हरियाणा राज्य महिला आयोग की नवनियुक्त चेयरपर्सन उषा प्रियदर्शनी ने महिला सुरक्षा और उनके अधिकारों को लेकर कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। वीरवार को चेयरपर्सन उषा प्रियदर्शनी और आयोग की सदस्य सुमन ने यमुनानगर जिले का तूफानी दौरा किया। इस दौरान टीम ने विभिन्न निजी कंपनियों, फैक्ट्रियों और जिला नागरिक अस्पताल (सिविल हॉस्पिटल) का औचक निरीक्षण किया, जिससे प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया।
निजी फैक्ट्रियों में मिली खामियां, एक महीने का अल्टीमेटम
चेयरपर्सन ने औद्योगिक क्षेत्रों में महिला कर्मचारियों की सुरक्षा, सीसीटीवी निगरानी, शिकायत निवारण प्रणाली कार्यस्थल की सुविधाओं, स्वच्छता और शौचालय की मूलभूत व्यवस्थाओं का बारीकी से निरीक्षण किया।निरीक्षण के दौरान कई स्थानों पर महिला सुरक्षा और सुविधाओं में गंभीर कमियां पाई गईं। इस पर कड़ा संज्ञान लेते हुए उषा प्रियदर्शनी ने संबंधित फैक्ट्री प्रबंधनों को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए और एक महीने के भीतर सभी खामियों को दूर करने की समयसीमा (अल्टीमेटम) तय की है।
सिविल अस्पताल का औचक निरीक्षण, तड़पते मरीजों ने बयां किया दर्द
फैक्ट्रियों के बाद महिला आयोग की टीम सीधे यमुनानगर के नागरिक अस्पताल पहुंची। वहां टीम ने इमरजेंसी वार्ड, महिला वार्ड और लेबर रूम का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान अस्पताल में भर्ती मरीजों ने चेयरपर्सन के सामने अपनी आपबीती सुनाई और कहा कि गंभीर दर्द के बावजूद न तो समय पर डॉक्टर उन्हें देखने आए और न ही दवाइयां दी गईं।
डॉक्टर की लापरवाही पर जांच के आदेश
अस्पताल में भर्ती एक महिला मरीज ने शिकायत की कि जरूरत के समय डॉक्टर ड्यूटी से नदारद थे। चेयरपर्सन ने इसे बेहद गंभीरता से लेते हुए सिविल सर्जन (सीएमओ) से तुरंत रिपोर्ट तलब की और संबंधित डॉक्टर की ड्यूटी की जांच कर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। उषा प्रियदर्शनी ने मीडिया को बताया कि हालांकि अस्पताल में करीब 91 प्रतिशत मरीज डॉक्टरों के व्यवहार और उपचार से संतुष्ट दिखे, लेकिन किसी भी मरीज के इलाज में लापरवाही को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
"महिलाओं के सम्मान से समझौता नहीं" - चेयरपर्सन
दौरे के बाद दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, चेयरपर्सन उषा प्रियदर्शनी ने स्पष्ट किया कि महिला आयोग का उद्देश्य केवल कागजी कार्रवाई या सिर्फ निरीक्षण करना नहीं है, बल्कि महिलाओं को धरातल पर सुरक्षित, सम्मानजनक और बेहतर माहौल देना है। उन्होंने चेतावनी दी कि जहां भी महिलाओं के अधिकारों या सुविधाओं में चूक मिलेगी, वहां संबंधित विभाग और संस्थान के खिलाफ कानूनी व प्रशासनिक कार्रवाई तय की जाएगी।
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