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The Haryana Story | UDISE+ रिपोर्ट के आंकड़ों पर सैलजा ने सरकार को घेरा, दावे आखिर जमीन पर क्यों नहीं उतर पाए? लगातार 'कमजोर' हो रहा शिक्षा का ढांचा!!

UDISE+ रिपोर्ट के आंकड़ों पर सैलजा ने सरकार को घेरा, दावे आखिर जमीन पर क्यों नहीं उतर पाए? लगातार 'कमजोर' हो रहा शिक्षा का ढांचा!!

सांसद कुमारी सैलजा का सरकार से सवाल- क्या विज्ञापनों और घोषणाओं से मजबूत होगी शिक्षा व्यवस्था?

सिरसा की सांसद, पूर्व केंद्रीय मंत्री, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव एवं कांग्रेस कार्यसमिति (सीडब्ल्यूसी) की सदस्य कुमारी सैलजा ने भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय की यूडीआईएसई+ रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि स्वयं केंद्र सरकार के आंकड़े यह स्वीकार कर रहे हैं कि हरियाणा में शिक्षा व्यवस्था का ढांचा लगातार कमजोर हो रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार एक ओर नई-नई घोषणाएं कर रही है, जबकि दूसरी ओर सरकारी स्कूलों की वास्तविक स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है।

दावे आखिर जमीन पर क्यों नहीं उतर पाए

कुमारी सैलजा ने कहा कि यदि केंद्र सरकार की रिपोर्ट में सरकारी स्कूलों के जर्जर भवनों, आधारभूत सुविधाओं की कमी तथा शिक्षा व्यवस्था की चुनौतियों का उल्लेख किया गया है, तो हरियाणा सरकार को यह बताना चाहिए कि पिछले लगभग 12 वर्षों में शिक्षा सुधार के दावे आखिर जमीन पर क्यों नहीं उतर पाए। क्या केवल घोषणाओं और विज्ञापनों से शिक्षा व्यवस्था मजबूत हो जाएगी?  सांसद ने कहा कि प्रदेश में हजारों शिक्षकों के पद लंबे समय से रिक्त पड़े हैं। अनेक विद्यालयों में विषय विशेषज्ञ शिक्षक नहीं हैं और भर्ती प्रक्रियाएं वर्षों तक लंबित रहती हैं। सरकार न तो सरकारी स्कूलों का ढांचा सुधार पा रही है और न ही समय पर शिक्षकों की नियमित भर्ती कर रही है। इसका सीधा असर विद्यार्थियों की शिक्षा और उनके भविष्य पर पड़ रहा है।

हरियाणा के युवाओं को अयोग्य बताया जा रहा!

कुमारी सैलजा ने कहा कि जब सरकारी स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का वातावरण प्रभावित होगा तो उसका असर रोजगार पर भी दिखाई देगा। आज हरियाणा का पढ़ा-लिखा युवा बेरोजगारी का सामना कर रहा है। सरकारी भर्तियों में बड़ी संख्या में हरियाणा के युवाओं को अयोग्य बताया जा रहा है। उन्होंने प्रश्न उठाया कि क्या हरियाणा का युवा दोषी है, या फिर पिछले लगभग 12 वर्षों से शिक्षा और भर्ती व्यवस्था को कमजोर करने वाली भाजपा सरकार इसकी जिम्मेदार है?

सरकार को अपनी विफलताओं का जवाब देना चाहिए

कुमारी सैलजा ने कहा कि यदि सरकारी भर्तियों में 35 प्रतिशत जैसे न्यूनतम मापदंड पर भी बड़ी संख्या में युवा सफल नहीं हो पा रहे हैं तो सरकार को यह आत्ममंथन करना चाहिए कि इसके पीछे शिक्षा व्यवस्था की कमजोरियां, शिक्षकों की कमी और सरकार की नीतियां कितनी जिम्मेदार हैं। युवाओं को दोष देने से पहले सरकार को अपनी विफलताओं का जवाब देना चाहिए।

अब भी सुधार नहीं किया गया तो बहुत देर हो जाएगी

कुमारी सैलजा ने मांग की कि जर्जर सरकारी स्कूल भवनों के पुनर्निर्माण के लिए विशेष अभियान चलाया जाए, सभी रिक्त शिक्षक पदों पर शीघ्र नियमित भर्ती की जाए, विद्यालयों में आधारभूत सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं तथा भर्ती प्रक्रियाओं को पारदर्शी और समयबद्ध बनाया जाए। कुमारी सैलजा ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार ने शिक्षा और रोजगार के इन गंभीर मुद्दों पर तत्काल प्रभावी कदम नहीं उठाए तो प्रदेश की एक पूरी पीढ़ी प्रभावित होगी। सरकार अभी भी चेत जाए, क्योंकि यदि अब भी सुधार नहीं किया गया तो बहुत देर हो जाएगी।

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