कभी भारत की सड़कों पर लावारिस घूमने वाला एक बेसहारा कुत्ता आज दुनिया भर में शांति, करुणा और सह-अस्तित्व का सबसे बड़ा वैश्विक प्रतीक बन चुका है। हम बात कर रहे हैं दुनिया के मशहूर ‘पीस डॉग’ आलोका की, जो अमेरिका में बौद्ध भिक्षुओं के साथ 3,700 किलोमीटर की लंबी 'वॉक फॉर पीस' (शांति पदयात्रा) पूरी कर स्वदेश लौट आया है। भारत आगमन पर नई दिल्ली में प्रख्यात पशु अधिकार कार्यकर्ता और राजनेता मेनका गांधी से मुलाकात करने के बाद आलोका गुरुग्राम पहुंचा। गुरुग्राम के द वेस्टिन होटल में आयोजित 'मीट एंड ग्रीट' कार्यक्रम में इस अनोखे डॉग की एक झलक पाने और उसके साथ तस्वीरें खिंचवाने के लिए सैकड़ों पशु प्रेमियों और प्रशंसकों का तांता लग गया।
माथे पर 'दिल का निशान' और इंस्टाग्राम पर 4.82 लाख फॉलोअर्स
भारतीय नस्ल (परिया/देसी) का लगभग चार वर्षीय आलोका कोई साधारण डॉग नहीं है। उसके माथे पर कुदरती रूप से सफेद रंग का दिल के आकार का निशान बना हुआ है, जो उसकी सबसे बड़ी शारीरिक पहचान है। आलोका की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर उसके 4.82 लाख से अधिक फॉलोअर्स हैं। दुनिया भर के लोग डिजिटल माध्यमों और लाइव मैप के जरिए उसकी शांति यात्रा को ट्रैक करते हैं और उस पर अपना प्यार बरसाते हैं।
कैसे शुरू हुआ एक बेघर डॉग का 'आध्यात्मिक सफर'?
आलोका की यह अनूठी कहानी 2022 में तब शुरू हुई, जब वह ओडिशा/कोलकाता की सड़कों से वियतनामी-अमेरिकी बौद्ध भिक्षु वेनरेबल भिक्खु पन्नाकारा के साथ जुड़ गया। एक कार दुर्घटना में घायल होने और फिर ठीक होकर भिक्षुओं के शांत काफिले में वापस लौटने की उसकी दृढ़ता को देखकर, उन्हें ‘आलोका’ (अर्थ: प्रकाश) नाम दिया गया।
अमेरिका के 10 राज्यों में 3,700 KM की ऐतिहासिक पदयात्रा
भारत-नेपाल के बाद, आलोका ने अमेरिका में 'वॉक फॉर पीस' अभियान के तहत 10 राज्यों में लगभग 3,700 किलोमीटर (2,300 मील) की पदयात्रा पूरी की। इस दौरान उसने अमेरिका, श्रीलंका और थाईलैंड में अपनी शांत उपस्थिति से लाखों लोगों का दिल जीता।
मेनका गांधी का संदेश: 'बेसहारा जानवरों के प्रति दया ही सच्ची शांति'
भारत लौटने पर मेनका गांधी ने आलोका की वफादारी और लचीलेपन की सराहना करते हुए कहा कि, “आलोका भारतीय स्ट्रीट डॉग्स की वफादारी, साहस, लचीलेपन और बिना शर्त प्यार का सबसे बेहतरीन उदाहरण है”। गुरुग्राम के वेस्टिन होटल में आयोजित कार्यक्रम में, उन्होंने और भिक्षुओं ने इस बात पर जोर दिया कि बेसहारा जीवों के प्रति करुणा ही सच्ची शांति का मार्ग है। आलोका अपनी इस यात्रा के माध्यम से विश्व को मानवता और सह-अस्तित्व का पाठ पढ़ा रहा है।
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