हरियाणा कांग्रेस की आंतरिक गुटबाजी और कलह एक बार फिर खुलकर सामने आ गई है। चंडीगढ़ में कांग्रेस के नए प्रभारी की मौजूदगी में आयोजित पहली ही बड़ी बैठक में सीटों के प्रोटोकॉल को लेकर जबरदस्त हंगामा हुआ। सिरसा से कांग्रेस विधायक गोकुल सेतिया और डबवाली से विधायक देवेंद्र हंस ने बैठक में अपनी कुर्सियां पीछे लगाए जाने पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया। इस दौरान विधायक गोकुल सेतिया ने पूर्व सांसद बृजेंद्र सिंह और डॉ. अशोक तंवर का नाम लिए बिना उन पर बेहद तीखे और सीधे राजनीतिक बाण छोड़े हैं।
नए संगठन और नए प्रभारी की पहली ही बैठक विवादों की भेंट चढ़ गई
हरियाणा कांग्रेस में नए संगठन और नए प्रभारी की पहली ही बैठक विवादों की भेंट चढ़ गई है। चंडीगढ़ में आयोजित इस बैठक में सिटिंग विधायकों के बजाय हाल ही में दूसरी पार्टियों से आए नेताओं को आगे की पंक्ति में तरजीह देने पर सिरसा के विधायक गोकुल सेतिया और डबवाली विधायक देवेंद्र हंस आगबबूला हो गए। विधायकों ने मंच और बैठक की व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाते हुए अपनी सीटों पर लगी नाम की पर्चियां तक फाड़ डालीं।इस पूरे विवाद के बाद विधायक गोकुल सेतिया ने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को आड़े हाथों लिया और पाला बदलकर कांग्रेस में आए बड़े नेताओं की निष्ठा पर तीखा हमला बोला।
गोकुल सेतिया के हुबहू और बेबाक बयान
बैठक में हुए अपमान और पार्टी के भीतर चल रही अव्यवस्था पर बोलते हुए कांग्रेस विधायक गोकुल सेतिया ने सीधे शब्दों में कहा 'बीजेपी की मलाई खाने वाले नेता अब कांग्रेस में आकर हमें नसीहत दे रहे हैं। किसान आंदोलन में किसानों की खिलाफत इन दोनों नेताओं द्वारा की गई थी। आज वे मंच पर आगे बैठे हैं।' अपनी और विधायक देवेंद्र हंस की सीट पीछे धकेले जाने पर नाराजगी जताते हुए उन्होंने कहा 'मीटिंग में मेरी और विधायक देवेंद्र हंस के बैठने की पर्ची पीछे वाली लाइन में लगी थी। मेरी और देवेंद्र हंस की कुर्सी पीछे लगाई गई। मैंने पर्ची फाड़कर कोई गलती नहीं की। पर्ची फाड़कर मैं और देवेंद्र हंस आगे की लाइन में बैठ गए।'
जब पार्टी से 32 विधायक भी नहीं संभल रहे, तो पूरा संगठन कैसे संभलेगा?
समय से पहले आकर आगे की सीटें कब्जाने वाले नेताओं पर तंज कसते हुए सेतिया ने कहा 'कुछ नेता मीटिंग में टाइम से पहले ही आकर बैठ गए। जब मीटिंग में स्टार्टिंग ही गलत हो रही है तो मीटिंग से क्या उम्मीद कर सकते हैं?' डॉ. अशोक तंवर के साथ अपने पुराने राजनीतिक गतिरोध को याद करते हुए विधायक ने साफ किया 'मैंने भी जब 2014 में कांग्रेस पार्टी छोड़ी थी, तो इन्हीं के (अशोक तंवर के) कारण छोड़ी थी।' पार्टी संगठन की कमजोरी पर आलाकमान को नसीहत देते हुए उन्होंने कहा 'विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के 37 विधायक जीते थे। राज्यसभा चुनाव के बाद हमारे 4-5 विधायक भाग गए। जब पार्टी से 32 विधायक भी नहीं संभल रहे, तो पूरा संगठन कैसे संभलेगा? क्या ये पार्टी को हाशिए पर धकेलना चाहते हैं?"
विवाद की पुख्ता इनसाइड स्टोरी, पर्ची फाड़कर जताया विरोध
चंडीगढ़ में कांग्रेस के नए प्रभारी संजय दत्त की अध्यक्षता में चल रही इस बैठक में विधायकों के प्रोटोकॉल को दरकिनार किया गया। विधायक गोकुल सेतिया, देवेंद्र हंस और विकास सहारण के नाम की पर्चियां अग्रिम पंक्ति के बजाय पीछे की कतार में लगी थीं। इसे अपना अपमान मानते हुए विधायकों ने मौके पर ही अपनी नेम-स्लिप फाड़ दी और खुद आगे आकर बैठ गए। सेतिया का सीधा गुस्सा पूर्व सांसद बृजेंद्र सिंह और डॉ. अशोक तंवर की तरफ था, जो चुनाव से पहले बीजेपी और अन्य दलों से होकर वापस कांग्रेस में लौटे हैं। सेतिया का तर्क है कि जिन लोगों ने किसान आंदोलन के समय किसानों का विरोध किया और पार्टी को नुकसान पहुंचाया, उन्हें अग्रिम पंक्ति में बिठाकर वफादार विधायकों को पीछे धकेला जा रहा है।
पार्टी अध्यक्ष की सफाई
इस पूरे मचे बवाल पर हरियाणा कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह ने सफाई देते हुए कहा है कि मंच और बैठक का प्रबंधन आयोजन टीम का काम होता है। उन्होंने कहा, "विधायक अधिक हैं, इसलिए किसी न किसी का नंबर पीछे आना स्वाभाविक है। गोकुल सेतिया हमारे छोटे भाई जैसे हैं, वे युवा हैं और उनमें जोश है। अगर कोई आपत्ति थी तो वे मुझसे बात कर सकते थे, हम उनसे मिलकर चर्चा करेंगे।"
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