सिरसा की सांसद, पूर्व केंद्रीय मंत्री, कांग्रेस कार्यसमिति (सीडब्ल्यूसी) की सदस्य एवं अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव कुमारी सैलजा शनिवार को गांव चानौत पहुंचीं, जहां पिछले कई दिनों से ग्रामीण पेयजल संकट को लेकर धरने पर बैठे हुए हैं। धरनास्थल पर पहुंचने पर ग्रामीणों ने कुमारी सैलजा का फूल-मालाओं से भव्य स्वागत किया। इस दौरान उन्होंने धरने को संबोधित करते हुए ग्रामीणों की मांगों का समर्थन किया और सरकार से गांव की पेयजल समस्या का तत्काल एवं स्थायी समाधान करने की मांग की।
बुनियादी सुविधाओं के लिए भी संघर्ष करने को विवश
कुमारी सैलजा ने कहा कि यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि आज भी लोगों को पीने के पानी जैसी मूलभूत सुविधा के लिए सड़कों पर उतरकर आंदोलन करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार की नीतियों के कारण आम जनता बिजली और पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए भी संघर्ष करने को विवश है। सरकार को जनहित के मुद्दों का समाधान करने के बजाय लोगों को आंदोलन करने पर मजबूर नहीं करना चाहिए।
विकास के नाम पर केवल बड़े-बड़े दावे
सांसद ने कहा कि पीने के पानी के लिए संघर्ष करना किसी भी सभ्य समाज के लिए अपमान की बात है, लेकिन प्रदेश की जनता मजबूरी में ऐसा करने को विवश है। पिछले लगभग 12 वर्षों में भाजपा सरकार ने विकास के नाम पर केवल बड़े-बड़े दावे किए हैं, जबकि गांवों में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति लगातार खराब होती गई है। धर्म और भावनात्मक मुद्दों की राजनीति करने वाली सरकार जनता की वास्तविक समस्याओं से ध्यान भटका रही है।
पेयजल समस्या का तत्काल समाधान किया जाए
कुमारी सैलजा ने कहा कि कांग्रेस हमेशा जनता के अधिकारों और मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष करती रही है और आगे भी किसानों, ग्रामीणों तथा आम लोगों की आवाज़ मजबूती से उठाती रहेगी। उन्होंने सरकार से मांग की कि गांव चानौत की पेयजल समस्या का तत्काल समाधान किया जाए, ताकि लोगों को अपनी मूलभूत जरूरतों के लिए आंदोलन करने की नौबत न आए।
लोगों की प्यास बुझाना तो धर्म का काम
सांसद ने कहा कि पहले ज्यादा पानी की समस्या थी और आज लोग प्यास बुझाने के लिए एक एक बूंद पानी के लिए तरस रहे है। लोग पानी के लिए धरने पर बैठे है और सरकार उनकी प्यास बुझाने के बजाए आंसू गैस के गोले दाग रही है लाठी चार्ज कर रही है। सरकार विकसित भारत की बात कर रही है अगर विकसित भारत देखना है तो यहां आ जाओ। लोगो की बात उठाना मीडिया और विपक्ष दोनों की जिम्मेदारी है। सरकार को बीच का रास्ता निकालना चाहिए था पर वह तो लाठी से आवाज दबाना चाहती है।
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