हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ मिलकर रेवाड़ी के बावल हलके को करीब ₹125 करोड़ की विकास परियोजनाओं की बड़ी सौगात दी है। बावल में आयोजित 'खेत बचाओ अभियान' के समापन समारोह के दौरान मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री ने क्षेत्र की जनता और किसानों के लिए कई महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इस अवसर पर प्रदेश में कृषि और ग्रामीण विकास को गति देने के लिए "हरियाणा एफपीओ मिशन-2026" का भी भव्य शुभारंभ किया गया।
प्रमुख परियोजनाओं का उद्घाटन
मुख्यमंत्री द्वारा बावल क्षेत्र में शिक्षा, व्यापार और कानून-व्यवस्था को मजबूत करने के लिए तैयार हो चुकी तीन प्रमुख इमारतों का फीता काटा गया। बावल में ₹19 करोड़ 75 लाख की लागत से नवनिर्मित राजकीय कन्या महाविद्यालय भवन का उद्घाटन किया गया, जिससे क्षेत्र की बेटियों को उच्च शिक्षा के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा। नगरपालिका बावल में ₹20 करोड़ 29 लाख की लागत से तैयार शॉपिंग कॉम्प्लेक्स और पार्किंग स्थल से स्थानीय व्यापारियों को बढ़ावा मिलेगा और पार्किंग की समस्या दूर होगी। इसके साथ ही रामपुरा में ₹3 करोड़ 33 लाख की लागत से बने नए पुलिस स्टेशन के भवन का उद्घाटन कर सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ किया गया है।
बुनियादी ढांचे और स्वास्थ्य के लिए शिलान्यास
भविष्य के विकास को रफ्तार देने के लिए मुख्यमंत्री ने दो बड़ी दूरगामी परियोजनाओं की आधारशिला भी रखी। आईएमटी के औद्योगिक क्षेत्र में यातायात को सुगम बनाने और भारी वाहनों की आवाजाही दुरुस्त करने के लिए ₹31 करोड़ 26 लाख की लागत से बनने वाली सीमेंट कंक्रीट सड़क का शिलान्यास किया गया। क्षेत्र के सबसे बड़े स्वास्थ्य प्रोजेक्ट 'माजरा एम्स' को निर्बाध पानी की सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए ₹28 करोड़ 78 लाख की लागत से बनने वाले आधुनिक जल घर की नींव रखी गई।
'खेत बचाओ अभियान' और कृषि नीतियों पर सरकार का जोर
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने स्पष्ट किया कि डबल इंजन सरकार किसानों की आय दोगुनी करने के लिए प्रतिबद्ध है। छोटे और सीमांत किसानों को सीधे बाजार से जोड़ने और उनके उत्पादों को बेहतर दाम दिलाने के लिए इस मिशन को लॉन्च किया गया है। सरकार जल संरक्षण, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, फसल विविधीकरण और 'क्लाइमेट स्मार्ट एग्रीकल्चर' (जलवायु अनुकूल कृषि) को अपनी नीतियों के मूल आधार में शामिल कर काम कर रही है। बदले हुए परिदृश्य में बावल क्षेत्र के औद्योगिक विकास (IMT) और सामाजिक ढांचे (शिक्षा व स्वास्थ्य) को इन परियोजनाओं से भारी मजबूती मिलेगी।
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