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The Haryana Story | हरियाणा पुलिस की बड़ी पहल: 1 लाख से अधिक की साइबर धोखाधड़ी पर अब स्वतः दर्ज होगी 'e-Zero FIR', कैसे काम करेगी 'e-Zero FIR' प्रणाली?

हरियाणा पुलिस की बड़ी पहल: 1 लाख से अधिक की साइबर धोखाधड़ी पर अब स्वतः दर्ज होगी 'e-Zero FIR', कैसे काम करेगी 'e-Zero FIR' प्रणाली?

साइबर वित्तीय धोखाधड़ी होने पर पीड़ित को एफआईआर दर्ज कराने के लिए थानों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे

हरियाणा सरकार और हरियाणा पुलिस ने साइबर अपराधियों पर नकेल कसने और आम नागरिकों के पैसे सुरक्षित रखने के लिए एक गेम-चेंजर व्यवस्था शुरू की है। अब राज्य में 1 लाख या उससे अधिक की साइबर वित्तीय धोखाधड़ी होने पर पीड़ित को एफआईआर दर्ज कराने के लिए थानों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज होते ही इसे सीधे 'ई-जीरो एफआईआर' (e-Zero FIR) में बदल दिया जाएगा।

गृह मंत्री अमित शाह की पहल और सीएम नायब सैनी का मार्गदर्शन

इस डिजिटल और नागरिक-हितैषी प्रणाली की शुरुआत केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह की दूरदर्शी पहल और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के कुशल मार्गदर्शन में की गई है। केंद्र और राज्य सरकार का मुख्य उद्देश्य साइबर क्राइम के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाना और कानूनी प्रक्रिया को पेपरलेस व त्वरित बनाना है।

कैसे काम करेगी 'ई-जीरो एफआईआर' प्रणाली?

जैसे ही किसी नागरिक के साथ 1 लाख या उससे अधिक की साइबर धोखाधड़ी होती है, उसे तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करना होगा। हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज होते ही सिस्टम सॉफ्टवेयर के जरिए उस शिकायत को ऑटोमैटिकली ई-जीरो एफआईआर/जीरो एफआईआर में बदल देगा। इसके लिए पीड़ित को किसी विशेष साइबर थाने या स्थानीय पुलिस स्टेशन जाकर लिखित शिकायत देने के लिए इंतजार नहीं करना पड़ेगा।

धन की रिकवरी और डिजिटल साक्ष्यों का संरक्षण होगा आसान

हरियाणा के पुलिस महानिदेशक अजय सिंघल ने इस व्यवस्था की गंभीरता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्तमान समय में कानून प्रवर्तन एजेंसियों के सामने साइबर अपराध सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। इस नई व्यवस्था के लागू होने से पुलिस को कई बड़े फायदे मिलेंगे। साइबर ठगी में शुरुआती कुछ घंटे बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। तुरंत एफआईआर होने से बैंकों के साथ मिलकर ठगी गई राशि को ब्लॉक/फ्रीज करना आसान होगा।

डिजिटल सबूतों की सुरक्षा

अपराधी अक्सर ट्रांजैक्शन के बाद अपने डिजिटल फुटप्रिंट मिटा देते हैं। तुरंत कानूनी प्रक्रिया शुरू होने से डिजिटल साक्ष्यों को समय रहते सुरक्षित किया जा सकेगा। इस प्रणाली से देश या राज्य के किसी भी कोने में बैठे साइबर ठगों की पहचान करना और उन्हें गिरफ्तार करना काफी आसान हो जाएगा।

आम जनता को क्या होगा फायदा?

पहले साइबर फ्रॉड होने पर लोगों को शिकायत दर्ज कराने और तकनीकी औपचारिकताएं पूरी करने में काफी समय लग जाता था, जिससे अपराधी पैसे निकाल लेते थे। अब इस ई-सुविधा से पारदर्शिता आएगी, पुलिस की जवाबदेही बढ़ेगी और आम जनता का समय बचेगा। सबसे बड़ी बात यह है कि पीड़ित के पैसे वापस मिलने की संभावना कई गुना बढ़ जाएगी।

नागरिकों से अपील

डीजीपी ने प्रदेशवासियों से अपील की है कि किसी भी प्रकार की साइबर वित्तीय धोखाधड़ी होने पर बिना समय गंवाए तुरंत हेल्पलाइन 1930 अथवा cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं। साइबर अपराध के मामलों में हर मिनट महत्वपूर्ण होता है और समय पर की गई रिपोर्टिंग ही त्वरित पुलिस कार्रवाई तथा धनराशि की सुरक्षा की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि हरियाणा पुलिस सुरक्षित डिजिटल वातावरण, नागरिकों की वित्तीय सुरक्षा तथा साइबर अपराध मुक्त हरियाणा के संकल्प के साथ लगातार कार्य कर रही है।

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