NEET-UG पेपर लीक विवाद और 'कॉकरोच जनता पार्टी' के आंदोलन के बाद, मशहूर पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने केंद्र सरकार को उसका लिखित वादा याद दिलाया है। उन्होंने कहा है कि एक महान राष्ट्र के निर्माण के लिए सरकार और युवाओं के बीच विश्वास होना बेहद आवश्यक है। इसके साथ ही दिल्ली सरकार और अदालती रुख के बाद प्रदर्शनकारियों पर दर्ज 13 एफआईआर को लेकर स्थिति साफ की गई है।
लिखित वादे का सम्मान हो
सोनम वांगचुक ने सरकार से अपील की है कि आंदोलन की समाप्ति के वक्त छात्रों पर कानूनी कार्रवाई न करने का जो लिखित आश्वासन दिया गया था, सरकार उस पर कायम रहे। उन्होंने संसद में पेश किए गए पब्लिक एग्जामिनेशन (अमेंडमेंट) बिल यानी सार्वजनिक परीक्षा विधेयक का स्वागत किया। उन्होंने उम्मीद जताई कि इससे देश की शिक्षा व्यवस्था में बड़े सुधार आएंगे।
भरोसा सबसे बड़ी जरूरत
वांगचुक ने अपने वीडियो संदेश में कहा मैं सरकार से अपील करना चाहता हूं कि जो समझौते पहले मेरे साथ लिखित में और फिर सीजेपी के साथ किए गए थे, कि वे प्रदर्शन में शामिल छात्रों पर कोई कानूनी कार्रवाई या एफआईआर नहीं करेंगे, सरकार को उस पर अडिग रहना चाहिए और देश में, विशेष रूप से युवा पीढ़ी के बीच विश्वास का माहौल बनाना चाहिए।
दिल्ली सरकार और कोर्ट का बड़ा फैसला: किस पर होगा एक्शन?
20 जुलाई को हुए 'संसद चलो मार्च' के दौरान दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर 13 FIR दर्ज की थीं। इस पर अब स्थिति पूरी तरह साफ हो चुकी है। दिल्ली के गृह मंत्री आशीष सूद ने स्पष्ट किया है कि विरोध प्रदर्शन कर रहे निर्दोष छात्रों और आम नागरिकों के खिलाफ कोई दंडात्मक या कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी।
आपराधिक रिकॉर्ड वालों पर शिकंजा
यह छूट उन लोगों पर बिल्कुल भी लागू नहीं होगी जिनका पहले से कोई क्रिमिनल रिकॉर्ड है। जिन लोगों ने विरोध प्रदर्शन की आड़ में तोड़फोड़, हिंसा या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया है, पुलिस केवल उन्हीं उपद्रवियों पर कानूनी शिकंजा कसेगी। अदालत ने भी निर्देश दिया है कि जिन छात्रों का कोई पुराना आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, उन्हें तुरंत रिहा किया जाए और प्रदर्शन से जुड़े सभी इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखा जाए।
कैसे टूटा था वांगचुक का अनशन?
सोनम वांगचुक छात्रों की मांगों जैसे- पेपर लीक की जांच, मुआवजा और शिक्षा मंत्री का इस्तीफा के समर्थन में 26 दिनों तक आमरण अनशन पर बैठे थे। सरकार द्वारा प्रदर्शनकारी छात्रों पर कोई कानूनी कार्रवाई न करने की गारंटी मिलने के बाद, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा और पीएमओ राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह की मौजूदगी में मेदांता अस्पताल में उन्होंने अपना उपवास तोड़ा था। सीजेपी और छात्राओं द्वारा किये गए प्रोस्टेट को भी सरकार के आश्वासन के बाद ही समाप्त किया गया था, जिसमें सरकार द्वारा प्रदर्शनकारियों पर एफआईआर ना करने की मांग को भी माना गया था।
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