राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) प्लानिंग बोर्ड की बैठक में हरियाणा के 14 जिलों को NCR में ही बनाए रखने का अंतिम फैसला लिया गया है और साथ ही क्षेत्र के आधुनिक विकास के लिए 4 नई 'नमो सिटी' विकसित करने का ऐतिहासिक ऐलान हुआ है। केंद्रीय शहरी विकास मंत्री मनोहर लाल खट्टर की अध्यक्षता में दिल्ली में आयोजित NCR प्लानिंग बोर्ड की 42वीं अहम बैठक में यह फैसला लिया गया, जिसके बाद हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इसकी पुख्ता पुष्टि की।
14 जिलों का NCR में बना रहेगा दबदबा
बैठक में तय हुआ है कि हरियाणा का मौजूदा NCR नक्शा जस का तस रहेगा और इसके क्षेत्रफल में कोई कटौती नहीं की जाएगी। सूबे के कुल 22 जिलों में से वर्तमान में शामिल सभी 14 जिले इस दायरे में बने रहेंगे, जिनमें गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत, रोहतक, झज्जर, पानीपत, करनाल, जींद, रेवाड़ी, नूंह, पलवल, भिवानी, चरखी दादरी, महेंद्रगढ़ शामिल हैं।
आधुनिक 'नमो सिटी' विकसित करने की तैयारी
NCR पर आए इस बड़े फैसले के साथ ही रीजनल प्लान-2041 के तहत 4 नई ग्रीनफील्ड 'नमो सिटी' बसाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है, जिसका उद्देश्य दिल्ली और उसके मौजूदा सैटेलाइट शहरों पर आबादी और इंफ्रास्ट्रक्चर के बढ़ते दबाव को कम करना है। ये नमो सिटी मुख्य रूप से आरआरटीएस कॉरिडोर और एक्सप्रेसवे के पास विकसित की जाएंगी। इनमें वर्ल्ड क्लास सिविक एमेनिटीज, सस्टेनेबल ग्रीन एनर्जी, आधुनिक हाउसिंग प्रोजेक्ट्स और बड़े रोजगार के अवसर पैदा किए जाएंगे। 15 अगस्त 2026 तक कमेटी इन शहरों के सटीक लोकेशन पर अंतिम रिपोर्ट सौंपेगी।
क्यों उठी थी NCR सीमा घटाने की मांग और चर्चा?
पिछले लंबे समय से हरियाणा सरकार की ओर से NCR का दायरा घटाने की वकालत की जा रही थी। इसके पीछे मुख्य कारण व्यावहारिक और भौगोलिक चुनौतियां थीं। दिल्ली से 100 से 150 किलोमीटर से भी अधिक दूर स्थित जिले जैसे करनाल, महेंद्रगढ़, जींद भी NCR नियमों के दायरे में आ रहे थे। दिल्ली के प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए बनने वाले कड़े नियम जैसे निर्माण कार्यों पर रोक, गाड़ियों पर पाबंदी इन सुदूर जिलों पर भी लागू हो रहे थे, जिससे वहां का स्थानीय विकास प्रभावित हो रहा था।
किन जिलों पर पड़ता सबसे ज्यादा असर?
चर्चा थी कि एनसीआर के दायरे को केवल दिल्ली से 100 किलोमीटर के हवाई रेडियस तक ही सीमित कर दिया जाए। हालांकि, प्लानिंग बोर्ड ने वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए इसे खारिज कर दिया है। अगर दायरा घटाने का फैसला लागू होता, तो हरियाणा के करनाल, पानीपत, जींद, महेंद्रगढ़ और भिवानी जिलों पर सबसे बड़ा असर पड़ता।
इन जिलों के रियल एस्टेट मार्केट और शहरी विकास को 'NCR ब्रांडिंग' हटने से बड़ा झटका लग सकता था। अब स्टेटस बरकरार रहने से यहां जमीनों के दाम और निवेश की संभावनाएं मजबूत बनी रहेंगी। इन जिलों को विकास कार्यों, सड़कों और सीवरेज सिस्टम को दुरुस्त करने के लिए NCR प्लानिंग बोर्ड से मिलने वाला भारी-भरकम फंड आगे भी मिलता रहेगा।
हाईवे और परिवहन कॉरिडोर का नया प्रस्ताव
बैठक में '30-मिनट NCR' के विज़न को साकार करने के लिए नए ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर पर गहन मंथन हुआ। दिल्ली से एनसीआर के किसी भी प्रमुख शहर तक महज 30 मिनट में पहुंचने के लिए 8 नए आरआरटीएस कॉरिडोर और नए एक्सप्रेसवे को आपस में लिंक करने का खाका तैयार किया गया है। Inter-city हवाई यात्रा को बढ़ावा देने के लिए बड़े शहरों के बीच हेली-टैक्सी सेवाएं शुरू करने के ब्लूप्रिंट पर भी मुहर लगाई गई है।
उद्योगों और आम जनता पर NCR के कड़े नियमों का असर
हरियाणा के जिलों को NCR में ही रखे जाने के फैसले का सबसे पेचीदा पहलू वहां के उद्योगों और वाहनों पर पड़ने वाला असर है। ग्रैप लागू होने के दौरान पानीपत की टेक्सटाइल इंडस्ट्री, जनरेटर सेट्स के इस्तेमाल और निर्माण कार्यों पर पाबंदियां पहले की तरह ही जारी रहेंगी। उद्योगों और वाणिज्यिक वाहनों को अनिवार्य रूप से पीएनजी, सीएनजी या इलेक्ट्रिक माध्यमों पर शिफ्ट होना पड़ेगा। इन 14 जिलों में 10 साल पुराने डीजल और 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों को चलाने पर लगी रोक सख्ती से लागू रहेगी। साथ ही ईंधन भराने के लिए वैध प्रदूषण प्रमाण पत्र अनिवार्य रहेगा।
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