इनेलो के राष्ट्रीय अध्यक्ष अभय सिंह चौटाला ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को पत्र लिखकर धरना, प्रदर्शन और रैलियों पर लगाए गए प्रतिबंध संबंधी आदेश को तत्काल वापस लेने की मांग की है। चंडीगढ़ से जारी इस आधिकारिक पत्र में चौधरी अभय सिंह चौटाला ने 10 जून 2026 को मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा जारी किए गए उस आदेश पर कड़ा विरोध जताया है, जिसके तहत विपक्षी पार्टियों पर सितंबर माह तक जनसभा और रैलियां करने पर पाबंदी लगाई गई है। उन्होंने सरकार के इस कदम को नागरिक स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ एक दमनकारी नीति करार दिया है।
प्रतिबंध को तुरंत प्रभाव से वापस लिया जाए
इंडियन नेशनल लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी अभय सिंह चौटाला ने 16 जून को मुख्यमंत्री को एक सख्त पत्र भेजा। पत्र में उन्होंने साफ तौर पर कहा कि मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा 10 जून 2026 को जारी किया गया वह आदेश पूरी तरह से अलोकतांत्रिक है, जिसमें विपक्ष के धरना, प्रदर्शन और रैली करने पर रोक लगाई गई है। अभय चौटाला ने मांग की है कि लोकतांत्रिक प्रणाली की भावनाओं का सम्मान करते हुए इस प्रतिबंध को तुरंत प्रभाव से वापस लिया जाए।
संविधान और नागरिक स्वतंत्रता सर्वोपरि
अभय चौटाला ने अपनी बात को स्पष्ट करते हुए कहा कि उनकी पार्टी हमेशा से ऊर्जा संरक्षण और संसाधनों की बचत की पक्षधर रही है। हालांकि, सरकार की किसी भी नीति या कदम को देश के संविधान, नागरिक स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों के दायरे में ही होना चाहिए। पर्यावरण या अन्य किसी भी बहाने से जनता और विपक्ष के मौलिक अधिकारों को छीना नहीं जा सकता।
जनता की समस्याओं को उठाने पर प्रतिबंध क्यों?
इनेलो नेता ने प्रदेश सरकार की प्राथमिकताओं पर तीखे सवाल खड़े करते हुए कहा आज हरियाणा की जनता महंगाई, बेरोजगारी, किसानों की गंभीर समस्याओं, बदहाल कानून व्यवस्था और चारों तरफ फैले भ्रष्टाचार से बुरी तरह परेशान है। सरकार का यह कर्तव्य है कि वह जनता की इन समस्याओं का समाधान करे, लेकिन इसके उलट वह उन आवाजों पर ही प्रतिबंध लगा रही है जो इन मुद्दों को उठाना चाहती हैं।
सितंबर तक पाबंदी का विरोध
विपक्षी पार्टियों को सितंबर माह तक किसी भी प्रकार की जनसभा या रैली करने से रोकना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। यह सीधा-सीधा जनता की लोकतांत्रिक आवाज का गला घोंटने जैसा है।जनता चाहती है पारदर्शिता और जवाबदेहीपत्र के अंत में अभय चौटाला ने सरकार को याद दिलाया कि लोकतंत्र में असहमति व्यक्त करना और जनहित के मुद्दों पर सरकार से सीधे सवाल पूछना देश के प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। प्रदेश की जनता आज सत्ता पर काबिज दल से केवल सत्य, पूर्ण पारदर्शिता और जवाबदेही की उम्मीद करती है। ऐसे दमनकारी फैसलों से विपक्ष पीछे हटने वाला नहीं है।
वित्तीय स्थिति खराब है तो सरकार को अनावश्यक खर्चों को बंद कर देने चाहिए
अगर प्रदेश की वित्तीय स्थिति खराब है तो सरकार को अनावश्यक खर्चों को बंद कर देने चाहिए। सरकार को प्रदेश के लोगों को स्पष्ट तौर पर बताना चाहिए कि भाजपा सरकार आने के बाद कुल कितना कर्ज लेकर अखबारों में विज्ञापन देकर खजाने को लूटा है। इनेलो पार्टी ऊर्जा संरक्षण और संसाधनों की बचत की पक्षधर है। लेकिन किसी भी नीति को संविधान, नागरिक स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप होना चाहिए। लोकतंत्र में जनता ही सर्वोपरि होती है और उसकी आवाज को दबाने का कोई भी प्रयास जनभावनाओं के विरूद्ध माना जाएगा। इनेलो पार्टी इस प्रकार के अनुचित आदेशों का पुरजोर विरोध करती है और सरकार से यह आदेश तुरंत प्रभाव से वापिस लेने की मांग करती है।
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