पुनर्वास की मांग उठाई है।
हादसे ने न सिर्फ तीन चिराग बुझा दिए, बल्कि दर्जनों परिवारों की आजीविका को उजाड़ दिया
रोहतक के सबसे व्यस्त कमर्शियल हब डी-पार्क मार्केट में मंगलवार को हुए दिल दहला देने वाले अग्निकांड के पीड़ितों का दर्द बांटने पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा ग्राउंड जीरो पर पहुंचे। उन्होंने आग की चपेट में आकर पूरी तरह बर्बाद हो चुकी दुकानों का जायजा लिया और इस हादसे में जान गंवाने वाले तीनों मृतकों के शोक संतप्त परिजनों से मुलाकात कर गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं। पीड़ितों से मुलाकात के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने सरकार की वर्तमान नीतियों और राहत उपायों पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि इस हादसे ने न सिर्फ तीन चिराग बुझा दिए, बल्कि दर्जनों परिवारों की आजीविका को पूरी तरह उजाड़ दिया है।
हुड्डा की सरकार से प्रमुख मांगें
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी द्वारा घोषित ₹10 लाख की अनुग्रह राशि बेहद कम है। हुड्डा ने तंज कसते हुए कहा, "₹10 लाख का पैमाना 15 साल पहले तय किया गया था, आज के महंगाई के दौर में भी सरकार उतनी ही रकम क्यों दे रही है?" इस भीषण अग्निकांड में अपनों को खोने वाले तीनों परिवारों के एक-एक सदस्य को सरकार तुरंत पक्की सरकारी नौकरी मुहैया कराए। जिन दुकानदारों के शोरूम और दुकानें जलकर खंडहर बन चुकी हैं, उन्हें शत-प्रतिशत मुआवजा दिया जाए और दुकानों के पुनर्निर्माण की व्यवस्था सरकार अपने स्तर पर करे।
50 से अधिक कर्मचारी रातों-रात बेरोजगार हो गए
दुकानों में काम करने वाले 50 से अधिक कर्मचारी रातों-रात बेरोजगार हो गए हैं, उनकी आजीविका फिर से स्थापित करने के लिए वित्तीय मदद दी जाए। पूर्व मुख्यमंत्री ने स्थानीय प्रशासन और दमकल विभाग की कमियों को उजागर करते हुए कहा कि अगर फायर ब्रिगेड के पास उचित संसाधन होते तो इस नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता था। प्रदेश में दमकलकर्मियों के लगभग 50% पद खाली पड़े हैं और पिछले ढाई साल से कोई नई भर्ती नहीं की गई है।
खराब दमकल गाड़ियां
मौके पर पहुंची पहली दमकल गाड़ी का वाटर प्रेशर बेहद कम था और वह बीच में ही खराब हो गई, जबकि दूसरी गाड़ी को आने में करीब 50 मिनट का वक्त लगा। हुड्डा ने मांग की कि फायर स्टेशन को शहर से बाहर स्थानांतरित करने का फैसला गलत है, आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए शहर के अंदर भी एक सब-स्टेशन होना अनिवार्य है।
क्या था पूरा मामला?
बीते मंगलवार 9 जून को दोपहर करीब 2:15 बजे डी-पार्क मार्केट के 'होम टाउन शूज' और 'रोहतक शूज' शोरूम में अचानक भीषण आग लग गई थी। आग इतनी भयानक थी कि उसने देखते ही देखते आस-पास की 10 दुकानों को अपनी चपेट में ले लिया और करीब 22 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद इस पर काबू पाया जा सका। इस हादसे में शोरूम संचालक सौरभ उर्फ रोहित (19 वर्षीय), कर्मचारी अमन यादव (38 वर्षीय) और कपिल (50 वर्षीय) की जिंदा जलने से दर्दनाक मौत हो गई थी, जिनके शव मलबे से बरामद किए गए। वर्तमान में जिला प्रशासन द्वारा अतिरिक्त उपायुक्त (ADC) के नेतृत्व में मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए जा चुके हैं। कांग्रेस नेता ने साफ किया है कि वे इस दुख की घड़ी में पूरी तरह से व्यापारियों और पीड़ित परिवारों के साथ खड़े हैं और जब तक सरकार सभी को पूरा हक और पूरा मुआवजा नहीं दे देती, वे चुप नहीं बैठेंगे।
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